मुंबई। महाराष्ट्र में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य सरकार ने भर्ती परीक्षाओं के पूरे ढर्रे को बदलने और परीक्षा प्रणाली को अभेद्य बनाने के उद्देश्य से सात सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक प्रस्ताव जारी कर दिया है। इस फैसले के बाद उम्मीदवारों में नई व्यवस्था को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही है।
भर्ती प्रणाली को पारदर्शी और धांधली-मुक्त बनाना मुख्य लक्ष्य
महाराष्ट्र सरकार की इस बड़ी पहल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न सरकारी विभागों में आयोजित होने वाली भर्ती परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।
पिछले कुछ समय से राज्य में परीक्षाओं के दौरान पेपर लीक और गड़बड़ी की शिकायतें सामने आ रही थीं। सरकार एक ऐसी तकनीकी और प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करना चाहती है, जिससे फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश न बचे। यह समिति पूरी परीक्षा प्रक्रिया का गहन अध्ययन कर सुधार के ठोस और व्यावहारिक उपाय सुझाएगी।
अतिरिक्त मुख्य सचिव वी राधा संभालेंगी समिति की कमान
सात सदस्यों वाली इस उच्च स्तरीय समिति का नेतृत्व सामान्य प्रशासन विभाग (सेवाएं) की अतिरिक्त मुख्य सचिव वी राधा को सौंपा गया है।
समिति में महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सदानंद दाते, इलेक्ट्रॉनिक्स-आईटी व एआई विभाग के सचिव वीरेंद्र सिंह, पशुपालन विभाग के सचिव डॉ. एन रामस्वामी (सदस्य-सचिव), नासिक के विभागीय आयुक्त प्रवीण गेडाम, पूर्व यूपीएससी सदस्य एयर मार्शल (रिटायर्ड) अजीत शंकरराव भोसले और आईआईटी बॉम्बे के प्रोफेसर श्यामप्रसाद करागड्डे को शामिल किया गया है।
प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर परिणाम तक हर प्रक्रिया की होगी जांच
यह समिति भर्ती परीक्षा के हर एक चरण की कड़ाई से समीक्षा करेगी ताकि व्यवस्था की कमियों को दूर किया जा सके।
प्रश्नपत्रों की सुरक्षा: पेपर प्रिंटिंग, डिजिटल वितरण, उनके रखरखाव और परीक्षा केंद्रों तक सुरक्षित परिवहन की नई व्यवस्था तय होगी।
तकनीक का उपयोग: लीकेज रोकने के लिए बायोमेट्रिक पहचान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सर्विलांस तकनीक के इस्तेमाल पर सुझाव दिए जाएंगे।
फर्जीवाड़े पर लगाम: मुन्नाभाइयों (इम्पपर्सनेशन), मिलीभगत और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त दिशानिर्देश बनेंगे।
सेंटर और शिकायत तंत्र: परीक्षा केंद्रों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के मानक तय होंगे और छात्रों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए एक पारदर्शी शिकायत निवारण पोर्टल बनाया जाएगा।
छात्रों से सीधे संवाद के लिए प्रभागों का दौरा करेंगे समिति सदस्य
समिति अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी। निर्णय के अनुसार, समिति के सदस्य राज्य के सभी राजस्व प्रभागों का दौरा करेंगे।
वहां वे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों, छात्रों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों से सीधे मुलाकात कर उनकी राय लेंगे। इसके अलावा ऑनलाइन माध्यम से भी सुझाव आमंत्रित किए जाएंगे, ताकि अंतिम रिपोर्ट में सभी पक्षों के विचारों का समावेश हो सके।
ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा के पेपर लीक के बाद सरकार ने उठाया कदम
महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) द्वारा 22 मार्च 2026 को आयोजित ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद यह बड़ा विवाद खड़ा हुआ था।
मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में खुलासा हुआ कि लीक हुए प्रश्नपत्र के 77 सवाल मुख्य परीक्षा के पेपर से हूबहू मेल खा रहे थे। यहाँ तक कि एक अभ्यर्थी को संदेह से बचने के लिए कुछ सवालों के जवाब जानबूझकर गलत करने की सलाह दी गई थी। इस मामले में आयोग के एक अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद एमपीएससी ने पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी थी। इसी विवाद के बाद राज्य सरकार ने परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह सुरक्षित और लीक-प्रूफ बनाने के लिए इस हाई-लेवल कमेटी के गठन का बड़ा फैसला लिया।

