हरड़ के इस्तेमाल से सेहत को मिल सकते हैं कई फायदे, जानें सही तरीका

भोपाल।दैनिक जीवन में अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आयुर्वेद में हरड़ के नियमित उपयोग को बेहद गुणकारी बताया गया है। प्राचीन ग्रंथों के अनुसार हरड़ की कुल सात प्रमुख प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें विजया, रोहिणी, पूतना, अमृता, अभया, जीवंती और चैतकी शामिल हैं। हालांकि व्यावहारिक और उपयोगिता की दृष्टि से यह मुख्य रूप से तीन प्रकार की होती है, जिन्हें छोटी हर्रे, पीली हर्रे और बड़ी हर्रे के नाम से जाना जाता है। ये तीनों किस्में एक ही विशाल पेड़ के फल होती हैं, जो कॉम्ब्रेटेसी परिवार के अंतर्गत आता है। इस पेड़ की लंबाई करीब अस्सी से सौ फीट तक होती है और इसके फल पकने पर अपने खास औषधीय गुणों से भरपूर हो जाते हैं।

 

औषधीय गुण और विभिन्न रोगों में लाभ

यह प्राकृतिक औषधि शरीर में कफ, वात और पित्त तीनों दोषों को संतुलित करने में अचूक मानी जाती है। इसके नियमित उपयोग से पाचन क्रिया मजबूत होती है और खांसी, सांस की तकलीफ, त्वचा रोग, बवासीर, पुराना बुखार, मलेरिया, अपच, आंखों की समस्याएं, पेशाब की जलन, दस्त तथा पीलिया जैसी कई गंभीर बीमारियों में राहत मिलती है। इसका खट्टापन वात रोगों को, चटपटापन पित्त दोष को और कसैलापन कफ का नाश करने में मदद करता है। इसके सेवन के तरीके मौसम के अनुसार बदलते हैं, जैसे बरसात में इसे सेंधा नमक के साथ और गर्मियों में गुड़ के साथ लेना उत्तम माना जाता है।

 

खानपान में हरड़ के सेवन का सही तरीका

भोजन करने से ठीक पहले हरड़ का सेवन करने से भूख में वृद्धि होती है, जबकि इसे भोजन के बाद खाने से पाचन तंत्र सुचारू रूप से काम करता है और खाया हुआ अन्न आसानी से पच जाता है। रात के समय सोने से एक-दो घंटे पहले चार से छह ग्राम छोटी हर्रे का चूर्ण पानी के साथ लेने से पुरानी से पुरानी कब्ज की समस्या से भी छुटकारा मिल जाता है। इसके अलावा, इसका चूर्ण गुड़ या गिलोय के काढ़े के साथ लेने से जोड़ों के दर्द और गठिया जैसी तकलीफों में भी काफी आराम मिलता है।

 

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के अन्य उपाय

मुख और गले से जुड़ी तमाम परेशानियों में हरड़ का काढ़ा बनाकर उससे कुल्ला करना बेहद फायदेमंद होता है। इसके अलावा, छोटी हर्रे के छोटे-छोटे टुकड़े कर इसे सुपारी की तरह खाने के बाद मुंह में रखकर चबाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। तंबाकू की तरह इसका धुंआ लेने से श्वास संबंधी समस्याओं में भी लाभ मिलता है, जो इसे एक संपूर्ण स्वास्थ्यवर्धक जड़ी-बूटी बनाता है।

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