अंबिकापुर में सरकारी धन की हेराफेरी का मामला उजागर, पूर्व जनपद सीईओ समेत नौ पर पुलिस का शिकंजा

अंबिकापुर। सरगुजा जिले के केशवपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के निर्माण कार्यों के लिए आवंटित 1.32 करोड़ रुपये की भारी-भरकम जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) राशि के गबन और गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के प्रकरण में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। स्थानीय मणिपुर थाना पुलिस ने न्यायालय के स्पष्ट आदेशों का पालन करते हुए तत्कालीन जनपद मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित कुल नौ लोगों के खिलाफ आपराधिक धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। यह विधिक कार्रवाई अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गुलापनराम यादव की अदालत द्वारा दिए गए कड़े निर्देशों के आधार पर अमल में लाई गई है।

न्यायालय के हस्तक्षेप और जांच के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

केशवपुर स्थित उक्त अंग्रेजी माध्यम स्कूल के विभिन्न बुनियादी ढांचे के विकास और निर्माण कार्यों के लिए 31 मार्च 2023 को 1.32 करोड़ रुपये की प्रशासकीय राशि स्वीकृत की गई थी, जिसके निर्माण की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत केशवपुर को सौंपी गई थी। इस पूरी प्रक्रिया में व्यापक पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की शिकायत शिकायतकर्ता अभय नारायण पांडेय द्वारा जिला कलेक्टर से की गई थी। कलेक्टर के निर्देश पर गठित जांच दल ने 7 अक्टूबर 2024 को स्थल पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन किया था, जिसमें गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं थीं। हालांकि, आरोप है कि शुरुआती स्तर पर जांच अधिकारियों ने दोषियों को बचाने का प्रयास किया, जिसके पश्चात न्याय की गुहार लगाते हुए मामला अदालत की देहरी तक पहुँचा।

नियमों को ताक पर रखकर निजी फर्मों को किया गया भुगतान

अदालत में प्रस्तुत परिवाद और साक्ष्यों पर सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस को त्वरित प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना करने के आदेश दिए। जांच के दायरे में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि तत्कालीन जनपद सीईओ सुरेश्वर नाथ तिवारी ने प्रचलित पंचायत एवं निर्माण नियमों को पूरी तरह दरकिनार करते हुए दो निजी ठेका कंपनियों—अनन्या कंस्ट्रक्शन और मेसर्स स्मृति कंस्ट्रक्शन से सांठगांठ कर कार्य कराए। विद्यालय परिसर में सीमेंट-कंक्रीट सड़क निर्माण, सौंदर्यीकरण, प्रधान पाठक कक्ष, बाउंड्री वॉल, मुख्य प्रवेश द्वार और पार्किंग शेड जैसे तमाम निर्माण कार्य बिना किसी पारदर्शी प्रक्रिया के इन ठेकेदारों के माध्यम से करवाए गए थे।

फर्जी बिल-वाउचर और संलिप्त आरोपियों पर पुलिस की कार्रवाई

वित्तीय हेराफेरी के इस पूरे षड्यंत्र को अंजाम देने के लिए तत्कालीन जनपद सीईओ ने ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव को अपने कार्यालय में तलब कर पंचायत के आधिकारिक बैंक खाते से राशि आहरित करवाई और सीधे आरटीजीएस के जरिए ठेकेदार फर्मों के खातों में अंतरित कर दी। इस अवैध लेनदेन को वैध साबित करने के वास्ते जाली मूल्यांकन रिपोर्ट और फर्जी बिल-वाउचर तैयार किए गए थे। मणिपुर थाना पुलिस ने अदालत के आदेश पर तत्कालीन जनपद सीईओ सुरेश्वरनाथ तिवारी, सब इंजीनियर विवेक प्रताप सिंह राठौर, तत्कालीन सीईओ उपेंद्र सिंह सेंगर, तत्कालीन सचिव राम प्रकाश यादव, तत्कालीन सरपंच इम्तान सिंह, सुयश अग्रवाल, अनन्या कंस्ट्रक्शन के अरविंद कुमार अग्रवाल समेत कुल नौ लोगों को नामजद आरोपी बनाया है, और पुलिस अब इस पूरे घोटाले की गहराई से छानबीन कर रही है।

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