‘सत्ता का अहंकार…’, राम मंदिर चढ़ावा मामले पर कांग्रेस का बड़ा बयान, सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली| अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी का यह संवेदनशील मामला अब पुलिसिया जाँच के साथ-साथ गंभीर राजनीतिक बहसों के घेरे में आ गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस पूरे मामले की जाँच को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मंदिर प्रशासन पर तीखा निशाना साधा है। कांग्रेस पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने एक बयान में कहा है कि मंदिर परिसर में चढ़ावे की रकम चोरी होने से जुड़ी कुल 105 घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अब तक की गई जाँच के दौरान लगभग 79.85 लाख रुपये की नकदी बरामद किए जाने की बात भी सामने आई है, और इस सिलसिले में कुल आठ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। कांग्रेस का मुख्य सवाल यह है कि क्या यह जाँच केवल छोटे स्तर पर चोरी करने वाले कर्मचारियों तक ही सीमित रहेगी या फिर उन शीर्ष जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होगी, जिनकी देखरेख और सुरक्षा में यह सब हुआ था?

कांग्रेस ने एफआईआर दर्ज होने में 21 दिन की देरी पर उठाए बड़े सवाल

जयराम रमेश ने इस मामले में जाँच की शुरुआत को लेकर सबसे बड़ा संदेह एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज होने में हुई लंबी देरी पर जताया है। उनके अनुसार, मंदिर के चढ़ावे की रकम चोरी होने से संबंधित एक अहम वीडियो फुटेज गत 4 जून को ही संबंधित अधिकारियों तक पहुँच गया था। इसके अगले ही दिन यानी 5 जून को सीसीटीवी फुटेज की जांच भी कर ली गई थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पुलिस में आधिकारिक एफआईआर इसके पूरे 21 दिन बाद यानी 25 जून को दर्ज की गई।

कांग्रेस यह सवाल पूछ रही है कि आखिर इन 21 दिनों के अंतराल में ऐसा क्या हुआ और इस पूरी देरी के पीछे क्या कारण थे, जिसकी जानकारी देश की जनता के सामने क्यों नहीं रखी जा रही है? इस मामले में दाखिल चार्जशीट के अनुसार जिन आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनके नाम अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामशंकर मिश्रा, राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और सुभाष श्रीवास्तव हैं। जाँच के दौरान चंपत राय और अनिल मिश्रा से भी पूछताछ की गई थी, जिसके बाद दोनों ने ट्रस्ट के अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।

105 घटनाओं के बावजूद केवल आठ लोगों को आरोपी बनाए जाने पर संशय

कांग्रेस ने इस पूरी जाँच में सामने आई चोरी की कुल 105 घटनाओं और उसके अनुपात में केवल आठ ही लोगों को आरोपी बनाए जाने की प्रक्रिया पर कड़ा एतराज जताया है। जयराम रमेश ने सवाल किया कि यदि सीसीटीवी कैमरों में चढ़ावे की रकम को अवैध तरीके से हटाने या छिपाने की 105 अलग-अलग घटनाएं रिकॉर्ड हुई हैं, तो आखिरकार इस मामले में सिर्फ आठ ही लोगों को आरोपी क्यों बनाया गया है?

जांच दस्तावेजों के मुताबिक, चढ़ावे की राशि को निकालने या गायब करने की ये घटनाएं मुख्य रूप से मंदिर के भीतर दानपात्र की रकम की गिनती (काउंटिंग) के दौरान हुईं। पुलिस ने जिन आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है, उनमें से सात के पास से कुल 79.85 लाख रुपये बरामद होने का दावा किया गया है।

चंपत राय और अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर कांग्रेस का रुख

इस पूरे प्रकरण में कांग्रेस पार्टी का सबसे तीखा सवाल चंपत राय और अनिल मिश्रा की संदिग्ध भूमिका को लेकर है। जयराम रमेश ने खुलकर पूछा कि इन दोनों प्रमुख लोगों को इस मामले में मुख्य आरोपी बनाने के बजाय केवल गवाह के तौर पर क्यों पेश किया गया? दाखिल किए गए आरोपपत्र में इन दोनों के साथ-साथ मंदिर निर्माण से जुड़े एक अन्य अधिकारी गोपाल राव को भी गवाह के रूप में शामिल किया गया है।

कांग्रेस का तर्क है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में चोरी की घटनाएं बार-बार हुईं, तो केवल कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों की गिरफ्तारी से न्याय पूरा नहीं होता। उन तमाम लोगों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, जिनकी निगरानी में चढ़ावे की बेशकीमती रकम रखी और गिनी जाती थी। जाँच से जुड़े दस्तावेजों से यह भी खुलासा हुआ है कि मुख्य आरोपियों में शामिल चंपत राय के पूर्व चालक राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव की सीधी पहुँच मंदिर के दान गिनने वाले गुप्त कक्ष तक थी।

कांग्रेस की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की मांग

कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे मामले में एक स्वतंत्र, निष्पक्ष और पूरी तरह से भरोसेमंद न्यायिक या उच्चस्तरीय जाँच कराए जाने की अपनी मांग को दोहराया है। जयराम रमेश ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जाँच का दायरा केवल कुछ लाख रुपये की रकम बरामद कर लेने और चंद आरोपियों को दबोच लेने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि इतनी बड़ी चूक कैसे हुई और प्रशासनिक निगरानी तंत्र में असल खामी कहाँ पर थी।

इसके साथ ही, कांग्रेस ने इस गंभीर मुद्दे पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लंबी चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि यह मामला देश के करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की आस्था और भावनाओं से सीधा जुड़ा हुआ है, इसलिए चढ़ावे की कुल वास्तविक राशि कितनी थी और उसमें से कितनी रकम की हेराफेरी हुई, इसका स्पष्ट और पारदर्शी जवाब देश के सामने आना चाहिए। पार्टी नेताओं का कहना है कि सत्ता का घमंड हमेशा आत्मघाती साबित होता है। फिलहाल, इस मामले में जाँच एजेंसी ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल कर दिया है और कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

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