दो महीने तक रखा रहा शव, अब पुलिस सुरक्षा में दफनाया गया श्रीलंका जेल दंगे में मारे गए भारतीय का शव

नेगोम्बो : श्रीलंका की नेगोम्बो जेल में बीते जुलाई माह में हुई भीषण हिंसा में अपनी जान गंवाने वाले 73 वर्षीय भारतीय कैदी का मंगलवार को विशेष पुलिस सुरक्षा के घेरे में अंतिम संस्कार कर दिया गया। अधिकारियों ने अदालत को सूचित किया कि स्थानीय मजिस्ट्रेट कोर्ट के निर्देशानुसार मृतक का दफ़न कार्य पूर्णतः सरकारी व्यय पर कराया गया। इस दौरान कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

अदालत के निर्देश पर 2 सितंबर को पूरा हुआ अंतिम संस्कार

आपराधिक जांच विभाग (CID) ने नेगोम्बो मजिस्ट्रेट अदालत को अवगत कराया कि न्यायिक आदेश के पालन में 2 सितंबर को मृतक को दफनाया गया। घटना की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रक्रिया के समय भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की गई थी।

मूल रूप से केरल के निवासी थे मृतक उन्नीकृष्णन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान उन्नीकृष्णन एस. के रूप में हुई है। वे मूलतः केरल के निवासी थे, किंतु विगत चार दशकों से अधिक समय से अपने परिजनों के साथ चेन्नई में निवास कर रहे थे।

मादक पदार्थ से जुड़े मामले में हुई थी गिरफ्तारी

उन्नीकृष्णन इस वर्ष 2 मार्च को श्रीलंका पहुंचे थे, जहां उन्हें प्रतिबंधित मादक पदार्थ (गांजा) रखने के आरोप में गिरफ्तार कर नेगोम्बो जेल भेजा गया था। इसी जेल में 5 और 6 जुलाई की मध्यरात्रि कैदियों के दो गुटों के बीच भड़की हिंसक झड़प के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी।

फॉरेंसिक जांच हेतु कपड़े और जूते अदालत को सौंपे गए

जांच एजेंसी ने मुख्य मजिस्ट्रेट शिलानी परेरा को जानकारी दी कि घटना के समय मृतक द्वारा पहने गए परिधान और जूते अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर दिए गए हैं। इन वस्तुओं को फॉरेंसिक लैब भेजा गया है, ताकि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा सके।

जेल दंगे में 22 कैदियों और 10 अधिकारियों की हुई थी मौत

इस भीषण जेल दंगे से संबंधित आपराधिक मामले की अदालती सुनवाई जारी है। इस ऐतिहासिक रूप से घातक हिंसा में 22 बंदियों तथा 10 जेल सुरक्षाकर्मियों सहित कुल 32 लोगों की जान चली गई थी, जबकि लगभग 100 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

81 संदिग्धों पर चलेगा मुकदमा, पहचान परेड जारी

अदालत में मंगलवार को पांच संदिग्ध आरोपियों की शिनाख्त परेड कराई गई, जबकि 11 अन्य संदिग्धों की पहचान परेड 10 सितंबर को होना तय है। जांच एजेंसियों के अनुसार, इस जेल हिंसा मामले में कुल 81 आरोपियों के विरुद्ध कानूनी मुकदमा चलाए जाने की रूपरेखा तैयार की गई है।

नशीले पदार्थों का विवाद और ओवरक्रौडिंग बनी दंगे की वजह

जुलाई माह में हुआ यह उपद्रव जेल के भीतर नशीली वस्तुओं की तस्करी से जुड़े गुटों के बीच आपसी वर्चस्व की लड़ाई के कारण भड़का था। क्षमता से अत्यधिक कैदी रखे जाने (ओवरक्रौडिंग) के कारण जेल प्रशासन को स्थिति पर काबू पाने और हिंसा रोकने में खासी मशक्कत करनी पड़ी थी।

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