UK MBBS Intern Doctor Strike देहरादून : उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर डॉक्टरों का आंदोलन अब बड़ा रूप लेता जा रहा है. प्रदेश के पांच सरकारी मेडिकल कॉलेजों के करीब 600 MBBS इंटर्न डॉक्टर सोमवार से कार्य बहिष्कार पर हैं.मंगलवार को करीब 600 PG रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया. इससे सरकारी अस्पतालों में मरीजों की परेशानी बढ़ने की आशंका है.
MBBS इंटर्न डॉक्टर वर्तमान में मिल रहे ₹17 हजार मासिक स्टाइपेंड को बढ़ाकर ₹30 हजार करने की मांग कर रहे हैं. वहीं PG डॉक्टरों की मांग है कि उनका स्टाइपेंड कम से कम ₹1 लाख प्रतिमाह किया जाए.
🚨 Uttarakhand MBBS Interns Demand Justice!
Peaceful protests are being held across Uttarakhand by MBBS interns at:
1️⃣ Govt. Medical College, Haldwani
2️⃣ Govt. Doon Medical College, Dehradun
3️⃣ VCSG Govt. Medical College, Srinagar (Garhwal)
4️⃣ SSJ Govt. Medical College, Almora… pic.twitter.com/zfP1fwY55f— medicopenia_155 (@medicopenia_155) September 7, 2026
UK MBBS Intern Doctor Strike: 600 MBBS इंटर्न को क्यों करना पड़ा है हड़ताल?
‘वॉयस ऑफ इंटर्न्स-उत्तराखंड‘ के बैनर तले MBBS इंटर्न डॉक्टरों ने दून मेडिकल कॉलेज, राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी, श्रीनगर और अल्मोड़ा समेत सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विरोध शुरू किया है. डॉक्टरों का कहना है कि इंटर्नशिप के दौरान वे अस्पतालों की रोजमर्रा की स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन इसके बदले मिलने वाला ₹17 हजार का स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों और वर्तमान खर्चों के लिहाज से पर्याप्त नहीं है.
इंटर्न डॉक्टरों ने ओपीडी और वार्ड की नियमित ड्यूटी का बहिष्कार किया है. हालांकि, इमरजेंसी सेवाओं में तैनात इंटर्न डॉक्टर मरीजों को सेवाएं दे रहे हैं, ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो.
‘नाइट शिफ्ट से इमरजेंसी तक ड्यूटी, फिर भी स्टाइपेंड नहीं बढ़ा’
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का कहना है कि इंटर्नशिप केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है. उन्हें अस्पतालों में मरीजों की देखभाल, ओपीडी, वार्ड, इमरजेंसी और अन्य विभागीय जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं. कई बार नाइट ड्यूटी भी करनी होती है.
डॉक्टरों का तर्क है कि इतनी जिम्मेदारी और लंबे ड्यूटी घंटों के बावजूद वर्षों से स्टाइपेंड में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है. दूसरे राज्यों में MBBS इंटर्न को इससे अधिक स्टाइपेंड मिल रहा है. एक ज्ञापन में डॉक्टरों ने दूसरे राज्यों में मिलने वाले स्टाइपेंड का भी हवाला दिया है और बताया है कि कई राज्यों में यह ₹25 हजार से अधिक है, जबकि ओडिशा और पश्चिम बंगाल में यह ₹44 हजार से भी ज्यादा बताया गया है.
अब PG डॉक्टर भी हड़ताल पर
MBBS इंटर्न के बाद PG रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी आंदोलन तेज कर दिया है. मंगलवार से करीब 600 PG डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार की जानकारी सामने आई है. उनका कहना है कि मौजूदा स्टाइपेंड उनकी जिम्मेदारियों और काम के मुकाबले पर्याप्त नहीं है.
PG डॉक्टरों का मौजूदा स्टाइपेंड करीब ₹69 हजार से ₹71 हजार प्रतिमाह बताया जा रहा है. डॉक्टर इसे बढ़ाकर कम से कम ₹1 लाख प्रतिमाह करने की मांग कर रहे हैं.
‘2017 से नहीं बढ़ा स्टाइपेंड’, रेजिडेंट डॉक्टर ने बताई परेशानी
एक रेजिडेंट डॉक्टर के मुताबिक, स्टाइपेंड में लंबे समय से अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई है. उनका दावा है कि 2017 के बाद से स्टाइपेंड में बढ़ोतरी नहीं की गई, जबकि इस दौरान महंगाई और डॉक्टरों की जिम्मेदारियां लगातार बढ़ी हैं.
PG डॉक्टरों का यह भी कहना है कि उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई की फीस दूसरे सरकारी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में अधिक है. ऐसे में स्टाइपेंड और फीस के बीच का अंतर भी उनके लिए चिंता का विषय है.
हालांकि, 2017 से स्टाइपेंड बिल्कुल नहीं बढ़ने के दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी उपलब्ध रिपोर्टों में स्पष्ट नहीं है, इसलिए इसे डॉक्टरों का दावा मानकर ही देखा जाना चाहिए.
इमरजेंसी और इमरजेंसी OT में जारी रहेगी सेवा
PG डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार के बावजूद मरीजों की गंभीर स्थिति को देखते हुए इमरजेंसी और इमरजेंसी ऑपरेशन थिएटर की सेवाएं जारी रखने का फैसला किया गया है. वहीं ओपीडी, वार्ड और इलेक्टिव OT में काम प्रभावित हो सकता है.
दून अस्पताल में इंटर्न डॉक्टरों की जगह नर्सिंग और पैरामेडिकल इंटर्न तथा कर्मचारियों को ओपीडी में लगाया गया है. इससे वार्डों में PG डॉक्टरों और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों पर काम का अतिरिक्त दबाव बढ़ने की बात सामने आई है.
सरकार ने क्या कहा?
दून मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना के मुताबिक, इंटर्न डॉक्टरों के स्टाइपेंड में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है. दून और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज से प्रस्ताव मिलने के बाद अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों से भी प्रस्ताव मांगे गए हैं. PG डॉक्टरों के स्टाइपेंड से जुड़ा प्रस्ताव भी शासन स्तर पर विचाराधीन बताया गया है.अधिकारियों ने डॉक्टरों से हड़ताल खत्म कर काम पर लौटने की अपील की है.
FORDA और IMA ने भी किया समर्थन
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को डॉक्टरों का समर्थन भी मिल रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक Federation of Resident Doctors’ Association (FORDA) और Indian Medical Association (IMA) ने इंटर्न डॉक्टरों की मांग का समर्थन किया है. FORDA की ओर से PG डॉक्टरों के स्टाइपेंड को बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री से भी अपील की गई है.
उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों पर बढ़ सकता है दबाव
करीब 600 MBBS इंटर्न और लगभग 600 PG डॉक्टरों के आंदोलन में शामिल होने से सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़े अस्पतालों पर काम का दबाव बढ़ सकता है. हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को जारी रखने का फैसला मरीजों के लिए राहत की बात है,लेकिन ओपीडी, वार्ड और नियमित ऑपरेशन सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है.
फिलहाल डॉक्टरों की मांग है कि सरकार स्टाइपेंड को लेकर जल्द ठोस फैसला करे. दूसरी ओर शासन स्तर पर प्रस्तावों पर विचार की बात कही गई है. ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि सरकार और डॉक्टरों के बीच बातचीत से आंदोलन का समाधान निकलता है या हड़ताल आगे भी जारी रहती है.

