कराची। पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना द्वारा किए गए भीषण हवाई हमलों में लगभग सत्ताईस नागरिकों के मारे जाने की गंभीर सूचना सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों की चपेट में आने वाले लोगों में कई महिलाएं और मासूम बच्चे भी शामिल हैं, तथा बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यह घटनाक्रम बलूचिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में स्वतंत्रता दिवस के रूप में व्यापक जश्न मनाए जाने के ठीक बाद सामने आया है, जिसके कारण इन सैन्य कार्रवाइयों के उद्देश्यों पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
हवाई बमबारी और आवासीय बस्तियों को भारी नुकसान
प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तानी वायुसेना ने सोराब के गिदार क्षेत्र के गोंधन समेत कई इलाकों को निशाना बनाते हुए मंगलवार की रात से बुधवार की सुबह तक अंधाधुंध बमबारी की। इस सैन्य कार्रवाई के परिणामस्वरूप कई रिहायशी मकान पूरी तरह तबाह या क्षतिग्रस्त हो गए हैं। स्थानीय संगठनों ने कड़े शब्दों में यह आरोप लगाया है कि इस हिंसक कार्रवाई का सीधा निशाना आम नागरिकों के घर और संपत्तियां थीं, जिससे कई बेकसूर परिवारों के सिर से छत छिन गई है और वे गहरे संकट में हैं। सोशल मीडिया पर इन क्रूर हमलों से जुड़ी दिल दहला देने वाली तस्वीरें और वीडियो सामने आ रहे हैं, जो वहां के निवासियों में फैले भारी खौफ और आक्रोश को उजागर करते हैं।
पाकिस्तानी सेना की चुप्पी और आतंकवाद विरोधी अभियानों का दावा
इन क्रूर हमलों पर पाकिस्तानी सेना की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक या स्पष्ट बयान जारी नहीं किया गया है। हालांकि, सेना के जनसंपर्क विभाग ने ग्यारह अगस्त को पंजगुर जिले में एक खुफिया सूचना के आधार पर आतंकवाद विरोधी अभियान चलाने और पांच संदिग्ध उग्रवादियों के मारे जाने का दावा किया था। उल्लेखनीय है कि यही वह तारीख थी जब बलूचिस्तान के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय लोग अपनी स्वतंत्रता के जश्न के तहत बड़े पैमाने पर कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे थे, जिससे सेना के इन दावों पर संदेह गहराता है।
खनिज संपदा और विद्रोही गतिविधियों के बीच गहराता संघर्ष
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बलूचिस्तान में सक्रिय प्रमुख विद्रोही संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी यानी बीएलए ने भी क्षेत्र में पाकिस्तानी सेना के मुखबिरों के खिलाफ विशेष अभियान चलाने का दावा किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तानी हुकूमत इस खनिज-समृद्ध और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र के संसाधनों पर अपना नियंत्रण छोड़ने को तैयार नहीं है, और अपनी पहचान तथा अधिकारों की मांग कर रहे स्थानीय नागरिकों को दबाने के लिए क्रूर सैन्य बल का खुलकर इस्तेमाल कर रही है, जिससे इस क्षेत्र में अस्थिरता और संघर्ष की आग लगातार भड़कती जा रही है।

