नई दिल्ली: वर्ष 1947 के विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा है कि देश की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को कमजोर करने वाली मानसिकता को भविष्य में कभी भी दोबारा पनपने नहीं दिया जाएगा। 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के अवसर पर जनपथ स्थित डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत और कपिल मिश्रा ने विभाजन के पीड़ितों के अदम्य संघर्ष, साहस और बलिदान को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इतिहास के पन्नों से जुड़ी स्मृतियां
इस विशेष आयोजन में वर्ष 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के दौरान हुए विस्थापन, अपनों से बिछड़ने के दर्द और संघर्ष की यादों को जीवंत किया गया। कपिल मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि विभाजन की इस विभीषिका को लंबे समय तक सुनियोजित तरीके से दबाने और भुलाने के प्रयास किए गए थे। हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब यह सुनिश्चित किया गया है कि उस दौर का दर्द, बलिदान और उससे मिलने वाले महत्वपूर्ण सबक देश की स्मृति से कभी ओझल न हों। उन्होंने कहा कि यह स्मृति दिवस केवल करोड़ों पीड़ितों को श्रद्धांजलि देने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भावी पीढ़ियों को इतिहास से सबक लेने का एक अवसर भी प्रदान करता है।
'इतिहास भुलाया तो कमजोर होगी नींव'
कपिल मिश्रा ने जोर देकर कहा कि जो समाज अपने वास्तविक इतिहास, पूर्वजों के बलिदानों और उनसे मिलने वाली सीख को भुला देता है, उसका भविष्य कभी मजबूत नहीं हो सकता। 'विकसित भारत 2047' के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए देश को आज यह प्रण लेना होगा कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और सामाजिक समरसता को आहत करने वाली सोच दोबारा कभी अपनी जड़ें न जमा सके। कार्यक्रम में विभाजन की घटनाओं को केवल इतिहास के एक सामान्य अध्याय के रूप में नहीं, बल्कि उस समय के मानवीय दर्द, तड़प और संघर्ष के जीवंत दस्तावेज के तौर पर प्रस्तुत किया गया।
कला और संगीत के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंची गाथा
इस गरिमामयी आयोजन में संगीत, रंगमंच और दृश्य कला (वीडियो) का अनूठा संगम देखने को मिला, जिसके जरिए 1947 के विभाजन की पीड़ा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। जानी-मानी गायिका सोनम कालरा और उनकी पूरी टीम ने 'स्टोरीज ऑफ सेपरेशन' (अलगाव की कहानियां) पर आधारित एक अत्यंत मनमोहक और भावुक संगीतमय प्रस्तुति दी।
इस प्रस्तुति के माध्यम से देश के विभाजन के दौरान उपजे अलगाव, उजड़े आशियानों, अपनों से बिछड़ने के गम और उस दौर की विदारक स्मृतियों को बेहद कलात्मक अंदाज में दर्शाया गया। इस कलात्मक प्रयोग का मुख्य उद्देश्य यह दिखाना था कि किस प्रकार बड़े राजनीतिक निर्णयों का सीधा और भयानक असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ता है।
मानवीय कहानियों को संजोना जरूरी
कार्यक्रम के अंत में कपिल मिश्रा ने कहा कि संगीत, नाट्य कला और वीडियो के समन्वय से तैयार किया गया यह कार्यक्रम इतिहास की उन अनकही मानवीय कहानियों को वर्तमान पीढ़ी तक पहुंचाने का एक सराहनीय प्रयास है, जो विभाजन की त्रासदी के पीछे छिपे गहरे दर्द और संघर्ष को उजागर करती हैं। उन्होंने इस सफल आयोजन के लिए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और सभी कलाकारों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।

