Harish Sharma नई दिल्ली/पिथौरागढ़ : उत्तराखंड की संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और प्रेरणादायक कहानियों को पर्दे पर उतारने वाले फिल्म निर्माता एवं निर्देशक हरीश शर्मा के लिए बड़ी खुशखबरी है. उनकी दो चर्चित डॉक्यूमेंट्री ‘आदि कैलाश – ए फॉरगॉटन पाथ टू द डिवाइन’ और ‘ब्राजील इन बनारस – द भैरब दत्त स्टोरी’ का चयन पहले उत्तराखंडी फिल्म फेस्टिवल 2026 के लिए किया गया है. देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में पुरस्कार जीतने के बाद अब दोनों फिल्मों की पिथौरागढ़ में खास वापसी होगी. इस उपलब्धि से न केवल फिल्म निर्माता और उनकी टीम उत्साहित है, बल्कि स्थानीय संस्कृति और प्रतिभाओं को पहचान मिलने की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं.

1 से 11 दिसंबर तक चलेगा उत्तराखंडी फिल्म फेस्टिवल
पहला उत्तराखंडी फिल्म फेस्टिवल 2026 आगामी 1 से 11 दिसंबर तक आयोजित किया जाएगा. महोत्सव की शुरुआत पिथौरागढ़ से होगी. इसके बाद हल्द्वानी और रुद्रपुर में फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा. अंत में देहरादून में महोत्सव का समापन होगा.
हरीश शर्मा के निर्देशन में बनी दोनों डॉक्यूमेंट्री का इस महोत्सव में चयन खास मायने रखता है. एक फिल्म उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत और हिमालय की खूबसूरती को सामने लाती है, जबकि दूसरी पिथौरागढ़ में जन्मे फुटबॉल खिलाड़ी एवं कोच भैरब दत्त के संघर्ष और उपलब्धियों की कहानी कहती है.
देहरादून फिल्म फेस्टिवल में भी मिला बड़ा सम्मान
हरीश शर्मा की दोनों डॉक्यूमेंट्री हाल ही में आयोजित 11वें देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी अपनी छाप छोड़ चुकी हैं. ‘ब्राजील इन बनारस’ को सर्वश्रेष्ठ खेल डॉक्यूमेंट्री और सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार मिला, जबकि ‘आदि कैलाश’ को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन डॉक्यूमेंट्री के सम्मान से नवाजा गया.
फिल्मों को दर्शकों की सराहना भी मिली. अब उत्तराखंडी फिल्म फेस्टिवल में इनके चयन को इस सफलता की अगली कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है.
‘आदि कैलाश’ में दिखेगी हिमालय की आध्यात्मिक विरासत
संदीप झा द्वारा निर्मित, हरीश शर्मा निर्देशित और अभिनेता हेमंत पांडे द्वारा प्रस्तुत डॉक्यूमेंट्री ‘आदि कैलाश – ए फॉरगॉटन पाथ टू द डिवाइन’ उत्तराखंड के प्रसिद्ध लेखक और हिमालयी ट्रैकर डॉ. ललित पंत की चर्चित पुस्तक ‘अजपथों से हिमशिखरों तक’ से प्रेरित है.
फिल्म में आदि कैलाश की आध्यात्मिक महत्ता, हिमालय की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, स्थानीय संस्कृति और पर्यटन की संभावनाओं को दर्शाया गया है. यह डॉक्यूमेंट्री दर्शकों को उत्तराखंड की उन खासियतों से रूबरू कराती है, जो इस क्षेत्र को आध्यात्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के लिहाज से विशिष्ट बनाती हैं.
