जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, प्रदर्शन से जुड़े सभी FIR रद्द 

Jantar Mantar FIR Quashed: जंतर-मंतर और देश के अलग-अलग हिस्सों में जुलाई में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा आदेश दिया. कोर्ट ने 20 से 25 जुलाई 2026 के बीच छात्र आंदोलन को लेकर दर्ज FIRs को रद्द करने का निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश दिया है .

हालांकि, इस आदेश में एक अहम अपवाद भी है. दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान मौजूद रहे 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ एक FIR में जांच आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है, जिनके बारे में पुलिस ने गंभीर आपराधिक पूर्ववृत्त होने की बात कही है.

Jantar Mantar FIR Quashed : दिल्ली की 13 FIR पर लगा ब्रेक

जुलाई में छात्र आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग थानों में 13 FIR दर्ज की थीं. इनमें दंगा, हत्या के प्रयास, लूट और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप शामिल थे. बाद में केंद्र सरकार ने इन मामलों को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया और सुप्रीम कोर्ट से अनुच्छेद 142 के तहत इन्हें खत्म करने की अनुमति मांगी.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की मांग स्वीकार करते हुए इन मामलों को बंद करने का आदेश दिया. साथ ही अदालत ने साफ किया कि 20 से 25 जुलाई की घटनाओं के संबंध में देश के किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी.

बिहार, असम, बंगाल और महाराष्ट्र के मामलों पर भी राहत

यह राहत सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रही. केंद्र सरकार के अलावा बिहार, असम, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की ओर से भी प्रदर्शन से जुड़े मामलों को खत्म करने के लिए आवेदन दिए गए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने इन राज्यों से संबंधित FIRs को भी अपने आदेश के दायरे में शामिल कर लिया. अदालत ने देशभर में 20 से 25 जुलाई के बीच हुए संबंधित छात्र प्रदर्शनों के मामलों को बंद करने का निर्देश दिया.

2,873 लोगों पर क्यों जारी रहेगी कार्रवाई?

सुप्रीम कोर्ट के फैसले में सबसे महत्वपूर्ण अपवाद 2,873 लोगों से जुड़ा है.

दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया था कि प्रदर्शन के दौरान फेसियल रिकग्निशन सिस्टम और उपलब्ध पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड बताया गया है. पुलिस ने इन लोगों के संबंध में अलग से जांच जारी रखने की अनुमति मांगी थी.

अदालत ने दिल्ली पुलिस को इनके खिलाफ एक अलग और केंद्रित FIR में जांच जारी रखने की अनुमति दी है. इसका मतलब यह है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश हर व्यक्ति को बिना शर्त आपराधिक कार्रवाई से मुक्त करने वाला आदेश नहीं है. गंभीर आपराधिक पूर्ववृत्त वाले 2,873 लोगों के मामले अलग रहेंगे.

केंद्र ने अपने वादे का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि FIR वापस लेने का कदम सरकार की ओर से 25 जुलाई को CJP नेताओं को दिए गए आश्वासन को पूरा करने की दिशा में उठाया गया है.

केंद्र ने यह भी आश्वासन दिया कि 20 से 25 जुलाई की घटनाओं को लेकर भविष्य में नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी.

NEET-UG 2026 को लेकर मृत छात्रों के परिवारों को मुआवजे का मुद्दा

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की प्रतिबद्धता भी दोहराई.

सरकार ने इस संबंध में मुआवजे का फार्मूला और तौर-तरीके तय करने के लिए तीन महीने का समय मांगा है.

CJP ने 5 सितंबर का मार्च लिया वापस

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को प्रस्तावित दिल्ली मार्च वापस लेने का फैसला किया है.

CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने अदालत को बताया कि केंद्र की ओर से मामलों को वापस लेने की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संगठन ने प्रस्तावित मार्च रद्द करने का निर्णय लिया है. अदालत ने उनके बयान को रिकॉर्ड पर लिया.

अनुच्छेद 142 के इस्तेमाल से क्यों अहम है फैसला?

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अदालत ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष संवैधानिक शक्ति का इस्तेमाल किया. इसी शक्ति के जरिए अदालत ने छात्र आंदोलन से संबंधित मामलों को व्यापक स्तर पर बंद करने का आदेश दिया.

कोर्ट ने इस फैसले को आंदोलन में शामिल होकर अपने भविष्य को लेकर प्रभावित होने वाले छात्रों के हित को ध्यान में रखते हुए लिया. साथ ही अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि 20-25 जुलाई की उन्हीं घटनाओं को लेकर भविष्य में नई FIR के जरिए मामला दोबारा न खोला जाए.

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