छतरपुर में ‘चिता आंदोलन’ तेज, 11वें दिन भी भूख हड़ताल पर डटे विस्थापित

भोपाल। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में विभिन्न बड़ी विकास परियोजनाओं के कारण अपनी जमीन और आशियाना गंवा चुके प्रभावित लोगों का संघर्ष अब एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। केन-बेतवा लिंक परियोजना, एनटीपीसी, मझगांव, रूंज और नैगुवा जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में हुए कथित बड़े भ्रष्टाचार और विस्थापित परिवारों के उचित पुनर्वास की जायज मांग को लेकर 'जय किसान संगठन' के बैनर तले 'चिता आंदोलन' की शुरुआत की गई है, जो समय बीतने के साथ-साथ जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ता की भूख हड़ताल का 11वां दिन

विस्थापितों को उनका हक दिलाने के लिए इस पूरे आंदोलन की कमान संभाल रहे प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का आमरण अनशन बुधवार को 11वें दिन भी लगातार जारी रहा, जिससे वहां का माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ है। इतने लंबे समय से अन्न का एक दाना भी न ग्रहण करने के कारण अनशनकारी के स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है, जिसको लेकर प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ डॉक्टरों ने भी गहरी चिंता व्यक्त की है।

सैकड़ों घरों में नहीं जला चूल्हा

इस जन आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले 11 दिनों से आंदोलनकारी के समर्थन में और प्रशासनिक बेरुखी के विरोध में प्रभावित क्षेत्र के लगभग 500 से अधिक घरों में चूल्हा तक नहीं जला है। बेघर हुए सैकड़ों ग्रामीणों ने अपने अधिकारों की इस लड़ाई में एकजुटता दिखाते हुए भोजन का परित्याग कर रखा है, जिसके कारण विस्थापितों की बस्तियों में सन्नाटा पसरा हुआ है और लोग सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ अपना रोष प्रकट कर रहे हैं।

तेजी से गिरता स्वास्थ्य बना चिंता का विषय

आंदोलन स्थल से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार, लगातार भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का शरीर धीरे-धीरे साथ छोड़ रहा है और उनका वजन अब तक लगभग 6 किलोग्राम घट चुका है। मौके पर मौजूद उनके सहयोगियों का कहना है कि प्रशासन इस बिगड़ती स्थिति को लेकर पूरी तरह से उदासीन बना हुआ है, जबकि अनशनकारी की मेडिकल रिपोर्ट लगातार चिंताजनक होती जा रही है जिससे आंदोलनकारियों का गुस्सा भड़क सकता है।

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