नई दिल्ली| संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में मंगलवार को भारी शोर-शराबे और विपक्षी दलों के कड़े विरोध के बीच 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल 2026' ध्वनि मत से पारित कर दिया गया। इससे पहले यह महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक गत 31 जुलाई को लोकसभा में भी स्वीकृत किया जा चुका है।
सत्र के दौरान विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन में जमकर नारेबाजी की और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सदन में उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग उठाई। इस हंगामे के बीच विपक्ष ने अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और दान में कथित चोरी के मुद्दों को लेकर भी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
एक साल तक के पंजीकरण के मौजूदा नियमों में कोई बदलाव नहीं
विधेयक पर चर्चा के दौरान सरकार की ओर से यह पूरी तरह स्पष्ट किया गया कि एक साल के भीतर जन्म या मृत्यु के पंजीकरण से जुड़े मौजूदा प्रावधानों और व्यवस्था में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। पूर्व की भांति घटना के 21 दिनों के भीतर जन्म या मृत्यु की सूचना देने पर सामान्य प्रक्रिया के तहत रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। हालांकि, यदि सूचना देने में 21 दिन से लेकर एक वर्ष तक की देरी होती है, तो निर्धारित नियमों के अनुसार मामूली विलंब शुल्क (लेट फीस) का भुगतान कर पंजीकरण कराया जा सकेगा।
सरकार का यह तर्क है कि देश के प्रत्येक बच्चे का जन्म तय समय-सीमा के भीतर दर्ज होना बेहद आवश्यक है, क्योंकि इसी आधार पर बच्चों को भविष्य में शिक्षा, आधिकारिक पहचान, विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और अन्य कानूनी अधिकारों का लाभ मिल पाता है। इसी प्रकार, किसी भी व्यक्ति की मृत्यु का सटीक और प्रामाणिक रिकॉर्ड प्रशासनिक, सांख्यिकीय और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
क्या कहता है नया संशोधन विधेयक?
नए संशोधित कानून के प्रावधानों के मुताबिक, यदि जन्म या मृत्यु के पंजीकरण में 1 वर्ष से अधिक और 2 वर्ष तक का समय बीत जाता है, तो ऐसा कराने के लिए जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (SDM) या फिर उनकी ओर से इस कार्य के लिए प्राधिकृत किसी सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
यदि किसी जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 2 साल से भी अधिक की लंबी देरी से कराया जाता है, तो अब इसके लिए केवल और केवल न्यायिक मजिस्ट्रेट के आधिकारिक आदेश के बाद ही पंजीयन की अनुमति दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, अधिकारियों द्वारा अनुमति प्रदान करने से पहले आवेदक द्वारा दी गई जानकारी और संलग्न दस्तावेजों की गहनता से जांच की जाएगी, ताकि सरकारी दस्तावेजों में दर्ज होने वाला रिकॉर्ड पूरी तरह सटीक और प्रामाणिक बना रहे। इस संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य वर्ष 1969 के मूल 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम' के प्रावधानों को और अधिक मजबूत तथा पारदर्शी बनाना है।
विपक्ष के भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच पारित हुआ बिल
सदन में विपक्षी सांसदों के लगातार हंगामे और विरोध के बीच बहस का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि सदन के कई माननीय सदस्यों ने इस नए कानून की उपयोगिता और महत्व को विस्तार से समझाया है, और उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि वे इस बिल के मूल उद्देश्य को सकारात्मक रूप से समझें।
उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि देश में जन्म लेने वाले हर एक बच्चे का विधिवत पंजीकरण हो और प्रत्येक नागरिक की मृत्यु का आधिकारिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए, ताकि मृत लोग मतदाता सूचियों में 'घोस्ट वोटर' (नकली मतदाता) के रूप में दर्ज न रहें और तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले दलों को इसका अनुचित लाभ न मिल सके। उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पूर्व में जन्म-मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था में खामियों के जरिए देश को गुमराह किया गया।
चर्चा की मांग पर अड़ा रहा विपक्ष
इससे पहले हंगामे के कारण राज्यसभा की कार्यवाही को दो बार स्थगित करना पड़ा। दोपहर 2 बजे जैसे ही सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई, गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने इस विधेयक पर विचार करने और इसे पारित कराने का औपचारिक प्रस्ताव सदन के पटल पर रखा।
विपक्ष के तमाम सदस्य गृह मंत्री की सदन में मौजूदगी की मांग को लेकर लगातार नारेबाजी करते रहे, और इसी शोरगुल के बीच बिल पर संक्षिप्त चर्चा हुई तथा मंत्री ने विपक्ष के सवालों का जवाब दिया। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वर्तमान में सदन सुचारू रूप से नहीं चल पा रहा है और संसद को सही ढंग से संचालित करने का एक ही रास्ता है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में आएं, क्योंकि विपक्ष इस गंभीर विषय पर विस्तार से चर्चा चाहता था। वहीं दूसरी ओर, एनडीए (NDA) गठबंधन के तमाम सदस्यों ने इस संशोधन विधेयक का पुरजोर समर्थन करते हुए इसे देश की आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी करार दिया।

