वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुलासा किया है कि उन्होंने अमेरिकी सेना को विशेष रूप से निर्देश दिया था कि ईरान के रणनीतिक महत्व वाले खर्ग द्वीप पर स्थित तेल ठिकानों को निशाना न बनाया जाए। ट्रंप के अनुसार, तेल प्रतिष्ठानों पर किसी भी तरह का हमला वैश्विक अर्थव्यवस्था को गंभीर रूप से संकट में डाल सकता है। फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने खर्ग द्वीप पर दो से तीन बार कार्रवाइयां की हैं, लेकिन वहां मौजूद तेल रिफाइनरियों और बुनियादी ढांचे को जानबूझकर सुरक्षित छोड़ दिया गया।
सीमित जमीनी सैन्य अभियान और द्वीप पर कब्जे की संभावना बरकरार
अमेरिकी राष्ट्रपति ने तेल ठिकानों को फिलहाल न छूने की बात तो कही, लेकिन उन्होंने भविष्य में इस द्वीप पर नियंत्रण करने या ईरान में सीमित जमीनी सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया। जब उनसे 1988 के उनके एक पुराने बयान के संदर्भ में खर्ग द्वीप पर कब्जे को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे इस पर रणनीतिक कारणों से अभी कोई अंतिम टिप्पणी नहीं करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह जरूर संकेत दिया कि यदि ईरानी सेना को और कमजोर किया गया, तो इस विकल्प पर विचार हो सकता है। जमीनी सेना उतारने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कभी-कभी ऐसे अभियानों की आवश्यकता होती है, और अमेरिका के पास ऐसे सहयोगी या बल मौजूद हैं जो उनकी तरफ से मोर्चा संभाल सकते हैं।
ईरान में मची भारी तबाही और तेहरान की समझौता करने की इच्छा
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों के कारण ईरान को इतना व्यापक नुकसान पहुंचा है कि उसे इस तबाही से उबरने में कम से कम 20 वर्ष का समय लग जाएगा। इसी बीच उन्होंने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि उनके इस साक्षात्कार से महज एक घंटे पहले ही ईरानी प्रतिनिधियों ने अमेरिकी अधिकारियों से संपर्क साधा था और वे अब समझौता करने के इच्छुक हैं। राष्ट्रपति ने तेहरान को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिकी सैन्य दबाव के आगे ईरान के पास बातचीत की मेज पर आने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है, और यदि वे अब भी मुकम्मल समझौता नहीं करते हैं, तो उनके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं बचेगा।

