पूर्व विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका, सजा बरकरार

ग्वालियर: मध्य प्रदेश की सियासत से इस वक्त की एक बहुत बड़ी कानूनी खबर सामने आ रही है, जहां दतिया के पूर्व कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली उच्च न्यायालय से तगड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपनी सजा पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। इस न्यायिक फैसले के बाद कांग्रेस नेता को किसी भी तरह की फौरी राहत नहीं मिल सकी है, जिससे आने वाले दिनों में उनकी राजनीतिक मुश्किलें और अधिक बढ़ना तय माना जा रहा है।

विधानसभा की सदस्यता रद्द रहने का फैसला रहेगा बरकरार

दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद राजेंद्र भारती की विधायकी पर संकट के बादल पूरी तरह गहरा गए हैं। इस आदेश के साथ ही उनकी विधानसभा सदस्यता को समाप्त किए जाने का पुराना फैसला पूरी तरह से लागू और बरकरार रहेगा। कानूनी तौर पर सजा पर स्थगन न मिलने के कारण अब वे जनप्रतिनिधि के रूप में सदन का हिस्सा नहीं रह पाएंगे, जो कि दतिया क्षेत्र की राजनीति में कांग्रेस पार्टी के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक नुकसान है।

दतिया विधानसभा उपचुनाव का रास्ता हुआ पूरी तरह साफ

इस महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय के आते ही दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव को लेकर बनी तमाम कानूनी अड़चनें और अनिश्चितताएं हमेशा के लिए समाप्त हो गई हैं। अब निर्वाचन आयोग के लिए इस क्षेत्र में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का मार्ग पूरी तरह से प्रशस्त हो चुका है। प्रशासन और चुनाव से जुड़ी एजेंसियां अब तय समय सीमा और घोषित कार्यक्रम के अनुसार चुनावी तैयारियों को अमलीजामा पहनाने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी।

बैंक धोखाधड़ी के पुराने मामले में कोर्ट सुना चुका है सजा

पूरे विवाद की जड़ साल 1998 का एक पुराना बैंक एफडी धोखाधड़ी का मामला है, जिसमें दिल्ली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने बीती एक अप्रैल को राजेंद्र भारती को विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। इसके बाद दो अप्रैल को अदालत ने उन्हें तीन साल की जेल और एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, उस समय उन्हें ऊपरी अदालत में अपील दायर करने के लिए तात्कालिक जमानत और 60 दिनों की मोहलत जरूर मिल गई थी, लेकिन अब उच्च न्यायालय से राहत न मिलने के कारण उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं।

Latest news

Related news