मोहन भागवत बोले- जब-जब बंटे, तब-तब कमजोर हुए, नागपुर में दिया संदेश

नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने नागपुर के रेशिमबाग मैदान में भव्य विजयादशमी समारोह का आयोजन किया। संगठन के 100 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित इस शताब्दी वर्ष के समापन समारोह में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने शस्त्र पूजा की और संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सहित कई दिग्गज हस्तियां शामिल हुईं।

मोहन भागवत ने की शस्त्र पूजा

रेशिमबाग मैदान में आयोजित मुख्य समारोह के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत ने विधिवत शस्त्र पूजा की और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को फूल चढ़ाकर नमन किया। इस अवसर पर महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले समेत संघ के कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि डॉ. हेडगेवार ने 1925 में इसी दिन नागपुर में आरएसएस की स्थापना की थी, तभी से संघ हर साल विजयादशमी पर अपना प्रमुख वार्षिक उत्सव मनाता आ रहा है।

स्वदेशी और संत रविदास के संदेशों का जिक्र

अपने संबोधन में मोहन भागवत ने बंगाल के राजनारायण बसु के जन्म के 200 साल पूरे होने का जिक्र करते हुए लोगों को अपनी संस्कृति और पहचान से जुड़ने के लिए स्वदेशी मेलों के माध्यम से जागरूकता फैलाने की बात कही। इसके अलावा उन्होंने संत रविदास के योगदान को याद करते हुए कहा कि विदेशी आक्रमणों और अत्याचारों के दौर में जब समाज में डर का माहौल था, तब संत रविदास ने लोगों को अपने धर्म पर टिके रहने, आपसी भेदभाव मिटाने और भक्ति का मार्ग अपनाने की प्रेरणा दी थी।

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