नई दिल्ली। अरब वर्ल्ड में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब यमन के हूती विद्रोहियों की सीधी एंट्री से भू-राजनीतिक समीकरण बेहद जटिल हो गए हैं। यह पूरा संघर्ष धीरे-धीरे शिया बनाम सुन्नी संघर्ष का रूप लेता दिखाई दे रहा है, जिससे मध्य पूर्व से लेकर पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
हूती विद्रोहियों के हमले और सऊदी अरब की मुश्किलें
पिछले एक हफ्ते से यमन के हूती विद्रोही लगातार सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों और टैंकों को निशाना बना रहे हैं, जिससे सऊदी अरब खुद को दोहरे संकट में घिरा महसूस कर रहा है। सऊदी की चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि एक तरफ जहां उसे पाकिस्तान से अपेक्षित मदद नहीं मिली (जिसने मक्का समझौते के बावजूद हाथ खींच लिए), वहीं दूसरी तरफ अमेरिका से भी कथित तौर पर निराशा हाथ लगी है।
अमेरिका और हूती विद्रोहियों के बीच कथित गुप्त डील
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिकी अधिकारियों और हूती विद्रोहियों के बीच हाल ही में एक गुप्त समझौता (सीक्रेट डील) हुआ है:
समझौते की शर्तें: इस डील के तहत हूती विद्रोहियों ने अमेरिका को यह आश्वासन दिया है कि वे लाल सागर और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट में अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे।
अमेरिका का रुख: इसके बदले में अमेरिका हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब की सैन्य मदद से पीछे हट गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी इस बात की पुष्टि की है कि अमेरिका की हूती विद्रोहियों के साथ सीधी बातचीत हुई है और देश अपने हितों की रक्षा के लिए ऐसे कदम उठाता रहेगा।
सऊदी जहाजों पर खतरा: हालांकि इस गुप्त समझौते के बावजूद हूती विद्रोहियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे लाल सागर में सऊदी अरब के कार्गो शिप और ऑयल टैंकरों पर हमले जारी रखेंगे।
वैश्विक व्यापार और महंगाई पर मंडराता खतरा
हूती विद्रोहियों द्वारा बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास की गई नाकेबंदी और पहले से ही ईरान के नियंत्रण में मौजूद होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण दुनिया भर में एक बड़ा आर्थिक संकट पैदा हो सकता है:
रूट बदलने से बढ़ेगा खर्च: यदि ये महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पूरी तरह बंद होते हैं, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी छोर 'केप ऑफ गुड होप' से होकर गुजरना पड़ेगा। इससे समुद्री यात्रा करीब 7,000 किलोमीटर लंबी हो जाएगी और यात्रा में 25 से 30 दिन का अतिरिक्त समय लगेगा।
महंगाई का बम: शिपिंग और ईंधन का खर्च बेतहाशा बढ़ने से भारत समेत दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल और अन्य आयातित वस्तुओं की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे वैश्विक महंगाई कई गुना बढ़ जाएगी।
शिया-सुन्नी संघर्ष की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यह पूरा भू-राजनीतिक तनाव पैगंबर मोहम्मद साहब के बाद उनके उत्तराधिकारी को चुनने के सदियों पुराने विवाद से जुड़ा है, जहां सुन्नी समुदाय अबू बक्र को और शिया समुदाय हजरत अली को अपना नेता मानता है। वर्तमान में ईरान, इराक का बड़ा हिस्सा, लेबनान का एक हिस्सा और यमन के हूती-नियंत्रित क्षेत्रों में शिया बहुलता/वर्चस्व है, जबकि सऊदी अरब, जॉर्डन, कतर, बहरीन, यूएई, सीरिया, कुवैत, ओमान और तुर्की जैसे देशों में सुन्नी समुदाय का प्रभाव है। मध्य पूर्व के इस बदलते घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की पैनी नजर बनी हुई है।

