Bhuwan Chandra Khanduri गैरसैंण (उत्तराखंड): उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय सेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के निधन पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. मंगलवार को भराड़ीसैंण (गैरसैंण) स्थित विधानसभा में मुख्यमंत्री ने उनके व्यक्तित्व, सैन्य सेवाओं, राजनीतिक योगदान और उत्तराखंड के विकास के लिए किए गए कार्यों को याद किया. उन्होंने कहा कि खंडूड़ी का जीवन सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल रहा है. देश की रक्षा से लेकर उत्तराखंड के विकास तक उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वर्गीय भुवन चंद्र खंडूड़ी एक अनुशासित सैनिक, समर्पित जनसेवक और कुशल प्रशासक थे. उन्होंने अपना पूरा जीवन देश और समाज की सेवा के लिए समर्पित किया. ऊंचे पदों पर रहने के बावजूद उन्होंने अपने सिद्धांतों और मूल्यों से कभी समझौता नहीं किया.
‘खंडूड़ी जी केवल उत्तराखंड ही नहीं, पूरे देश के नायक थे’
विधानसभा में श्रद्धांजलि देते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सदन में ऐसे महान व्यक्तित्व को याद करना भावुक क्षण है. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण का उल्लेख करते हुए कहा कि एक बेटी के लिए उसके पिता पहले नायक होते हैं, लेकिन मेजर जनरल खंडूड़ी केवल अपने परिवार या उत्तराखंड के ही नहीं, बल्कि पूरे देश के नायक रहे.
मुख्यमंत्री के अनुसार, खंडूड़ी ने जीवन में जिस भी जिम्मेदारी को संभाला, उसे पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाया. उनका प्रशासनिक दृष्टिकोण अनुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा पर आधारित था। यही वजह है कि उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली को आज भी सम्मान के साथ याद किया जाता है.
1971 के भारत-पाक युद्ध में दिखाई वीरता
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का सार्वजनिक जीवन सेना में देशसेवा से शुरू हुआ. मुख्यमंत्री धामी ने उनके सैन्य जीवन को याद करते हुए कहा कि वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उन्होंने साहस और रणनीतिक कौशल का परिचय दिया था.
भारतीय सेना की इंजीनियरिंग सेवाओं में रहते हुए उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया.
धामी ने कहा कि सेना में खंडूड़ी का अनुशासित और समर्पित जीवन देशसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है. सैन्य पृष्ठभूमि का प्रभाव उनके प्रशासनिक कार्यों में भी दिखाई देता था. जिम्मेदारियों के प्रति गंभीरता, समयबद्धता और अनुशासन उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएं थीं.
पांच बार गढ़वाल से सांसद चुने गए, उत्तराखंड राज्य की मांग को उठाया
सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भुवन चंद्र खंडूड़ी ने राजनीति और जनसेवा के क्षेत्र में कदम रखा. मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि वर्ष 1991 में वह गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए. उन्होंने पांच बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया और संसद में उत्तराखंड की आकांक्षाओं को मजबूती से उठाया.
अलग उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा. उन्होंने संसद में क्षेत्र की समस्याओं और पृथक राज्य की जरूरत को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया. उनके वक्तव्यों और स्पष्ट विचारों ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन को वैचारिक मजबूती प्रदान करने में भूमिका निभाई.
मुख्यमंत्री ने कहा कि खंडूड़ी ने उत्तराखंड की राजनीतिक और सामाजिक पहचान को मजबूत करने में योगदान दिया. उनका सार्वजनिक जीवन प्रदेश के हितों को प्राथमिकता देने का उदाहरण रहा.
अटल सरकार में सड़क परिवहन मंत्री रहते हुए किए अहम काम
भुवन चंद्र खंडूड़ी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के रूप में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई. इस दौरान देश में सड़क संपर्क और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका रही.