अपनी पुस्तक से प्रेरित फिल्म को मिल रही पहचान पर डॉ. ललित पंत ने प्रसन्नता व्यक्त की. अभिनेता हेमंत पांडे ने इसे उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण बताया. वहीं, निर्माता संदीप झा का कहना है कि फिल्म की सफलता ने सार्थक डॉक्यूमेंट्री निर्माण के प्रति उनके विश्वास को और मजबूत किया है. फिल्म से जुड़े सभी लोगों ने उत्तराखंडी फिल्म फेस्टिवल में शामिल होने को लेकर उत्साह जताया.
‘ब्राजील इन बनारस’ में भैरब दत्त के संघर्ष की कहानी
दूसरी डॉक्यूमेंट्री ‘ब्राजील इन बनारस – द भैरब दत्त स्टोरी’ की कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है. दीपक पारीक द्वारा निर्मित यह फिल्म पिथौरागढ़ में जन्मे और पले-बढ़े प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी एवं कोच भैरब दत्त के जीवन पर आधारित है.
भैरब दत्त ने बनारस में रहते हुए अपना जीवन युवा फुटबॉल खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए समर्पित कर दिया. फिल्म उनके संघर्ष, समर्पण और खेल के प्रति जुनून को सामने लाती है. उत्तराखंडी फिल्म फेस्टिवल में इस डॉक्यूमेंट्री का चयन इसलिए भी खास है, क्योंकि अब भैरब दत्त की कहानी उनके अपने शहर पिथौरागढ़ के लोगों तक पहुंचेगी.
निर्माता दीपक पारीक ने कहा, “देहरादून में फिल्म को मिली जबरदस्त सराहना और अब उत्तराखंडी फिल्म फेस्टिवल में चयन इस बात का प्रमाण है कि सच्ची और प्रेरणादायक कहानियां दर्शकों के दिलों तक पहुंचती हैं. भैरब दत्त की कहानी उनके अपने शहर पिथौरागढ़ में दिखाना हमारे लिए गर्व की बात होगी.”
फिल्म के चयन से भावुक भैरब दत्त ने भी पिथौरागढ़ लौटने को लेकर अपनी खुशी जाहिर की. उन्होंने कहा, “बिल्कुल आऊंगा पिथौरागढ़! यह मेरा अपना शहर है, जहां मेरा जन्म हुआ, जहां मैं पला-बढ़ा. यह फिल्म फेस्टिवल मेरे लिए अपने परिवार, बचपन के दोस्तों और पुराने साथियों से पुनर्मिलन जैसा होगा. मैं बेसब्री से पिथौरागढ़ लौटने का इंतजार कर रहा हूं.”
हरीश शर्मा के लिए भावुक होगी पिथौरागढ़ में वापसी
दोनों फिल्मों के निर्देशक हरीश शर्मा ने कहा कि देहरादून इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में मिली शानदार सफलता के बाद उत्तराखंडी फिल्म फेस्टिवल में दोनों डॉक्यूमेंट्री का चयन उनके इस विश्वास को मजबूत करता है कि उनकी मेहनत रंग ला रही है.
उन्होंने कहा, “पिथौरागढ़ मेरी कर्मभूमि है और अपनी दोनों फिल्मों को वहां के लोगों के बीच ले जाना मेरे लिए बेहद भावुक क्षण होगा. एक फिल्म उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत को समर्पित है, तो दूसरी पिथौरागढ़ के एक महान खिलाड़ी के संघर्ष और उपलब्धियों को। हम सभी इस फिल्म फेस्टिवल में शामिल होने के लिए उत्साहित हैं.”
हरीश शर्मा की दोनों डॉक्यूमेंट्री का उत्तराखंडी फिल्म फेस्टिवल 2026 में चयन क्षेत्रीय कहानियों और स्थानीय प्रतिभाओं को बड़े मंच पर पहचान दिलाने की दिशा में अहम उपलब्धि है. देहरादून में पुरस्कार जीतने के बाद अब पिथौरागढ़ में इन फिल्मों का प्रदर्शन उनके लिए पेशेवर सफलता के साथ-साथ अपनी कर्मभूमि से जुड़ने का भावुक अवसर भी होगा.

