पुरी। ओडिशा के प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर की एक उच्च स्तरीय समिति ने अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) के उस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें मनचाही तिथियों पर रथ यात्रा निकालने को शास्त्रों के अनुकूल बताया गया था। मंदिर प्रशासन ने इस्कॉन के इस रुख की कड़ी निंदा करते हुए इसे दुनिया भर के सनातन धर्मावलंबियों और भक्तों को भ्रमित करने का एक सोचा-समझा प्रयास करार दिया है।
शास्त्रों और परंपराओं के उल्लंघन पर गहराया विवाद
दरअसल, भारत की भौगोलिक सीमाओं से बाहर भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा और उनसे जुड़े अन्य पवित्र उत्सवों को तय समय से अलग आयोजित करने को लेकर इस्कॉन और पुरी मंदिर प्रबंधन के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (SJTA) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि हाल ही में इस्कॉन के नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संचार कार्यालय द्वारा जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति में कई भ्रामक और असत्य दावे किए गए हैं, जिनका एकमात्र उद्देश्य असमय रथ यात्रा के आयोजन पर पर्दा डालना और जनता को गुमराह करना है।
बैठक में विद्वानों के तर्कों को किया गया खारिज
मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस विषय को सुलझाने के लिए भुवनेश्वर में दोनों पक्षों के विद्वानों के बीच एक संयुक्त बैठक भी आयोजित की गई थी। उस बैठक में इस्कॉन के प्रतिनिधियों ने विभिन्न ग्रंथों का हवाला देकर विदेशों में अलग-अलग दिनों पर रथ यात्रा करने को सही ठहराने की कोशिश की थी, लेकिन पुरी मंदिर के विद्वानों ने प्रामाणिक पुराणों और सनातन परंपराओं के अकाट्य प्रमाण प्रस्तुत कर उनके सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया था। इसके साथ ही, पुरी के गजपति महाराजा दिब्यसिंह देब की सहमति मिलने के इस्कॉन के कथित दावों को भी मंदिर प्रशासन ने शरारतपूर्ण और महाराजा की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया है।

