Dhamtari Leopard Attack : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में अपनी तीन साल की बेटी को तेंदुए के हमले से बचाने के लिए एक पिता ने जान की परवाह किए बिना उसका सामना किया. तेंदुए ने बच्ची पर हमला किया तो पिता सुरेश मरकाम उससे भिड़ गए. इसके बाद आसपास के ग्रामीण भी मदद के लिए दौड़े और सामूहिक प्रयास से तेंदुए को काबू कर लिया. यह घटना 16 अक्टूबर 2026 की सुबह आमानारा गांव में हुई.
इससे पहले तेंदुआ धमतरी और पड़ोसी कोंडागांव जिले की सीमा से लगे गांवों में लगातार लोगों पर हमला कर चुका था. अधिकारियों के मुताबिक, 15 अक्टूबर से शुरू हुए हमलों में दो लोगों की मौत हुई और 14 अन्य घायल हुए. शुक्रवार को तेंदुए को पकड़ लिए जाने के बाद क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली.
16 अक्टूबर की सुबह करीब 7:30 बजे आमानारा गांव में तेंदुए के पहुंचने से अफरा-तफरी मच गई. इससे पहले भी वह आसपास के गांवों में लोगों पर हमला कर चुका था. ग्रामीणों के मुताबिक, तेंदुए ने आमानारा में भी कई लोगों को घायल किया.
इसी दौरान तेंदुआ सुरेश मरकाम की छोटी बेटी सुहानी पर झपटा. बच्ची को खतरे में देखकर सुरेश ने बिना किसी हथियार के तेंदुए को पीछे से पकड़ लिया. रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने उसके पिछले पैर जकड़ लिए, ताकि वह बच्ची पर दोबारा हमला न कर सके.
पिता को तेंदुए से भिड़ता देख आसपास मौजूद ग्रामीण भी मदद के लिए दौड़े. कुछ लोग लाठी और रस्सियां लेकर पहुंचे और मिलकर तेंदुए को घेर लिया. ग्रामीणों ने उसे काबू में रखा और वन विभाग को सूचना दी. स्थानीय रिपोर्टों में दावा किया गया कि ग्रामीणों ने करीब 20 मिनट तक तेंदुए को काबू में रखा, जब तक कि उसे वन विभाग के हवाले करने की व्यवस्था नहीं हो गई.
चार गांवों में हमले, गर्भवती महिला समेत दो लोगों की मौत
धमतरी और कोंडागांव जिलों की सीमा पर स्थित वनांचल क्षेत्र में तेंदुए के हमलों ने लोगों को दहशत में डाल दिया था. वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, 15 अक्टूबर से पहले शुरू हुए हमलों के सिलसिले में चार गांव प्रभावित हुए.
हमलों में दो लोगों की मौत हुई, जबकि 14 अन्य घायल हुए. मृतकों में कोंडागांव जिले के बस्तर बुडरा गांव की गर्भवती महिला रामशिला मंडावी और धमतरी जिले के आमानारा गांव के प्रभु पर्डे शामिल थे.
करीपानी में तेंदुए के हमले में बुजुर्ग उर्मिला बाई मरकाम, उनके भाई सुंदरलाल नेताम और एक अन्य ग्रामीण घायल हुए थे. इसके बाद तेंदुआ दूसरे गांवों की ओर बढ़ा और वहां भी लोगों को निशाना बनाया.
रामशिला मंडावी की अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई. वहीं, प्रभु पर्डे को धमतरी जिले के नगरी अस्पताल में मृत घोषित किया गया. घायलों को धमतरी, कोंडागांव और कांकेर के अस्पतालों में भर्ती कराया गया.
14 हमले या 16 लोग प्रभावित? आंकड़ों में क्या है अंतर
इस घटना के बारे में सामने आई रिपोर्टों में हमलों और घायलों की संख्या को लेकर अंतर देखने को मिला है। वन विभाग के अधिकारी बाल गोविंद साहू के अनुसार, तेंदुए ने 16 लोगों पर हमला किया था. इनमें दो की मौत हुई और 14 घायल हुए.
