नई दिल्ली। भारत चीन सीमा से सटे लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के बीच सामरिक संपर्क को मजबूत करने के लिए सड़कों और सुरंगों के निर्माण पर तेजी से काम हो रहा है। इसी क्रम में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल हरपाल सिंह ने 18 से 20 अगस्त तक प्रोजेक्ट योजक का दौरा किया, जहां उन्होंने निम्मू-पदम-दारचा रोड (एनपीडी) और महत्वपूर्ण शिंकुन-ला सुरंग सहित विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। निम्मू-पदम-दारचा मार्ग लद्दाख के निम्मू को जंस्कार घाटी के पदम और हिमाचल प्रदेश के दारचा से जोड़ता है। यह सड़क लद्दाख तक पहुंचने के लिए एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त सामरिक गलियारा प्रदान करेगी, जिससे सेना के जवानों, हथियारों, उपकरणों और अन्य आवश्यक सामान की आवाजाही अधिक सुगम होगी। साथ ही, सीमावर्ती इलाकों में लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
प्रोजेक्ट योजक के तहत, लगभग 15,800 फीट की ऊंचाई पर बनाई जा रही शिंकुन-ला सुरंग को सबसे अहम परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। लगभग 4.1 किलोमीटर लंबी यह ट्विन-ट्यूब सुरंग निम्मू-पदम-दारचा मार्ग पर शिंकुन-ला दर्रे की मौसमी बाधाओं को दूर करेगी। इस क्षेत्र में भारी बर्फबारी और लंबी सर्दियों के कारण सड़क संपर्क लंबे समय तक बाधित रहता है। सुरंग के निर्माण से सालभर अधिक भरोसेमंद आवाजाही सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी और लद्दाख व जंस्कार क्षेत्र की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। रणनीतिक दृष्टि से यह वैकल्पिक मार्ग सेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह किसी एक मार्ग पर निर्भरता को कम करेगा और आपात स्थितियों या खराब मौसम में भी सैनिकों व रसद की आवाजाही बनाए रखने में सहायक होगा। इन परियोजनाओं का लाभ स्थानीय आबादी को भी मिलेगा। बेहतर सड़क संपर्क से दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी, जिससे पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने परियोजना पर कार्यरत बीआरओ कर्मियों के हौसले की सराहना की, जिन्होंने कठिन भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों जैसे कम ऑक्सीजन, अत्यधिक ठंड और सीमित निर्माण अवधि में भारी मशीनरी और सामग्री पहुंचाने जैसी चुनौतियों का सामना किया। बीआरओ न केवल सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक सड़कें, पुल और सुरंगें बना रहा है, बल्कि स्थानीय आबादी के लिए भी कनेक्टिविटी विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। निम्मू-पदम-दारचा रोड और शिंकुन-ला सुरंग के पूरा होने के बाद लद्दाख क्षेत्र में भारत की सामरिक और नागरिक दोनों प्रकार की कनेक्टिविटी को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।

