नई दिल्ली: दीपावली और छठ के पावन पर्व पर अपने घर लौटने की तैयारी कर रहे दिल्ली-एनसीआर के लाखों यात्रियों के लिए इस बार भी सफर आसान नहीं रहने वाला है। त्योहार में अभी लगभग एक महीना बाकी है, लेकिन बिहार, झारखंड और पूर्वांचल की ओर जाने वाली ज्यादातर नियमित ट्रेनें अभी से पूरी तरह भर चुकी हैं। कई प्रमुख ट्रेनों में लंबी वेटिंग चल रही है, जबकि कई श्रेणियों में टिकटों की बुकिंग पूरी तरह बंद हो चुकी है। रेल टिकटों की इस भारी किल्लत का सीधा असर अब हवाई किराये पर भी साफ दिखाई देने लगा है। स्थिति यह है कि छठ से ठीक पहले 10 नवंबर को दिल्ली से पटना जाने वाली उड़ान का शुरुआती किराया 20 हजार रुपये तक पहुँच गया है, जो कि इसी अवधि में दिल्ली से दुबई के शुरुआती हवाई किराये से भी कहीं अधिक है।
संपूर्ण क्रांति और राजधानी एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों में 'नो रूम' की स्थिति
दिल्ली से बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों का सबसे भारी दबाव देखने को मिल रहा है। 'संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस' में एक से चार नवंबर तक इकोनॉमी श्रेणी में 'नो रूम' की स्थिति बनी हुई है। वहीं स्लीपर और तृतीय वातानुकूलित (थर्ड एसी) श्रेणी में एक से आठ नवंबर के बीच लंबी वेटिंग चल रही है। 'तेजस राजधानी एक्सप्रेस' की थर्ड एसी श्रेणी में भी एक से चार नवंबर के बीच सीटों के लिए लंबी कतारें हैं। कई श्रेणियों में स्थिति अब 'रिग्रेट' तक पहुँच चुकी है। ऐसे में दीपावली और छठ पर घर जाने का सपना देख रहे यात्रियों के पास नियमित ट्रेनों में टिकट पाने के विकल्प तेजी से कम होते जा रहे हैं।
बिहार संपर्क क्रांति से लेकर स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस तक सीटों का भारी संकट
दिल्ली से दरभंगा रूट की 'बिहार संपर्क क्रांति' और 'स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस' जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों में नवंबर महीने तक भारी सीटों का संकट बना हुआ है। दरभंगा जाने वाली 'सरयू-यमुना एक्सप्रेस' में चार नवंबर तक 104 की वेटिंग चल रही है, जबकि 'हावड़ा-रक्सौल एक्सप्रेस' में 150 से अधिक की वेटिंग दर्ज की गई है। गोरखपुर जाने वाली ट्रेनों में भी नवंबर की यात्रा के लिए सीटें उपलब्ध नहीं हैं। यह दबाव केवल पटना या दरभंगा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बिहार और पूर्वांचल के तमाम प्रमुख रेल मार्गों पर यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।
झारखंड जाने वाली ट्रेनों में भी टिकटों के लाले
झारखंड की ओर प्रस्थान करने वाली ट्रेनों में भी कमोबेश यही हाल बना हुआ है। छह नवंबर को 'नई दिल्ली-रांची राजधानी एक्सप्रेस' की थर्ड एसी श्रेणी में वेटिंग चल रही है, जबकि 'झारखंड स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस' की कई श्रेणियों में 'रिग्रेट' की स्थिति है। ऐसे यात्रियों के लिए, जिन्होंने अब तक अपने टिकट आरक्षित नहीं कराए हैं, नियमित ट्रेनों में जगह मिल पाना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।
ट्रेनें फुल होने से आसमान पर पहुँचे विमानों के किराए
रेलवे टिकट न मिलने के कारण यात्रियों की मजबूरी का असर विमान किरायों पर भी पड़ रहा है। बीते अगस्त माह में दिल्ली से पटना के बीच एकतरफा हवाई टिकट मात्र 5,000 से 6,300 रुपये के बीच उपलब्ध था, लेकिन त्योहार की तारीखें नजदीक आते ही यह किराया कई गुना बढ़ चुका है। सात नवंबर को दिल्ली से पटना की उड़ानों का शुरुआती किराया लगभग 19 से 20 हजार रुपये तक पहुँच गया है। वहीं, छठ से ठीक पहले 10 नवंबर की यात्रा के लिए किराया और भी अधिक है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसी अवधि में दिल्ली से दुबई का शुरुआती हवाई किराया करीब 15 हजार रुपये के आसपास है, यानी इस समय पटना पहुँचना दुबई जाने की तुलना में भी ज्यादा महंगा साबित हो रहा है।
