पृथ्वी-मंगल का अनोखा रिश्ता, वैज्ञानिकों ने दोनों को बताया एक ही मां की संतान

वाशिंगटन। यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नवीनतम अध्ययन में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इस रिसर्च के अनुसार, हमारी पृथ्वी और पड़ोसी ग्रह मंगल खगोलीय दृष्टिकोण से एक ही मां के बच्चे हैं, क्योंकि लगभग 4.5 अरब साल पहले सौर मंडल के एक ही घूमते हुए धूल और गैस के बादल से दोनों का निर्माण हुआ था।

एक ही ब्रह्मांडीय रेसिपी से बने ग्रह और उनका अलग इतिहास

ताजा अध्ययन से यह बात सामने आई है कि भले ही पृथ्वी और मंगल की उत्पत्ति एक ही सौर मंडल के पदार्थों से हुई हो, लेकिन उनके बनने और विकसित होने का तरीका पूरी तरह से भिन्न था। ग्लोब इंस्टीट्यूट के रिसर्चर एंडर्स जोहानसन और असिस्टेंट प्रोफेसर हाइयांग वांग के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन ने खगोल विज्ञान की पुरानी धारणाओं को चुनौती दी है, जिसके तहत यह माना जाता था कि आसपास बने ग्रहों का निर्माण इतिहास एक जैसा होता है।

पेबल एक्रिशन और बड़ी चट्टानों की टक्कर की भूमिका

वैज्ञानिकों के अनुसार, ग्रह निर्माण में मुख्य रूप से दो प्रक्रियाएं अहम होती हैं—छोटे कंकड़ जैसी संरचनाओं का जुड़ना (पेबल एक्रिशन) और बड़ी ठोस चट्टानों (प्लेनेटेसिमल्स) की टक्कर। अध्ययन से पता चला है कि पृथ्वी के कुल द्रव्यमान का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा शुरुआती प्रोटोप्लैनेट्स द्वारा कंकड़ इकट्ठा करने से बना है, और केवल 25 प्रतिशत हिस्सा बड़ी चट्टानों की टक्कर से जुड़ा।

मंगल ग्रह के निर्माण की अलग प्रक्रिया

इसके बिल्कुल विपरीत, मंगल ग्रह का निर्माण अलग अनुपात में हुआ है। मंगल के कुल द्रव्यमान का करीब 75 प्रतिशत हिस्सा किलोमीटर के आकार की बड़ी चट्टानों की भीषण टक्करों से निर्मित हुआ, जबकि केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही छोटे कंकड़ों के मिलने से तैयार हुआ। इन दोनों ग्रहों के शुरुआती चरणों के अंतर को समझने के लिए वैज्ञानिकों ने उन्नत कंप्यूटर सिमुलेशन और अस्थिर तत्वों (वोलाटाइल एलिमेंट्स) का गहन विश्लेषण किया है।

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