ATS बिल्डर को बड़ा झटका, मोहाली EDC मामले में खरीदारों के हक में फैसला

मोहाली। पंजाब के डेराबस्सी में स्थित एटीएस गोल्फ मेडोज-2 आवासीय परियोजना में ग्राहकों से एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्ज (ईडीसी) के नाम पर की गई अतिरिक्त वसूली के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। उपभोक्ता फोरम ने इस अनुचित व्यापार व्यवहार को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए पीड़ित खरीदारों के पक्ष में निर्णय दिया है। आयोग ने बिल्डर प्रबंधन को निर्देश दिया है कि वे ग्राहकों से अनुचित रूप से वसूली गई पूरी रकम को ब्याज समेत जल्द से जल्द वापस लौटाएं। इस फैसले से क्षेत्र के तमाम फ्लैट और प्लॉट खरीदारों को बड़ी राहत मिली है।

उपभोक्ता आयोग ने बिल्डर पर लगाया भारी जुर्माना और ब्याज समेत रिफंड का आदेश

जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एटीएस एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड और एटीएस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ सख्त दंडात्मक आदेश पारित किया है। आयोग ने दोनों बिल्डर कंपनियों को आदेश दिया है कि वे शिकायतकर्ताओं से रोकी गई कुल १,६५,९४३ रुपये की राशि को २४ जून २०२२ से भुगतान की तिथि तक ९ प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर के साथ वापस करें। इसके साथ ही, उपभोक्ताओं को हुई अत्यधिक मानसिक प्रताड़ना, असुविधा और मुकदमेबाजी में हुए खर्च की भरपाई के रूप में अतिरिक्त २०,००० रुपये का मुआवजा भी प्रदान करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

पुनर्विक्रय के तहत खरीदे गए प्लॉट में ईडीसी को लेकर हुआ था विवाद

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब शिकायतकर्ता शशि भूषण मित्तल और रेणु मित्तल ने वर्ष २०२१ के दौरान डेराबस्सी स्थित इस नामी परियोजना में पुनर्विक्रय (रीसेल) के माध्यम से ३५० वर्ग गज का एक प्लॉट अपने नाम ट्रांसफर करवाया था। इस सौदे के बाद उन्हें बिल्डर द्वारा ईडीसी के नाम पर ली गई रकम में बड़ी हेराफेरी का पता चला। इसके बाद उन्होंने बिल्डर प्रबंधन के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन वहां से कोई उचित समाधान न मिलने पर उन्होंने उपभोक्ता फोरम की शरण ली, जिसके बाद इस पूरे वित्तीय घालमेल की परतें खुलीं।

नगर परिषद की तय सीमा से कहीं अधिक वसूली गई थी डेवलपमेंट राशि

पीड़ित दंपत्ति द्वारा उपभोक्ता अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, इस प्लॉट के मूल आवंटियों से बिल्डर ने ईडीसी मद के नाम पर ४.३७ लाख रुपये की भारी-भरकम राशि अवैध रूप से वसूल की थी। इसके विपरीत, जब स्थानीय प्रशासन यानी नगर परिषद डेराबस्सी से इस संबंध में जानकारी जुटाई गई, तो पता चला कि परिषद ने इस वर्ग के प्लॉट के लिए वास्तविक ईडीसी केवल २,४२,३८२ रुपये ही निर्धारित की थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि विरोध करने पर बिल्डर ने आंशिक राशि तो वापस कर दी, लेकिन १,६५,९४३ रुपये की मोटी रकम बिना किसी ठोस आधार के अपने पास ही दबाकर रख ली थी।

बिल्डर की दलीलों को खारिज कर आयोग ने उपभोक्ता अधिकारों को सर्वोपरि माना

सुनवाई के दौरान विपक्षी बिल्डर कंपनियों ने अपने बचाव में कई दलीलें पेश कीं और इस अतिरिक्त वसूली को जायज ठहराने की कोशिश की। हालांकि, आयोग ने दोनों पक्षों की जिरह और दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद बिल्डर की सभी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि नगर परिषद द्वारा निर्धारित राशि से एक भी रुपया अधिक वसूलना या उसे अपने पास रोके रखना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम का खुला उल्लंघन है और इस प्रकार की मनमानी पर लगाम लगाना बेहद जरूरी है।

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