192 घंटे की सीमा, कराई 392 घंटे ड्यूटी, इंदौर में PG डॉक्टर की सुसाइड कोशिश से हड़कंप

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां एमजीएम मेडिकल कॉलेज की एक पीजी डॉक्टर ने कथित तौर पर मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर इंसुलिन का ओवरडोज लेकर आत्महत्या करने की कोशिश की। समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बचा ली गई, और फिलहाल अस्पताल में उनका इलाज जारी है।

क्या है पूरा मामला और परिजनों के गंभीर आरोप?

एमजीएम कॉलेज में पीजी प्रथम वर्ष की जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर सिमी यादव (उम्र 28 वर्ष) ने यह खौफनाक कदम उठाया। पीड़ित डॉक्टर के परिजनों ने कॉलेज के सीनियर डॉक्टरों पर गंभीर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि डॉक्टर से नियमों के विरुद्ध जाकर अत्यधिक काम लिया जा रहा था और गैर-चिकित्सकीय कार्य भी कराए जा रहे थे।

392 घंटे काम कराने और उत्पीड़न के खुलासे

  • अत्यधिक कार्यभार: परिजनों का आरोप है कि नियमानुसार एक महीने में एक पीजी डॉक्टर से अधिकतम 192 घंटे काम कराया जा सकता है, लेकिन पीड़ित डॉक्टर से महीने में 392 घंटे काम लिया गया। शुरुआत में उनसे लगातार 36-36 घंटे की शिफ्ट कराई गई और बाद में 12 घंटे का रोस्टर जारी हुआ।

  • वॉशरूम जाने पर भी पूछताछ: काम के भारी दबाव और मानसिक तनाव के कारण डॉक्टर बेहद परेशान थीं। परिजनों के अनुसार, 36 घंटे की लगातार ड्यूटी के दौरान जब वे वॉशरूम जाती थीं, तब भी उनसे पूछताछ की जाती थी कि वे कहां गई थीं। इसके अलावा उन्हें ड्यूटी रूम तक का उपयोग करने की अनुमति नहीं थी।

  • एमबीबीएस की पढ़ाई: डॉ. सिमी यादव ने उज्जैन के आरडी गार्गी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया था और इसी साल 14 फरवरी को उन्होंने एमजीएम मेडिकल कॉलेज के पीजी प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था।

प्रबंधन की लचर कार्यशैली और आगे की कार्रवाई

परिजनों का आरोप है कि इस मानसिक प्रताड़ना की शिकायत पीड़ित डॉक्टर ने कॉलेज प्रबंधन से पहले भी की थी, लेकिन उनकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस मामले में पहले अदालत की ओर से भी एमजीएम कॉलेज को नोटिस जारी किया गया था, जिसका अब तक कोई जवाब नहीं दिया गया है। घटना के सामने आने के बाद अब कॉलेज प्रबंधन हरकत में आया है और पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है।

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