दूसरी ओर, कुछ स्थानीय रिपोर्टों में ग्रामीणों के हवाले से दावा किया गया कि तीन दिनों के दौरान 19 से अधिक लोग हमलों में प्रभावित हुए. यह संख्या आधिकारिक आंकड़े से अधिक है.
ड्रोन और पिंजरे भी नहीं पकड़ पाए तेंदुए को
तेंदुए को पकड़ने के लिए वन विभाग ने कई स्तरों पर प्रयास किए थे. सीतानदी वन्यजीव अभयारण्य के अधिकारियों के मुताबिक, इलाके में पिंजरे लगाए गए और थर्मल ड्रोन कैमरों की मदद भी ली गई. जंगल सफारी की टीम को भी बुलाया गया था.
इसके बावजूद तेंदुआ पकड़ में नहीं आया और लगातार अलग-अलग गांवों में हमले होते रहे. आखिरकार 16 अक्टूबर की सुबह आमानारा में ग्रामीणों ने उसे काबू कर लिया और वन विभाग को सौंप दिया.
तेंदुए को रेबीज था या कोई दूसरी समस्या? जांच के बाद पता चलेगा
लगातार लोगों पर हमला करने वाले तेंदुए के व्यवहार को लेकर वन विभाग ने संभावित कारणों की जांच की बात कही. अधिकारियों ने आशंका जताई कि उसके आक्रामक व्यवहार के पीछे रेबीज संक्रमण या कोई शारीरिक समस्या हो सकती है.हालांकि, रेबीज होने की पुष्टि नहीं हुई थी. अधिकारियों के अनुसार, वास्तविक कारण का पता चिकित्सकीय जांच के बाद ही चल सकेगा.
तेंदुए को पकड़ने के बाद उसे विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की जांच और देखभाल के लिए नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी ले जाने की जानकारी दी गई थी. प्रभावित गांवों में वन विभाग के कर्मचारी तैनात रहे और ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दी गई.
वन विभाग के अधिकारी बाल गोविंद साहू के मुताबिक, सरकारी नियमों के तहत मृतकों के परिजनों को तत्काल 25 हजार रुपये की सहायता दी गई. शेष मुआवजा औपचारिकताएं पूरी होने के बाद देने की बात कही गई थी. घायलों को भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है.
धमतरी की घटना ने फिर उठाए मानव-वन्यजीव संघर्ष पर सवाल
धमतरी और कोंडागांव की सीमा पर हुई यह घटना केवल एक पिता के साहस की कहानी नहीं है, यह उन गांवों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल भी है, जहां जंगल और रिहायशी इलाकों के बीच लगातार संपर्क बना रहता है.
एक तरफ वन्यजीवों के संरक्षण की जरूरत है, तो दूसरी तरफ जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों की जान-माल की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. जब कोई जंगली जानवर आबादी वाले इलाके में पहुंचकर लगातार लोगों पर हमला करता है, तो समय पर निगरानी, त्वरित कार्रवाई और ग्रामीणों तक सही सूचना पहुंचाना बेहद जरूरी हो जाता है.
आमानारा में सुरेश मरकाम ने अपनी बेटी को बचाने के लिए जो किया, वह साहस का उदाहरण है, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में ग्रामीणों को खुद तेंदुए से भिड़ने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए. वन विभाग की त्वरित कार्रवाई और प्रशिक्षित टीमों की मदद ही ऐसी घटनाओं में जान का जोखिम कम कर सकती है.
फिलहाल तेंदुए को पकड़ लिया गया है, लेकिन इस घटना से प्रभावित परिवारों के लिए चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है. घायलों का उपचार, मृतकों के परिजनों को सहायता और भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए प्रभावी इंतजाम अब सबसे महत्वपूर्ण हैं.

