इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में यूपीआई भुगतान पर एमडीआर (MDR) चार्ज लगाए जाने के विरोध में व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। इस नए शुल्क के खिलाफ शहर के व्यापारिक संगठनों ने कड़ा रुख अपनाते हुए एक बड़ा आंदोलन करने की तैयारी कर ली है, जिससे आने वाले दिनों में डिजिटल लेन-देन प्रभावित हो सकता है।
व्यापारियों का कड़ा विरोध और पोस्टर अभियान
UPI भुगतान पर 0.40 प्रतिशत एमडीआर चार्ज लगाए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ व्यापारियों ने शुक्रवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए एक विशेष पोस्टर अभियान की शुरुआत की। व्यापारियों का तर्क है कि डिजिटल भुगतान अब आम जनता के दैनिक जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है, ऐसे में यूपीआई लेन-देन पर किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क लगाना पूरी तरह अनुचित है। उनका कहना है कि इस अतिरिक्त बोझ का असर सिर्फ कारोबारियों पर ही नहीं, बल्कि पूरी व्यापारिक व्यवस्था पर पड़ेगा।
23 सितंबर को मनाया जाएगा ‘नो UPI डे’
इस प्रस्तावित चार्ज के विरोध को एक व्यापक रूप देने के लिए इंदौर के 100 से अधिक व्यापारिक संगठनों ने मिलकर 23 सितंबर को ‘नो UPI डे’ के रूप में मनाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। इस दिन सभी व्यापारी डिजिटल माध्यम से भुगतान स्वीकार करना पूरी तरह बंद रखेंगे। विरोध के इस अनोखे तरीके के तहत दुकानों पर लगे क्यूआर कोड (QR Code) और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढंककर रखा जाएगा, ताकि इस विरोध प्रदर्शन को एक मजबूत जनआंदोलन में बदला जा सके।
क्या है पूरा मामला और नया शुल्क विवाद
जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा UPI के जरिए 2,000 रुपये से अधिक के डिजिटल भुगतान पर 0.40 फीसदी एमडीआर चार्ज लगाने का प्रावधान किया गया है, जिसके आगामी 15 अक्टूबर से लागू होने की संभावना है। हालांकि सरकार का यह पक्ष है कि इस शुल्क का भार आम ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा, लेकिन व्यापारी इस बात से असहमत हैं। व्यापारियों का मानना है कि इस व्यवस्था के शुरू होने से डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिलने के बजाय एक बार फिर से नकद (कैश) व्यवस्था की ओर रुझान तेजी से बढ़ने लगेगा।

