पटना। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की ओर से आयोजित सहायक अभियोजन पदाधिकारी (APO) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा राज्य के विभिन्न जनपदों में कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हो गई। प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर हजारों अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा में भाग लिया। संपूर्ण राज्य में निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से परीक्षा का संचालन करने के लिए प्रशासन की तरफ से पुख्ता बंदोबस्त किए गए थे। इस विशेष भर्ती अभियान के माध्यम से आयोग कुल 300 रिक्त पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन करने जा रहा है।
दो सत्रों में परीक्षा का विधिवत संचालन
बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा इस प्रारंभिक परीक्षा को सुचारू रूप से चलाने के लिए दो अलग-अलग सत्रों का निर्धारण किया गया था। प्रथम सत्र में सामान्य अध्ययन के प्रश्न पत्र की परीक्षा आयोजित की गई, जबकि द्वितीय सत्र में विधि विषय से संबंधित प्रश्न पत्र के लिए अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। सुरक्षा और समयबद्धता को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने परीक्षा शुरू होने से काफी समय पहले ही अभ्यर्थियों के लिए प्रवेश द्वार खोल दिए थे। आयोग के सख्त नियमों के कारण निर्धारित समय सीमा समाप्त होते ही मुख्य द्वारों को पूरी तरह बंद कर दिया गया ताकि परीक्षा की शुचिता बनी रहे।
कड़े नियमों के कारण छूटी परीक्षा
परीक्षा केंद्रों पर समय पालन को लेकर आयोग का रुख बेहद सख्त दिखाई दिया, जिसके कारण कई अभ्यर्थियों को निराशा हाथ लगी। विभिन्न केंद्रों पर ऐसी स्थितियां देखने को मिलीं जहां नियत समय से मात्र एक मिनट की देरी से पहुंचे परीक्षार्थियों को भी भीतर जाने की अनुमति नहीं दी गई। मुख्य द्वारों पर तैनात सुरक्षाकर्मियों और केंद्र अधीक्षकों ने आयोग के कड़े दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया। देर से पहुंचे अभ्यर्थियों की तमाम मिन्नतें और गुहार भी अधिकारियों के सख्त रुख के आगे बेअसर साबित हुईं और उन्हें परीक्षा से वंचित होना पड़ा।
त्रिस्तरीय सुरक्षा जांच और कड़े प्रशासनिक प्रबंध
भर्ती परीक्षा को पूरी तरह कदाचारमुक्त, शांतिपूर्ण और पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासनों ने सुरक्षा के अभूतपूर्व प्रबंध किए थे। सभी परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को भीतर प्रवेश देने से पहले तीन अलग-अलग स्तरों पर गहन तलाशी अभियान से गुजरना पड़ा। किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या अवांछित सामग्री को रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों पर आधुनिक जैमर और सीसीटीवी कैमरे क्रियाशील रखे गए थे। इसके साथ ही प्रत्येक केंद्र पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गई थी जो हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रहे थे।
अनिवार्य दस्तावेजों के साथ ही मिला प्रवेश
आयोग ने परीक्षा में सम्मिलित होने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए पहले ही आवश्यक दिशा-निर्देशों की एक सूची जारी कर दी थी। इन नियमों के तहत प्रत्येक परीक्षार्थी को अपने साथ दो प्रवेश पत्र लाना अनिवार्य किया गया था, जिसमें से एक हस्ताक्षरित प्रति परीक्षा कक्ष में तैनात वीक्षक को सौंपनी थी। इसके अतिरिक्त पहचान पत्र और आवश्यक दस्तावेजों की गहनता से पड़ताल की गई। जिन अभ्यर्थियों के पास निर्धारित मानकों के अनुरूप दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे, उन्हें परीक्षा केंद्र में प्रवेश पाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी और नियमों के अभाव में कई उम्मीदवारों को असुविधा का सामना करना पड़ा।

