CJP पर दिल्ली पुलिस का पलटवार, कहा- कानून नहीं मानते, पुलिस की छवि खराब की

CJP Protest Delhi Police : दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर अब दिल्ली पुलिस ने एक प्रेस कांफ्रेंस किया जिसमें कॉक्रोच जनता पार्टी के लोगों पर जम कर आरोप लगाये गये हैं.  दिल्ली पुलिस ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि पुलिस की छवि गलत तरीके से पेश करने की जा रही है. पुलिस के मुताबिक, पहले भी प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने के बावजूद तय शर्तों का पालन नहीं किया गया था और हिंसा, पत्थरबाजी तथा आगजनी की घटनाएं हुई थीं. इसी आधार पर इस बार जनपथ पर धरने की अनुमति नहीं दी गई.

दिल्ली पुलिस की डीसीपी और पीआरओ नेहा यादव ने अभिजीत दीपके की हिरासत तथा उनकी दादी के निधन की सूचना दिए जाने के मामले में भी सफाई दी। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि वह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के साथ 12 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करेंगे। इस दौरान लोकतांत्रिक अधिकारों, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और चुनाव आयोग में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया जाएगा।

CJP Protest Delhi Police:CJP पर दिल्ली पुलिस का आरोप- पहले नहीं मानी गईं शर्तें

डीसीपी नेहा यादव ने कहा कि CJP के पिछले आचरण को देखते हुए उसके प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई. पुलिस के अनुसार, पहले प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने के बावजूद निर्धारित शर्तों और स्थानीय निर्देशों का पालन नहीं हुआ था. पुलिस ने दावा किया कि उस दौरान भीड़ की ओर से भारी पत्थरबाजी, आगजनी और हिंसा की गई, जिससे सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा.

नेहा यादव के मुताबिक, जनपथ पर धरने की अनुमति देने से इनकार करने के पीछे निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन नहीं करना, कानून और दिशानिर्देशों के उल्लंघन का पिछला रिकॉर्ड तथा मौजूदा सुरक्षा स्थिति जैसे कारण थे.

पुलिस ने यह भी बताया कि नई दिल्ली के कई इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई थी. इसके तहत संबंधित क्षेत्रों में जमावड़े और विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाया गया था. पुलिस का कहना है कि ये कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा के लिए उठाए गए.

अभिजीत दीपके की दादी के निधन पर पुलिस ने क्या कहा?

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की हिरासत और उनकी दादी के निधन की सूचना को लेकर भी विवाद सामने आया है. डीसीपी नेहा यादव ने कहा कि जैसे ही पुलिस को उनकी दादी के निधन की जानकारी मिली, अधिकारियों ने अभिजीत से संपर्क किया और उन्हें इस दुखद समाचार के बारे में बताया.

नेहा यादव के अनुसार, पुलिस ने अभिजीत को हरसंभव सहायता देने की पेशकश की. उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें उड़ान की व्यवस्था, फोन कॉल या किसी अन्य तरह की मदद चाहिए. पुलिस का दावा है कि अधिकारियों ने उनसे बार-बार यह भी पूछा कि क्या वह अपने माता-पिता से बात करना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने मना कर दिया.

पुलिस ने आरोप लगाया कि CJP की प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस घटनाक्रम को सही तरीके से पेश नहीं किया गया. अधिकारियों का कहना है कि संगठन की ओर से लगाए गए आरोपों के कारण पुलिस की छवि को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है.

अभिजीत दीपके और दो साथियों को क्यों लिया गया हिरासत में?

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अभिजीत दीपके और उनके दो साथियों सौरव तथा आशुतोष को 10 अक्टूबर को जनपथ पर प्रस्तावित प्रदर्शन के आह्वान के संबंध में हिरासत में लिया गया था. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई थी और संबंधित क्षेत्रों में प्रतिबंध लागू थे.

पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी प्रदर्शन के आयोजन में निर्धारित प्रक्रियाओं और लागू निर्देशों का पालन जरूरी है. अधिकारियों के मुताबिक, पिछली घटनाओं और मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए इस बार अनुमति नहीं देने का फैसला किया गया.

प्रदर्शन की अनुमति और लोकतांत्रिक अधिकारों पर बहस

दिल्ली पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है. वहीं, प्रदर्शन पर रोक और हिरासत की कार्रवाई जैसे मामलों में नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

इस पूरे घटनाक्रम में दो पक्षों के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है. पुलिस ने पिछली हिंसा, कथित तौर पर शर्तों का पालन नहीं करने और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को अनुमति नहीं देने का आधार बताया है. दूसरी ओर, कांग्रेस ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को मुख्य न्यायाधीश के सामने उठाने की बात कही है.

12 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश से मिलेंगे खरगे और राहुल गांधी

CJP प्रदर्शन को लेकर जारी विवाद के बीच कांग्रेस ने भी लोकतांत्रिक अधिकारों और विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिबंध का मुद्दा उठाने की बात कही है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को बताया कि वह और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 12 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करेंगे.

खरगे के मुताबिक, इस मुलाकात में लोकतांत्रिक अधिकारों के कथित दमन, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और चुनाव आयोग में कथित अनियमितताओं को लेकर चिंता व्यक्त की जाएगी.0

कांग्रेस की ओर से उठाए जाने वाले इन मुद्दों के बीच दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति, पुलिस की कार्रवाई और नागरिकों के विरोध करने के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है.

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