BRI पर चीन के साथ क्यों नहीं आया भारत? SCO Summit में साफ हुई रणनीति

नई दिल्ली।किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भारत ने अपने पुराने और अडिग रुख पर कायम रहते हुए चीन के विवादित 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) का समर्थन करने से साफ इनकार कर दिया है। साल 2018 में एससीओ की पूर्ण सदस्यता हासिल करने के बाद से ही भारत ने हर सम्मेलन में इस परियोजना से लगातार दूरी बनाए रखी है।

भारत के विरोध की मुख्य वजह और भू-राजनीतिक समीकरण

भारत सरकार का इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कड़ा विरोध इसलिए है क्योंकि इसका एक प्रमुख हिस्सा, जिसे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) कहा जाता है, पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है। यह क्षेत्र भारत की संप्रभुता और अखंडता का अभिन्न अंग है। यही कारण है कि नई दिल्ली ने इस प्रोजेक्ट से जुड़े समर्थन प्रस्तावों पर हस्ताक्षर करने से लगातार परहेज किया है। इसके विपरीत, सम्मेलन में शामिल अन्य देशों जैसे बेलारूस, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने बीआरआई तथा यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन के समन्वय के समर्थन को दोहराया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कड़ा संदेश: कनेक्टिविटी और संप्रभुता

मुख्य बिंदु: पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी संपर्क या गलियारा परियोजना तभी सफल और भरोसेमंद हो सकती है जब वह संबंधित देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूर्ण सम्मान करे। संप्रभुता की उपेक्षा करने वाली कनेक्टिविटी अंततः आपसी भरोसे को कमजोर करती है।

शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक और क्षेत्रीय संपर्क को लेकर भारत का दृष्टिकोण दुनिया के सामने रखा। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि व्यापारिक और आधारभूत ढांचागत कनेक्टिविटी के विकास में संप्रभुता के सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ एकजुट होकर निर्णायक और कड़ा मुकाबला करने का आह्वान किया।

एससीओ घोषणापत्र और आर्थिक एजेंडे से जुड़े अहम पहलू

इस बार के एससीओ घोषणापत्र में सदस्य देशों ने ईरान के भू-भाग पर हुए सैन्य हमलों की कड़ी निंदा की है। इस तरह के हमलों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ बताया गया है, जिससे नागरिकों को जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ा। सम्मेलन में इन संघर्षों के समाधान के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन किया गया, हालांकि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी किसी विशेष देश का नाम प्रत्यक्ष रूप से नहीं लिया गया।

आर्थिक प्राथमिकताओं के मोर्चे पर, सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया कि सदस्य देश वर्ष 2030 तक एससीओ इकोनॉमिक डेवलपमेंट स्ट्रेटजी को लागू करना जारी रखेंगे, हालांकि इस पर कोई अत्यधिक बाध्यकारी शर्तें नहीं जोड़ी गई हैं।

Latest news

Related news