डेटा सेंटर को प्रक्रिया किया हुआ पानी देने का प्रस्ताव हुआ खारिज

अंबरनाथ। अंबरनाथ नगर परिषद की हाल ही में 30 सितंबर को हुई सामान्य सभा में एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक निर्णय लिया गया है। शहर के वडोलगांव और चिखलोली स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का उपचारित (प्रक्रिया किया हुआ) पानी एक प्रस्तावित ‘हरित एकात्मिक डेटा सेंटर पार्क’ को देने से जुड़ा प्रस्ताव राजनीतिक दलों के कड़े विरोध के कारण खारिज कर दिया गया।

शिवसेना और भाजपा ने किया कड़ा विरोध

सभा में विषय क्रमांक 58 के रूप में यह प्रस्ताव चर्चा के लिए प्रस्तुत किया गया था। जैसे ही इस पर चर्चा शुरू हुई, वैसे ही शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नगरसेवकों ने इसका जोरदार विरोध करना शुरू कर दिया। सभी पक्षों के विरोध के चलते इस प्रस्ताव को सभा में स्वीकृति नहीं मिल सकी और इसे नामंजूर कर दिया गया।

मनसे ने पहले ही जताई थी आपत्ति

इस प्रस्ताव के खिलाफ राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर पहले से ही विरोध के स्वर उठने लगे थे। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के बंडू देशमुख, शैलेश शिर्के और अन्य प्रमुख पदाधिकारियों ने नगर परिषद प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। मनसे ने महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया था कि:

  • वडोलगांव एसटीपी की क्षमता 45 एमएलडी है।

  • चिखलोली एसटीपी की क्षमता 9 एमएलडी है।

  • दोनों संयंत्रों की कुल क्षमता 54 एमएलडी है।

सार्वजनिक उपयोग की मांग और 'जल-विनिमय प्रारूप'

मनसे और अन्य विरोधियों का तर्क था कि शहर की भविष्य की पानी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए, इस उपचारित पानी को किसी निजी डेटा सेंटर को सौंपने के बजाय पहले अंबरनाथ के उद्यानों, वृक्षारोपण और अन्य सार्वजनिक कार्यों में इस्तेमाल किया जाना चाहिए। साथ ही यह सुझाव भी दिया गया था कि यदि इस पानी का व्यावसायिक उपयोग किया जाना है, तो सीधे निजी परियोजना को देने की बजाय महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) के साथ ‘जल-विनिमय प्रारूप’ (Water-Exchange Model) तैयार किया जाए, जिसके बदले शहर के नागरिकों को शुद्ध पेयजल मिल सके।

शहर में तेज हुई चर्चा

नगर परिषद की सामान्य सभा में विभिन्न दलों द्वारा जताए गए विरोध और प्रस्ताव के खारिज होने के बाद, अब इस बात को लेकर बहस तेज हो गई है कि अंबरनाथ के इस उपचारित पानी का भविष्य में स्थानीय नागरिकों और शहर के हित में किस तरह से सही उपयोग किया जाना चाहिए।

 

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