मुख्यमंत्री धामी ने विशेष रूप से स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का उल्लेख किया. इन योजनाओं ने देश में सड़क नेटवर्क के विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर संपर्क उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
सड़क परिवहन के क्षेत्र में उनके प्रयासों का लाभ आज भी देश के करोड़ों लोगों को मिल रहा है. बेहतर सड़क संपर्क ने दूरदराज के इलाकों को जोड़ने, आवागमन आसान बनाने और विकास की संभावनाओं को विस्तार देने में मदद की है.
दो बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने, स्वच्छ प्रशासन पर दिया जोर
भुवन चंद्र खंडूड़ी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में भी अपनी अलग पहचान रखते थे. उन्होंने वर्ष 2007 और वर्ष 2011 में राज्य की कमान संभाली. मुख्यमंत्री धामी ने उनके कार्यकाल को पारदर्शी, भ्रष्टाचार मुक्त और अनुशासित शासन की दिशा में किए गए प्रयासों के लिए याद किया.
धामी ने कहा कि खंडूड़ी ने मजबूत लोकायुक्त व्यवस्था स्थापित करने की दिशा में पहल की थी. यह भ्रष्टाचार के प्रति उनके सख्त रुख और स्वच्छ प्रशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
उनका मानना था कि सरकार की जिम्मेदारी केवल योजनाएं तैयार करना नहीं है, बल्कि उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी है. उनकी कार्यशैली में सेना के अनुशासन के साथ जनता के प्रति संवेदनशीलता और सेवाभाव का समन्वय देखने को मिलता था.
मुख्यमंत्री ने उनके प्रशासनिक दृष्टिकोण को याद करते हुए कहा कि खंडूड़ी ने सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और जवाबदेही को महत्वपूर्ण स्थान दिया. उनके लिए शासन का उद्देश्य जनता की समस्याओं का समाधान करना और प्रदेश के विकास को गति देना था.
CM धामी को मिलता रहा खंडूड़ी का स्नेह और मार्गदर्शन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में मेजर जनरल खंडूड़ी के साथ अपने संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि खंडूड़ी ने उत्तराखंड की राजनीति और जनमानस में विशिष्ट पहचान बनाई. उनके व्यक्तित्व और कार्यों ने उनके जैसे अनेक युवाओं को भी देवभूमि की सेवा के लिए प्रेरित किया.
धामी ने कहा कि यह उनका सौभाग्य रहा कि उन्हें खंडूड़ी का स्नेह और मार्गदर्शन लगातार प्राप्त होता रहा. उनके जीवन से ईमानदारी, अनुशासन और कर्तव्य के प्रति समर्पण की प्रेरणा मिलती है.
खंडूड़ी का व्यक्तित्व केवल राजनीतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं था. उनकी पहचान एक ऐसे जनप्रतिनिधि के रूप में रही, जिन्होंने सैन्य सेवा के बाद भी सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहकर देश और प्रदेश के लिए योगदान दिया.
91 वर्ष की उम्र में हुआ निधन, उत्तराखंड के लिए अपूरणीय क्षति
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन 19 मई 2026 को 91 वर्ष की आयु में हुआ था. मुख्यमंत्री धामी ने इसे प्रदेश और राष्ट्र के सार्वजनिक जीवन के लिए अपूरणीय क्षति बताया.
उन्होंने कहा कि खंडूड़ी के जाने से एक युग का अंत हुआ है. हालांकि, महान व्यक्तित्व अपने कार्यों, विचारों और आदर्शों के माध्यम से हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहते हैं.
मुख्यमंत्री के अनुसार, खंडूड़ी का अनुशासित जीवन, ईमानदार कार्यशैली और उत्तराखंड के विकास के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा.
मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी का जीवन सैन्य सेवा, संसदीय राजनीति, केंद्रीय मंत्री के रूप में जिम्मेदारी और राज्य के मुख्यमंत्री के तौर पर प्रशासनिक अनुभव का संगम रहा. उनके योगदान को याद करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने उनके आदर्शों पर चलने और जनसेवा को प्राथमिकता देने का संदेश दिया.