विशेष (स्पेशल) ट्रेनों के संचालन से यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद
यात्रियों की इस रिकॉर्ड तोड़ भीड़ को नियंत्रित करने के लिए रेलवे प्रशासन ने विशेष ट्रेनों का सहारा लिया है। अक्टूबर और नवंबर के महीनों में 'नई दिल्ली-सुपौल', 'आनंद विहार-भागलपुर', 'नई दिल्ली-हावड़ा' और 'अमृतसर-बरौनी' समेत कई विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। लंबी वेटिंग सूची को देखते हुए रेलवे बोर्ड ने कुल 18 नई विशेष ट्रेनों के संचालन को मंजूरी दी है। इसके अलावा दिल्ली और पटना के बीच 'तेजस राजधानी' तथा 'संपूर्ण क्रांति' की क्लोन ट्रेनें चलाने का भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इन विशेष गाड़ियों से त्योहार के दौरान यात्रियों को कुछ अतिरिक्त विकल्प जरूर मिल सकेंगे, लेकिन नियमित ट्रेनों में पहले से बने भारी दबाव को देखते हुए इस बार भी सफर चुनौतीपूर्ण रहने की पूरी आशंका है।
दिल्ली से बिहार के लिए बढ़ाई गई विशेष ट्रेनों की संख्या और फेरे
दीपावली और छठ पर्व पर बिहार जाने वाले यात्रियों की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने दिल्ली से गया और पटना के बीच संचालित हो रही विशेष ट्रेनों की अवधि में विस्तार कर दिया है। इसके साथ ही 'नई दिल्ली-दानापुर विशेष ट्रेन' के फेरों को भी बढ़ा दिया गया है, जिससे त्योहार के दौरान यात्रियों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी।
रेलवे से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 'दिल्ली जंक्शन-गया-दिल्ली जंक्शन आरक्षित त्योहार विशेष ट्रेन' (04064/04063) का संचालन अब आगामी 30 नवंबर तक जारी रहेगा। दिल्ली से गया के बीच यह ट्रेन 26 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच कुल 31 फेरे लगाएगी। वहीं, वापसी में गया से दिल्ली के लिए यह ट्रेन 27 अक्टूबर से 1 दिसंबर तक 31 फेरे पूरी करेगी। दिल्ली से गया के बीच यह ट्रेन सप्ताह में छह दिन संचालित होगी, जबकि शनिवार को इसका संचालन नहीं किया जाएगा। वापसी में गया से दिल्ली के लिए यह ट्रेन रविवार को छोड़कर निर्धारित समय-सारणी के अनुसार चलेगी।
इसके अतिरिक्त, 'नई दिल्ली-पटना जंक्शन-नई दिल्ली आरक्षित त्योहार विशेष ट्रेन' (04088/04087) की समयावधि भी बढ़ाई गई है। दिल्ली से पटना के बीच चलने वाली यह ट्रेन 26 अक्टूबर से 30 नवंबर तक कुल 36 फेरे लगाएगी, जबकि पटना से नई दिल्ली के लिए यह ट्रेन 27 अक्टूबर से 1 दिसंबर तक 36 फेरे पूरे करेगी। यह विशेष ट्रेन दोनों ही दिशाओं में प्रतिदिन नियमित रूप से संचालित होगी।
अब सप्ताह में दो दिन चलेगी दिल्ली-दानापुर विशेष ट्रेन
'नई दिल्ली-दानापुर-नई दिल्ली आरक्षित त्योहार विशेष ट्रेन' (04090/04089) अब सप्ताह में दो दिन पटरी पर दौड़ेगी। पूर्व में दिल्ली से दानापुर के लिए यह ट्रेन केवल शुक्रवार को ही संचालित होती थी, लेकिन अब सात अक्टूबर से यह ट्रेन बुधवार और शुक्रवार दोनों दिनों को चलेगी। इसी प्रकार, दानापुर से नई दिल्ली के लिए यह ट्रेन गुरुवार और रविवार को नियमित रूप से संचालित की जाएगी।
रेलवे द्वारा इस ट्रेन के कई अतिरिक्त फेरे भी घोषित किए गए हैं। दिल्ली से दानापुर के लिए अक्टूबर माह में 7, 14, 21 और 28 तथा नवंबर माह में 4, 11, 18, 25 और 27 तारीख को अतिरिक्त फेरे तय किए गए हैं। इसके विपरीत, दानापुर से दिल्ली के लिए अक्टूबर में 8, 15, 22 और 29 तथा नवंबर में 5, 12, 19, 26 और 28 तारीख को विशेष अतिरिक्त फेरे निर्धारित किए गए हैं।

