Arunachal Chinese incursion नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना की कथित ‘धीमी घुसपैठ’ को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मुलाकात हुई. यह बैठक ऐसे समय हुई है जब सीमा क्षेत्र में चीन की गतिविधियों को लेकर कई तरह के दावे सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. हालांकि, सरकारी सूत्रों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि अरुणाचल प्रदेश में चीन की ओर से किसी तरह की ‘धीमी घुसपैठ’ नहीं हो रही है.
Arunachal Chinese incursion:सरकार ने चीन की घुसपैठ के दावों को किया खारिज
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सोशल मीडिया पर चीन द्वारा अरुणाचल प्रदेश में धीरे-धीरे कब्जा करने या घुसपैठ करने के दावे तथ्यात्मक आधार पर सही नहीं हैं. सूत्रों ने कहा कि भारतीय सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) सीमा पर पूरी तरह सतर्क हैं और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर लगातार निगरानी रखी जा रही है.
सुरक्षा बलों का मुख्य फोकस सीमा पर प्रभुत्व बनाए रखने, चीनी गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने पर है. सुरक्षा सूत्रों ने भी मौजूदा स्थिति को नियंत्रण में बताया है.
जयशंकर और राजनाथ की बैठक क्यों अहम?
चीन से जुड़े सीमा मुद्दों पर विदेश और रक्षा मंत्रालय के बीच समन्वय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर कूटनीतिक मोर्चे पर भारत का पक्ष रखते हैं, जबकि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सीमा पर सैन्य तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की देखरेख करते हैं.
ऐसे में दोनों मंत्रियों की बैठक को अरुणाचल प्रदेश से जुड़ी हालिया चर्चाओं और भारत-चीन सीमा की समग्र स्थिति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि, बैठक में किन विशेष मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.
तक्सिंग क्षेत्र को लेकर भी सामने आई थीं रिपोर्टें
हाल के दिनों में अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के तक्सिंग क्षेत्र में चीनी सैनिकों की गतिविधियों को लेकर कुछ अपुष्ट रिपोर्टें सामने आई थीं। कुछ स्थानीय संगठनों और सोशल मीडिया पोस्ट में सीमा क्षेत्र में कथित तौर पर धीरे-धीरे कब्जे की बात कही गई.
हालांकि, आधिकारिक स्तर पर इन दावों को तथ्यहीन बताया गया है। सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि भारत-चीन सीमा का कई हिस्सों में अभी पूर्ण सीमांकन नहीं हुआ है। इस वजह से दोनों देशों की गश्ती टीमें कभी-कभी एक-दूसरे के सामने आ जाती हैं. ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच स्थापित सैन्य और कूटनीतिक तंत्र मौजूद हैं.
अरुणाचल प्रदेश पर भारत का रुख स्पष्ट
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत का रुख लंबे समय से स्पष्ट रहा है। विदेश मंत्रालय ने हाल में दोहराया कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और इस तथ्य को बदला नहीं जा सकता। भारत ने यह भी कहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता का सीधा असर भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है।
चीन अरुणाचल प्रदेश पर अपना दावा करता रहा है और इसे ‘दक्षिणी तिब्बत’ के रूप में संदर्भित करता है. भारत चीन के इस दावे को लगातार खारिज करता रहा है.
सीमा विवाद पर बातचीत के रास्ते खुले
भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर लंबे समय से विवाद और मतभेद रहे हैं. गलवान घाटी की घटना के बाद दोनों देशों ने सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत की है.
सीमा मामलों पर परामर्श एवं समन्वय के लिए बनाए गए तंत्र के जरिए दोनों पक्ष सीमा की स्थिति पर चर्चा करते रहे हैं. भारत का लगातार कहना रहा है कि सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता दोनों देशों के संबंधों में प्रगति के लिए जरूरी है.
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद की जटिलता का एक प्रमुख कारण LAC को लेकर दोनों देशों की अलग-अलग धारणाएं भी हैं. ऐसे में स्थानीय स्तर पर गश्ती दलों के आमने-सामने आने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं.
अरुणाचल में सीमा infrastructure पर भारत का जोर
भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अरुणाचल प्रदेश और अन्य सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है. सीमा सड़क संगठन (BRO) के जरिए सड़क और पुल निर्माण के अलावा सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क एवं निगरानी व्यवस्था को बेहतर किया गया है.
दुर्गम और ऊंचाई वाले इलाकों में बेहतर सड़क संपर्क से सुरक्षा बलों की आवाजाही और सीमा पर गश्त को मजबूती मिली है. सेना और ITBP भी कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इलाकों में नियमित निगरानी और अभ्यास करते हैं.
सोशल मीडिया के दावों पर सरकार की अपील
अरुणाचल प्रदेश से जुड़े हालिया दावों के बीच एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली सामग्री की सत्यता जांचने की जरूरत सामने आई है. सीमा क्षेत्र से संबंधित कई वीडियो या तस्वीरें पुराने हो सकते हैं या उन्हें दूसरे स्थान की घटनाओं के साथ जोड़कर पेश किया जा सकता है.
ऐसे में आधिकारिक सरकारी स्रोतों और सुरक्षा एजेंसियों की जानकारी के बिना किसी दावे को तथ्य मानना उचित नहीं है. खासकर सीमा सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों में गलत सूचना अनावश्यक चिंता और भ्रम पैदा कर सकती है.
1962 से चला आ रहा है भारत-चीन सीमा विवाद
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद की जड़ें पुरानी हैं. वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद यह मुद्दा और अधिक संवेदनशील हो गया. LAC के अलग-अलग हिस्सों में दोनों देशों की धारणा अलग होने के कारण समय-समय पर तनाव की स्थिति बनती रही है.
भारत का आधिकारिक रुख है कि देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता. विदेश मंत्रालय के पुराने आधिकारिक रिकॉर्ड में भी अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न हिस्सा बताया गया है.

