नई दिल्ली/बीजिंग। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सोमवार को अपनी चीन यात्रा के दौरान बीजिंग में चीन की उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग सहित कई शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की। इस महत्वपूर्ण बैठक में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और सामरिक सहयोग को सुदृढ़ करने पर विस्तृत चर्चा हुई। चीन में भारत के पूर्व राजदूत रहे विक्रम मिसरी की इस यात्रा को दोनों देशों के बीच रिश्तों को पटरी पर लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
द्विपक्षीय संबंधों और सीमा पर शांति पर जोर
भारतीय दूतावास के अनुसार, दोनों पक्षों ने भारत-चीन संबंधों के संपूर्ण दायरे की समीक्षा की। वार्ता का मुख्य उद्देश्य शीर्ष नेतृत्व के उस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाना है, जिसके तहत दोनों देश एक-दूसरे को प्रतिद्वंद्वी के बजाय विकास का साझेदार मानते हैं। बैठक में आर्थिक व व्यापारिक संबंधों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जन-जन के बीच संपर्क बढ़ाने के साथ-साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति व स्थिरता बनाए रखने पर विशेष बल दिया गया।
शीर्ष नेताओं और थिंक-टैंक स्तर पर वार्ता
अपनी यात्रा के दौरान विदेश सचिव ने सीपीसी केंद्रीय समिति के अंतरराष्ट्रीय विभाग की उपमंत्री सुन हाइयान से भी मुलाकात की, जिसमें राजनीतिक, शैक्षणिक और थिंक-टैंक स्तर पर संवाद बढ़ाने पर सहमति बनी। इसके अलावा उन्होंने सीपीपीसीसी के उप महासचिव हांग लियांग से भी द्विपक्षीय प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श किया।
संबंधों में सुधार के दिखने लगे संकेत
विक्रम मिसरी का यह दौरा हाल ही में मनीला में आसियान बैठकों के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी की मुलाकात के बाद हुआ है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक वार्ताओं के सकारात्मक परिणाम के रूप में कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली, सीधी उड़ानों की पुनः शुरुआत और वीजा नियमों में ढील जैसे महत्वपूर्ण फैसले सामने आए हैं, जो भारत-चीन संबंधों में धीरे-धीरे आ रहे सुधार का संकेत देते हैं।

