अलनीनो से बिगड़ा दालों का गणित, आयात में भारी बढ़ोतरी के बाद भी कीमतें ऊंची

नई दिल्ली। देश में घरेलू स्तर पर कृषि उत्पादन को लेकर मंडरा रही चिंताओं और संभावित अल नीनो जैसी मानसूनी अनिश्चितताओं के बीच भारतीय दलहन बाजार में विदेशी आयात का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों के दौरान देश का कुल दलहन आयात लगभग 67 प्रतिशत की भारी छलांग लगाते हुए 20.6 लाख टन के ऊंचे स्तर पर पहुँच गया है, जबकि गत वर्ष इसी समयावधि में यह आंकड़ा काफी कम था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार आयात की गई दालों की मात्रा में भारी वृद्धि के साथ-साथ इनका कुल वित्तीय मूल्य भी 38 प्रतिशत बढ़कर 1.18 अरब डॉलर हो गया है।

खुदरा बाजारों में तुअर, चना और उड़द के ऊंचे दाम

विदेशी बाजारों से दालों के आयात में इतनी बड़ी बढ़ोतरी दर्ज किए जाने के बावजूद देश के घरेलू खुदरा बाजारों में प्रमुख दालों के दाम अभी भी काफी ऊंचे और कड़े बने हुए हैं। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार खुदरा बाजार में तुअर दाल का भाव 132.75 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 15 प्रतिशत अधिक है। इसी प्रकार चना 93.48 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर बिक रहा है जिसमें 7.5 प्रतिशत की तेजी आई है, जबकि उड़द दाल का भाव 10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 125.46 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया है।

मसूर और पीली मटर के आयात में रिकॉर्ड उछाल

केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के प्राइस मॉनिटरिंग सेल से प्राप्त विवरण के अनुसार पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इस बार प्रमुख दलहनों की विदेशी खरीद में अभूतपूर्व तेजी आई है। विशेष रूप से मसूर का आयात रिकॉर्ड 200 प्रतिशत की छलांग लगाकर 6.4 लाख टन के स्तर को छू गया है। वहीं, पीली मटर का आयात भी 114 प्रतिशत बढ़कर 6.2 लाख टन हो गया है। इसके अतिरिक्त तुअर का आयात 10 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 3.5 लाख टन दर्ज किया गया, हालांकि उड़द का आयात मामूली रूप से 3 प्रतिशत घटकर 2.7 लाख टन पर सिमट गया है।

चने की कीमतों में एक महीने के भीतर तेज उछाल और भविष्य की दिशा

घरेलू जिंस बाजारों में इन दिनों चने की कीमतों को लेकर हलचल काफी तेज हो गई है। पिछले केवल एक महीने के अंतराल में ही चने के बाजार भाव में करीब आठ प्रतिशत की तेजी दर्ज की जा चुकी है। राजधानी दिल्ली की प्रमुख मंडी में चने का वर्तमान भाव 7,499.90 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा है, जबकि पिछले महीने 25 सितंबर को यह 7,058.40 रुपये प्रति क्विंटल था। कृषि कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में बाजार की चाल मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करेगी कि ऑस्ट्रेलिया से भारत में चने की कितनी खेप पहुंचती है, सरकारी एजेंसियां अपने बफर स्टॉक से कितनी आक्रामक रूप से खुले बाजार में बिक्री करती हैं तथा आगामी रबी सीजन के दौरान देश में चने का वास्तविक बुआई रकबा कितना रहता है। इसी प्रकार देश की अन्य प्रमुख मंडियों जैसे बीकानेर और अकोला में भी चने के दामों में पिछले एक महीने के भीतर 5 से 8 प्रतिशत तक की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

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