E20 पेट्रोल को लेकर सरकार का बड़ा बयान, पुराने विकल्प न देने के पीछे बताईं चुनौतियां

नई दिल्ली। देश के ईंधन बाजार में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं के बीच उठ रहे सवालों पर केंद्र सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने आम जनता की उन चिंताओं का सीधे तौर पर जवाब दिया है, जिसमें शुद्ध पेट्रोल, ई10 और ई20 ईंधन के बीच चयन का विकल्प न मिलने की बात कही जा रही थी। सरकार ने साफ किया है कि भारत जैसे विशाल और सघन वितरण नेटवर्क में एक साथ कई अलग-अलग श्रेणियों के पेट्रोल की राष्ट्रव्यापी आपूर्ति बनाए रखना व्यावहारिक और तार्किक रूप से संभव नहीं है।

कई श्रेणियों के ईंधन वितरण से खड़ी होंगी बड़ी लॉजिस्टिकल चुनौतियां

पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश के कोने-कोने तक ईंधन पहुंचाने वाली मौजूदा वितरण प्रणाली को इस तरह डिजाइन नहीं किया गया है कि वह एक साथ कई प्रकार की आधारभूत ईंधन धाराओं का संचालन कर सके। वर्तमान में देश भर में एक लाख से अधिक रिटेल आउटलेट (पेट्रोल पंप) काम कर रहे हैं, जो रिफाइनरियों, बड़े टर्मिनलों, डिपो और पाइपलाइनों के एक बेहद जटिल नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। ऐसे में अलग-अलग मिश्रण वाले पेट्रोल के लिए समानांतर और स्वतंत्र आपूर्ति शृंखला तैयार करने से न केवल ईंधन के रख-रखाव की लागत में भारी बढ़ोतरी होगी, बल्कि इन्वेंट्री प्रबंधन भी बेहद पेचीदा हो जाएगा, जिससे पूरी प्रणाली की परिचालन दक्षता पर बुरा असर पड़ेगा।

प्रीमियम पेट्रोल से तुलना को मंत्रालय ने बताया पूरी तरह अनुचित

उपभोक्ताओं द्वारा प्रीमियम पेट्रोल की तर्ज पर अलग विकल्प दिए जाने की मांग को खारिज करते हुए मंत्रालय ने कहा कि दोनों की तुलना करना तकनीकी रूप से सही नहीं है। प्रीमियम ईंधन दरअसल कोई अलग राष्ट्रव्यापी आपूर्ति शृंखला का हिस्सा नहीं होते हैं, बल्कि वे एक विशेष श्रेणी के उत्पाद हैं जिन्हें सीमित मात्रा में कुछ खास एडिटिव्स (योजक पदार्थ) मिलाकर बेचा जाता है। इसके विपरीत, ई10 या ई20 जैसे अलग-अलग मिश्रणों के लिए पूरी तरह से अलग बुनियादी ढांचे और रिफाइनरी स्तर से लेकर पंप तक अलग भंडारण व्यवस्था की आवश्यकता होती है, जो कि व्यावहारिक नहीं है।

पुराने वाहनों की वारंटी और इंजन सुरक्षा पर ऑटोमोबाइल कंपनियों की मुहर

पुराने वाहनों के मालिकों की आशंकाओं को दूर करते हुए सरकार ने भरोसा दिलाया है कि ई20 ईंधन को लागू करने का फैसला वाहन निर्माताओं, परीक्षण एजेंसियों और अन्य हितधारकों के साथ गहन तकनीकी मूल्यांकन के बाद ही लिया गया था। वाहन निर्माताओं ने इस बदलाव का पूरा समर्थन किया है और वे आज भी पुराने और नए सभी वाहनों की वारंटी का सम्मान कर रहे हैं। इस संदर्भ में मंत्रालय ने वाहन कंपनियों के वास्तविक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि मारुति सुजुकी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान करीब पौने तीन करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की, जिनमें डेढ़ करोड़ से अधिक पुराने व गैर-ई20 प्रमाणित वाहन थे, और उनमें इथेनॉल के कारण जंग लगने या पुर्जों के खराब होने की एक भी शिकायत सामने नहीं आई है।

माइलेज में मामूली कमी के बदले मिलेंगे बेहतर इंजन परफॉर्मेंस और पर्यावरणीय लाभ

मंत्रालय ने इस बात को स्वीकार किया है कि ई20 ईंधन के उपयोग से वाहनों की ईंधन दक्षता यानी माइलेज में तीन से पांच प्रतिशत की मामूली कमी आ सकती है, लेकिन ईंधन की गुणवत्ता के आकलन के लिए केवल माइलेज को ही एकमात्र पैमाना नहीं माना जाना चाहिए। ई20 ईंधन वाहनों को उच्च ऑक्टेन रेटिंग प्रदान करता है, जिससे इंजन के भीतर दहन बेहतर होता है, पिकअप सुगम होता है और इंजन के पुर्जे साफ रहते हैं। इसके अलावा, यह कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, कच्चे तेल के महंगे आयात पर निर्भरता घटाने, कार्बन उत्सर्जन को कम करने और स्थानीय स्तर पर एथेनॉल उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय में वृद्धि करने के बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य से जुड़ा हुआ है।

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