भोपाल| मध्य प्रदेश में 1 अगस्त 2026 से सरकारी राशन प्राप्त करने वाले करोड़ों नागरिकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेशभर के राशन विक्रेताओं ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान करते हुए कामकाज ठप कर दिया है।
इस हड़ताल का सीधा और तत्काल प्रभाव सरकारी राशन की दुकानों पर देखने को मिल रहा है। कई क्षेत्रों में उचित मूल्य की दुकानों पर ताले लटक गए हैं, जिससे आम जनता को राशन मिलने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। यह आंदोलन किसी एक जिले तक सीमित न रहकर पूरे मध्य प्रदेश में व्यापक स्तर पर फैल चुका है।
वेतन और एरियर के भुगतान को लेकर है मुख्य नाराजगी
हड़ताल कर रहे राशन विक्रेताओं का कहना है कि उन्हें सरकार द्वारा तय किए गए मानदेय का पूरा भुगतान नहीं मिल रहा है। उनका यह भी गंभीर आरोप है कि निर्धारित 10,500 रुपये प्रति माह के वेतन के स्थान पर उन्हें केवल 5 से 6 हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, लंबे समय से लंबित पड़े एरियर का भुगतान न होने के कारण कर्मचारियों की आर्थिक परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
प्रशासन को पहले ही दी गई थी आंदोलन की चेतावनी
सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने कुछ समय पूर्व ही शासन-प्रशासन और संबंधित उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अपनी सभी मांगों से अवगत कराया था। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी थी कि यदि 31 जुलाई तक उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकाला गया, तो 1 अगस्त से पूरे प्रदेश में कामकाज पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि दी गई समय-सीमा समाप्त होने के बाद भी शासन स्तर से कोई ठोस सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।
दमोह में प्रदर्शन के दौरान गरमाया माहौल
इस राज्यव्यापी हड़ताल के आह्वान से ठीक पहले दमोह जिले में कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर जुलूस निकाला और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान जब कर्मचारी अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने जिला सहकारी बैंक पहुंचे, तो उनका आरोप था कि ज्ञापन लेने के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी बाहर नहीं आया। इससे नाराज प्रदर्शनकारियों ने बैंक के मुख्य द्वार पर ही ताला जड़ दिया। हालांकि, बाद में वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप और ज्ञापन स्वीकार किए जाने के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर पड़ सकता है असर
इस अनिश्चितकालीन हड़ताल का सबसे बुरा असर उन गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ना तय है, जो हर महीने सरकारी राशन की दुकानों पर पूरी तरह निर्भर रहते हैं। यदि यह आंदोलन लंबे समय तक जारी रहता है, तो प्रदेश के अधिकांश जिलों में खाद्यान्न का वितरण ठप हो सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

