26 सितंबर को भाद्रपद पूर्णिमा की समाप्ति के बाद से पितृपक्ष की शुरुआत होने जा रही है. हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों को समर्पित बेहद महत्वपूर्ण समय माना जाता है. पूरे 15 दिनों तक पितरों के नाम से तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान जैसे कर्म किए जाते हैं. मान्यता है कि इन दिनों में अपने पितरों का विधि-विधान से तर्पण करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहता है. कहा जाता है कि पितरों की कृपा से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और परिवार में खुशहाली आती है. यही वजह है कि पितृपक्ष के दौरान लोग अपने पूर्वजों को याद कर उनके नाम से श्राद्ध और तर्पण करते हैं.
तुलसी के पौधे करते हैं संकेत
वहीं, ज्योतिष में पितृदोष को लेकर भी कई तरह की मान्यताएं बताई गई हैं. कहा जाता है कि अगर किसी जातक की कुंडली में पितृदोष हो या परिवार में पितृदोष से जुड़ी मान्यता मानी जाती हो, तो उसका असर घर के माहौल और तरक्की पर भी दिखाई दे सकता है. कई बार घर में लगातार परेशानियां बनी रहना, कामों में रुकावट आना या परिवार में कलह जैसी स्थिति को पितृदोष से जोड़कर देखा जाता है. इसी कड़ी में घर में लगे तुलसी के पौधे को लेकर भी कुछ संकेत बताए जाते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार तुलसी का पौधा घर के लिए बेहद शुभ माना जाता है और इसके अचानक सूखने या खराब होने को कुछ लोग सामान्य घटना के बजाय ज्योतिषीय संकेत के तौर पर भी देखते हैं.
क्या कहते हैं देवघर के ज्योतिषाचार्य
देवघर के ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने लोकल 18 के संवाददाता से बातचीत करते हुए बताया कि अगर किसी के घर में तुलसी का पौधा लगा हुआ है और उसकी ठीक से देखभाल करने के बावजूद वह बार-बार सूख जा रहा है, तो इसे लेकर धार्मिक मान्यता में अलग-अलग बातें कही गई हैं. ज्योतिषाचार्य के अनुसार अगर तुलसी का पौधा पानी देने के बाद भी बार-बार सूख जाता है, अचानक पीला पड़ने लगता है या किसी वजह के बिना तुलसी का पौधा टूट जाता है, तो इसे पितृदोष से जोड़कर देखा जाता है. हालांकि तुलसी के पौधे के सूखने के पीछे मौसम, पानी, मिट्टी या पौधे की देखभाल जैसी सामान्य वजहें भी हो सकती हैं, लेकिन धार्मिक मान्यता में इसे पितरों से जुड़ा संकेत माना जाता है.
इन 15 दिनों में विधि-विधान से करें पितृ तर्पण
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि अगर किसी घर में पितृदोष की स्थिति मानी जाती है तो परिवार की तरक्की में अचानक रुकावट आने की मान्यता है. घर में छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद और गृह क्लेश की स्थिति भी बन सकती है. ऐसे में पितृपक्ष का समय पितरों को याद करने और उनके नाम से तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इन 15 दिनों में विधि-विधान से पितरों का तर्पण करने और उनके नाम से श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है. उनकी कृपा से घर में सुख-शांति बनी रहती है और हमेशा तरक्की होती है.

