Mumbai Fake PMO officer : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई दौरे से पहले बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) स्थित नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर (NMACC) में फर्जी PMO पहचान पत्र और हथियार मिलने के मामले ने नया मोड़ ले लिया है. पुलिस ने 24 वर्षीय रोहन पारेख को उसके कथित बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे के साथ गिरफ्तार किया है. पारेख को 11 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है.वहीं, मामले में तीसरे आरोपी प्रथमेश बागुल की तलाश जारी है.
Mumbai, Maharashtra: The two men arrested by the BKC Police for attempting to enter a high-profile event venue using a fake PMO ID and carrying a licensed firearm have been remanded to Crime Branch custody until September 11. The case involves serious BNS charges, including… pic.twitter.com/nvTz2o7JfD
— IANS (@ians_india) September 8, 2026
दरअसल घटना के सामने आने के बाद शुरुआती तौर पर इसे प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध की आशंका से जोड़कर देखा गया, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ पारेख के वकील ने दावा किया है कि वह खुद एक बड़े फर्जीवाड़े का शिकार हो सकता है. पुलिस फिलहाल इस दावे और मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कर रही है.
Mumbai Fake PMO officer का क्या है पूरा मामला?
मुंबई पुलिस के मुताबिक, 7 सितंबर की शाम रोहन पारेख BKC में कार्यक्रम स्थल के आसपास पहुंचा था. उसके साथ उसका बॉडीगार्ड दिलीप कुंडे भी था. सुरक्षा जांच के दौरान कुंडे के पास हथियार मिलने के बाद उसे अंदर जाने से रोक दिया गया.
इसके बाद रोहन पारेख ने कथित तौर पर अपना PMO पहचान पत्र दिखाया. सुरक्षा अधिकारियों को कार्ड की जांच के दौरान संदेह हुआ. रिपोर्टों के अनुसार कार्ड पर जारी होने की तारीख थी, लेकिन वैधता की तारीख नहीं थी. इसके अलावा जारीकर्ता के हस्ताक्षर तो थे, लेकिन उसका पद दर्ज नहीं था. कार्ड में पारेख को कथित तौर पर ‘ग्रेड C अधिकारी’ बताया गया था.
मुंबई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों को हिरासत में लिया और आगे की जांच मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दी. ताजा रिपोर्टों में पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि गार्ड के पास मौजूद हथियार लाइसेंसी है.
कोर्ट में पारेख के वकील ने क्या दावा किया?
मामले में सबसे अहम मोड़ तब आया जब अदालत में रोहन पारेख के वकील ने दावा किया कि उनके मुवक्किल को वर्ष 2024 में तरुण कपूर नाम के व्यक्ति ने PMO में काम करने का प्रस्ताव दिया था.
वकील के मुताबिक, पारेख को अलग-अलग लोगों के नाम से ईमेल और दस्तावेज मिले थे. इनमें PMO से जुड़े ईमेल, कथित आधिकारिक ऑफर लेटर और प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर वाला बताया गया एक पत्र भी शामिल है.
वकील ने दावा किया कि पारेख को महक गुप्ता के लिए एडवाइजरी भूमिका और तरुण गुप्ता से डिफेंस एक्विजिशन पॉलिसी से संबंधित ईमेल भी मिले थे. उनका कहना है कि ये सभी दस्तावेज पुलिस को सौंप दिए गए हैं और जांच में इनकी सत्यता की पुष्टि की जानी चाहिए.
पहचान पत्र को लेकर बड़ा सवाल
पारेख के वकील का कहना है कि कथित PMO पहचान पत्र उन्हें एक स्क्रीनशॉट के रूप में भेजा गया था और इसकी कोई भौतिक कॉपी उन्हें कभी नहीं मिली.
यही दावा मामले को एक अलग दिशा देता है. अगर जांच में यह साबित होता है कि किसी तीसरे व्यक्ति ने PMO से जुड़े होने का झूठा दावा करके पारेख को दस्तावेज भेजे थे, तो जांच एजेंसियों को यह पता लगाना होगा कि इन दस्तावेजों का स्रोत क्या था और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया .
दूसरी ओर, पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि पारेख कथित पहचान पत्र के साथ हाई-सिक्योरिटी कार्यक्रम स्थल तक क्यों पहुंचा और वहां उसकी मौजूदगी का वास्तविक उद्देश्य क्या था .
पारेख का क्या कहना है?
पारेख की ओर से यह दावा किया गया है कि वह कार्यक्रम में प्रधानमंत्री से मिलने या सुरक्षा व्यवस्था को भेदने के इरादे से नहीं गया था. उसके मुताबिक वह निजी काम से BKC इलाके में मौजूद था और अपनी मंगेतर के लिए परफ्यूम खरीदने मॉल गया था.
बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि पारेख ने लंदन के एक विश्वविद्यालय में पढ़ाई की है और भू-राजनीति से जुड़े अध्ययन तथा निबंध UNESCO को सौंपे हैं. वकील के मुताबिक पारेख के पास वर्ष 2024 से निजी बॉडीगार्ड था और उसे कथित तौर पर बॉडीगार्ड रखने के निर्देश भी मिले थे.
बॉडीगार्ड के पास मिला हथियार भी जांच के घेरे में
मामले में दिलीप कुंडे की भूमिका भी पुलिस जांच का अहम हिस्सा है. सुरक्षा जांच के दौरान उसके पास हथियार मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हुईं.
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक हथियार लाइसेंसी बताया गया है. ऐसे में जांच केवल हथियार की मौजूदगी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि हथियार लेकर कार्यक्रम स्थल के सुरक्षा घेरे तक पहुंचने की अनुमति और परिस्थितियां क्या थीं.
क्या PM मोदी की सुरक्षा में सेंध की कोशिश थी?
यह इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 8 सितंबर को BKC स्थित कार्यक्रम में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का उद्घाटन करना था. कार्यक्रम से पहले हाई-सिक्योरिटी जोन में कथित फर्जी PMO पहचान पत्र के साथ पहुंचने और एक साथ हथियार मिलने से सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं.
हालांकि, अभी तक उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी कि पारेख का मकसद प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध लगाना था. पुलिस इसी बिंदु की जांच कर रही है कि पहचान पत्र कहां से आया, किसने बनाया या भेजा और पारेख उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से कर रहा था.
तीसरे आरोपी प्रथमेश बागुल की तलाश
मामले में पुलिस ने प्रथमेश बागुल को भी आरोपी बनाया है और उसकी तलाश की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पारेख और बागुल के बीच क्या संबंध है और कथित PMO दस्तावेजों की पूरी कड़ी कहां तक जाती है.
उपलब्ध कॉरपोरेट रिकॉर्ड में रोहन पारिख और प्रथमेश गणेश बागुल के नाम से मुंबई स्थित एक LLP में साझेदारी का रिकॉर्ड भी मिलता है. हालांकि, इस रिकॉर्ड से अपने आप यह साबित नहीं होता कि दोनों का मौजूदा पुलिस मामले में कोई आपराधिक संबंध है.
फिलहाल पुलिस पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की तस्वीर साफ होगी. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मुंबई क्राइम ब्रांच मोबाइल फोन, पहचान संबंधी दस्तावेज और अन्य सामान की भी जांच कर रही है.

