ईरान पर अमेरिका का सबसे बड़ा अटैक! ट्रंप बोले-अब फैसला युद्ध के मैदान में होगा,क्या अब निशाने पर हैं मोजतबा खामनेई ?

US Iran War : अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर से बेहद गंभीर मोड़ पर है. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी है. अमेरिकी सेना ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों के भीतर ईरान के 170 से अधिक सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाकर व्यापक हवाई हमले किए गए.

इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अब ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत या शांति समझौते की संभावना नहीं बची है, अब इस विवाद का समाधान “बातचीत की मेज पर नहीं बल्कि युद्ध के मैदान में” होगा.

US Iran War:होर्मुज पर हमले के बाद तेज हुई सैन्य कार्रवाई

घटनाक्रम के अनुसार 27 जून को ईरान की ओर से होर्मुज क्षेत्र में कार्रवाई की गई. इसके बाद अमेरिका ने अगले 48 घंटों में दो चरणों में बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की.

इसके बाद 6 जुलाई को फिर तीन तेल टैंकरों पर हमला हुआ. जवाब में अमेरिका ने 7 और 8 जुलाई को लगातार दूसरे दिन भीषण हवाई अभियान चलाते हुए ईरान के कई सैन्य और सामरिक ठिकानों को निशाना बनाया.

अमेरिकी सेना की ओर से इन हमलों का वीडियो भी जारी किया गया, जिससे संकेत मिले कि सैन्य अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है.

युद्ध की ओर बढ़ते हालात के पांच बड़े संकेत

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा घटनाक्रम पूर्ण युद्ध की आशंका को मजबूत कर रहा है. इसके पीछे पांच प्रमुख संकेत माने जा रहे हैं.

  • अमेरिका लगातार ईरान पर हवाई हमले कर रहा है.
  • राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम और वार्ता की संभावना लगभग खत्म कर दी है.
  • नाटो ने अमेरिकी कार्रवाई का खुला समर्थन किया है.
  • होर्मुज में जहाजों पर हमलों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है.
  • ईरान के भीतर परमाणु ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.

ट्रंप का बड़ा बयान

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका सैन्य दृष्टि से पहले ही बढ़त बना चुका है. उनके अनुसार ईरान समझौता करना चाहता है लेकिन अमेरिका को इस बात पर भरोसा नहीं कि तेहरान किसी समझौते का पालन करेगा.

ट्रंप ने संकेत दिया कि यदि ईरान ने दोबारा समुद्री मार्गों या अमेरिकी हितों को निशाना बनाया तो सैन्य कार्रवाई और भी व्यापक होगी.

 अमेरिका के निशाने पर क्यों हैं ईरान के ये शहर ?
बंदर अब्बास

यह ईरान का सबसे बड़ा समुद्री और नौसैनिक बंदरगाह है. यहां सैन्य सुविधाओं के साथ-साथ व्यापारिक गतिविधियां भी संचालित होती हैं. माना जा रहा है कि यहां हमला कर अमेरिका ने ईरानी नौसेना और आर्थिक ढांचे को  तोड़ने की कोशिश में है.

बुशहर

बुशहर ईरान के एकमात्र सक्रिय परमाणु बिजली संयंत्र का केंद्र है. स्थानीय मीडिया ने यहां तेज धमाकों की खबर दी. हालांकि परमाणु संयंत्र को हुए नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

सिरिक

होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित यह क्षेत्र ईरानी नौसेना की निगरानी गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है. यहां मौजूद सैन्य प्रतिष्ठानों और नौसैनिक संसाधनों को निशाना बनाकर अमेरिका सीधे ईरान की कमर तोड़ सकता है.

चाबहार पोर्ट

हिंद महासागर से जुड़े इस महत्वपूर्ण बंदरगाह का व्यापारिक और सामरिक महत्व काफी अधिक है. रिपोर्टों के अनुसार यहां भी अमेरिकी हमले हुए. इस पोर्ट पर कब्जा करके अमेरिका एक प्रमुख व्यापारिक और सामरिक मार्ग पर कब्जा कर सकता है.

केश्म द्वीप

फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप होने के साथ-साथ यहां तेल और गैस से जुड़ी महत्वपूर्ण सुविधाएं मौजूद हैं. अमेरिकी  बमबारी का यह भी प्रमुख लक्ष्य रहा.

परिवहन और सैन्य ढांचे पर भी हमला

ईरानी मीडिया और सैन्य सूत्रों के अनुसार अमेरिकी हमलों में कई पुल, रेलवे नेटवर्क और सैन्य सप्लाई रूट भी प्रभावित हुए हैं.बताया गया कि मशहद जाने वाले मार्गों के पुलों और गोलिस्तान प्रांत के एक रेलवे ब्रिज पर भी मिसाइल हमले किए गए.

क्यों टूट रही है शांति की संभावना?

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच समझौता तीन प्रमुख मुद्दों पर अटका हुआ है.

1. होर्मुज जलडमरूमध्य

ईरान इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपना प्रभाव बनाए रखना चाहता है, जबकि अमेरिका इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग के रूप में सुरक्षित रखना चाहता है.

2. परमाणु कार्यक्रम

ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने या संवर्धित यूरेनियम सौंपने के लिए तैयार नहीं दिख रहा।

3. क्षेत्रीय सुरक्षा

ईरान चाहता है कि लेबनान और अन्य क्षेत्रों में इजरायल की सैन्य कार्रवाई सीमित हो.

इन्हीं मुद्दों के कारण दोनों देशों के बीच किसी समझौते की संभावना लगातार कमजोर पड़ती जा रही है.

क्या मोजतबा खामेनेई बने अगला लक्ष्य?

मौजूदा हालात में सबसे अधिक चर्चा ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व को लेकर हो रही है.

कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल की रणनीति अब ईरान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व पर केंद्रित हो सकती है. इसी कारण मोजतबा खामेनेई का नाम लगातार चर्चाओं में है.

हालांकि अमेरिका की ओर से इस संबंध में किसी आधिकारिक सैन्य लक्ष्य की पुष्टि नहीं की गई है.

क्या नाटो भी युद्ध में उतर सकता है?

अमेरिकी कार्रवाई को लेकर नाटो महासचिव ने कहा कि यदि युद्धविराम का उल्लंघन हुआ है तो अमेरिका को जवाब देने का अधिकार है. हालांकि अभी तक नाटो की ओर से प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.दूसरी ओर ईरान ने नाटो की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि संगठन निष्पक्ष भूमिका नहीं निभा रहा.

अंतरराष्ट्रीय असर भी बढ़ सकता है

यदि होर्मुज क्षेत्र में संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसके कई वैश्विक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं. सबसे पहले पूरी दुनिया में एक बार फिर से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है. समुद्री के रास्ते होने वाले व्यापार पर भारी असर पड़ेगा, जिसके कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होना निश्चित है.

युद्ध कितना लंबा चल सकता है?

व्हाइट हाउस से जुड़ी मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यदि ईरान की ओर से फिर हमला हुआ तो अमेरिका कई सप्ताह तक लगातार हवाई अभियान चला सकता है. इन अभियानों में सैन्य ठिकानों के साथ-साथ परमाणु प्रतिष्ठानों, तेल-गैस संयंत्रों और सामरिक ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है.

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