चातुर्मास में बदल जाते हैं लड्डू गोपाल की सेवा के नियम, जानें 4 माह स्नान, भोग से लेकर शयन तक की पूरी विधि

देवशयनी एकादशी से ही चातुर्मास का शुभारंभ हो जाता है. इस बार चातुर्मास की शुरुआत 25 जुलाई दिन शनिवार को से हो चुकी है और इसका समापन 20 नवंबर दिन शुक्रवार को होगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं और चार माह बाद देवउठनी एकादशी पर जागते हैं. चूंकि लड्डू गोपाल भगवान श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप हैं और श्रीकृष्ण स्वयं भगवान विष्णु के अवतार माने जाते हैं, इसलिए चातुर्मास के दौरान उनकी सेवा और पूजा के नियमों में भी कुछ विशेष परिवर्तन किए जाते हैं. चातुर्मास के चार महीने में वातावरण में नमी, उमस के साथ लगातार मौसम में कई तरह के बदलाव होते रहते हैं. इस मौसम में जिस तरह छोटे बच्चों का ध्यान रखा जाता है, ठीक उसी तरह लड्डू गोपाल की सेवा भी मौसम के अनुरूप करने की शास्त्रों में बताया गया है. इस अवधि में श्रद्धालु सात्विकता, संयम और भक्ति के साथ लड्डू गोपाल की सेवा करते हैं.

चातुर्मास में लड्डू गोपाल के स्नान का रखें ध्यान

    चातुर्मास के समय मौसम में थोड़ी नमी आ जाती है और उसी के साथ थोड़ी उमस भी हो जाती है.
    ऐसे में स्नान के समय लड्डू गोपाल को परेशानी ना हो इसके लिए बहुत ज्यादा ठंडे पानी से स्नान करवाने से बचें. थोड़ा गुनगुना या सामान्य पानी से स्नान करवाना ज्यादा उचित रहेगा.
    स्नान करवाने के बाद लड्डू गोपाल को भारी कपड़े पहनाने से बचें और इस अवधि में सूती कपड़े की पोशाक पहनाना ज्यादा अच्छा रहेगा.
    पोशाक पहनाने के बाद मुकुट, बांसुरी, माला और अन्य चीजें साफ-सुथरी रखें.

श्रृंगार के नियम
चातुर्मास में लड्डू गोपाल का श्रृंगार सरल और सात्विक रखें. सूती साफ एवं हल्के वस्त्र पहनाएं, तिलक करें और फूलों की माला अर्पित करें. अत्यधिक आडंबर की अपेक्षा सादगी और भक्ति को अधिक महत्व दिया जाता है. प्रतिदिन वस्त्र बदलना और पूजा स्थल की स्वच्छता बनाए रखना भी आवश्यक माना गया है.

भोग में रखें सात्विकता
चातुर्मास में लड्डू गोपाल को केवल सात्विक भोजन का भोग लगाना चाहिए. मौसमी फल, माखन-मिश्री, दूध, दही, खीर, पंचामृत और घर में बने शुद्ध व्यंजन अर्पित करना शुभ माना जाता है. भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें, क्योंकि श्रीहरि की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है.
पूजा की विधि
चातुर्मास में प्रतिदिन प्रातः और सायंकाल लड्डू गोपाल की विधिवत पूजा करें. दीपक जलाकर तुलसी दल, फूल, धूप और नैवेद्य अर्पित करें. भगवान विष्णु, श्रीकृष्ण और ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है. पूजा के दौरान श्रीमद्भागवत या विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया जा सकता है.

लड्डू गोपाल का शयन और विश्राम

    लड्डू गोपाल की सेवा में विश्राम और शयन का विशेष महत्व है.
    दोपहर के समय भोजन का भोग लगाने के बाद कुछ समय के लिए विश्राम करवाना चाहिए.
    रात के समय आरामदायक वस्त्र पहनना शुभ रहता है.
    चातुर्मास में थोड़ी उमस भी रहती है तो आसपास वायु का संचार बना रहे, इसका ध्यान रखें.
    कई लोग अपने हाथों से पंखा करते हैं और उनके सो जाने तक पंखा करते रहते हैं.

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