MBBS काउंसलिंग में कोर्ट की अंतरिम राहत, फिर भी अभ्यर्थियों को नहीं मिल रहा लाभ

इंदौर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने एमबीबीएस काउंसलिंग 2026 से जुड़े दो महत्वपूर्ण रिट प्रकरणों में अभ्यर्थियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत देते हुए मॉप-अप राउंड की काउंसलिंग में शामिल होने की स्पष्ट अनुमति प्रदान कर दी है। हालांकि, न्यायालय के इस आदेश के बाद भी कुछ अभ्यर्थियों द्वारा यह शिकायत सामने आ रही है कि उन्हें इस राहत का जमीनी स्तर पर लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिसके लिए उन्होंने चिकित्सा शिक्षा संचालनालय (डीएमई) पर आदेश के पालन में देरी का आरोप लगाया है।

एनआरआई श्रेणी में बदलाव का मिला विकल्प

याचिकाकर्ताओं के वकील हेमेन्द्र जैन ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने रिट याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अंतरिम आदेश पारित किया है। इसके माध्यम से अभ्यर्थियों को अपनी ऑनलाइन प्रोफाइल में आवश्यक संशोधन करने या नए दस्तावेज अपलोड करके एनआरआई श्रेणी का विकल्प चुनने की अनुमति दी गई है। अदालत ने अपने शुरुआती अवलोकन में यह माना कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत दिए जाने का पर्याप्त आधार बनता है।

केंद्र सरकार की अधिसूचनाओं के आधार पर उठी मांग

अभ्यर्थियों ने यह कानूनी लड़ाई केंद्र सरकार की 15 जुलाई और 26 सितंबर की उन अधिसूचनाओं के आधार पर लड़ी है, जिसमें राउंड-2 और राउंड-3 के दौरान भारतीय श्रेणी से एनआरआई श्रेणी में परिवर्तन करने की सुविधा प्रदान की गई थी। इसी नियम का हवाला देते हुए काउंसलिंग प्रक्रिया में एनआरआई विकल्प का लाभ दिए जाने की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने फिलहाल स्वीकार करते हुए राहत का मार्ग प्रशस्त किया है।

अंतिम निर्णय के अधीन रहेगी अदालत की राहत

न्यायालय ने अपनी सुनवाई के दौरान यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि दी गई यह सुविधा पूर्ण रूप से अंतरिम है और याचिकाकर्ता इस आदेश के बल पर किसी प्रकार के स्थायी अधिकार का दावा नहीं कर सकेंगे। यदि इन अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के जरिए प्रवेश मिलता भी है, तो वह संबंधित रिट याचिकाओं के अंतिम न्यायिक निर्णय के अधीन ही रहेगा। इस बहुप्रतीक्षित मामले की अगली सुनवाई अब आगामी 28 अक्टूबर को निर्धारित की गई है, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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