चंडीगढ़/नई दिल्ली। पंजाब कांग्रेस में आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर हुए बड़े संगठनात्मक फेरबदल के बाद सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) द्वारा जारी की गई नई समितियों की सूची में जगह न मिलने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद मनीष तिवारी का दर्द छलक उठा है। उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए अपनी ही पार्टी के भीतर कुछ लोगों की मानसिकता पर परोक्ष रूप से निशाना साधा है।
'असुरक्षा का कोई इलाज नहीं'— मनीष तिवारी का तीखा तंज
मनीष तिवारी ने 'पंजाब कांग्रेस में नई नियुक्तियों के बाद मनीष तिवारी हाशिए पर' शीर्षक से छपे एक समाचार पत्र के लेख को साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बेहद सधे और दार्शनिक अंदाज में लिखा, "काश मेरे पास लोगों और संस्थाओं की असुरक्षाओं का कोई इलाज होता! इसके बावजूद, कांग्रेस पार्टी ने पिछले 45 वर्षों में मुझे बहुत कुछ दिया है और मैंने भी अपने जीवन के कई दशक पूरी निष्ठा के साथ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सेवा में समर्पित किए हैं। अंत में, जो होगा सो होगा (क्वे सेरा सेरा)।" उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक पार्टी के भीतर उनके विरोधियों की असुरक्षा की भावना से जोड़कर देख रहे हैं।
चंडीगढ़ सांसद को नई समितियों से रखा बाहर
यह पूरा विवाद बुधवार को कांग्रेस आलाकमान द्वारा पंजाब चुनाव के मद्देनजर घोषित की गई महत्वपूर्ण सांगठनिक नियुक्तियों के बाद शुरू हुआ। वर्तमान में चंडीगढ़ से सांसद मनीष तिवारी, जो इससे पहले पंजाब के आनंदपुर साहिब और लुधियाना से भी लोकसभा सदस्य रह चुके हैं, को इन चुनावी समितियों में कोई भी जिम्मेदारी या भूमिका नहीं सौंपी गई है। पंजाब की राजनीति में एक बड़ा और बौद्धिक चेहरा होने के बावजूद उन्हें इस महत्वपूर्ण फेरबदल से पूरी तरह दूर रखा गया है, जिसके बाद उनके हाशिए पर जाने की अटकलें लगाई जाने लगीं।
चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर रंधावा को बड़ी कमान
AICC के महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पंजाब इकाई के लिए नई नियुक्तियों को तत्काल प्रभाव से हरी झंडी दे दी है। नई व्यवस्था के तहत पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को सबसे महत्वपूर्ण 'चुनाव प्रचार समिति' का प्रमुख नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला को 'चुनाव प्रबंधन और समन्वय समिति' की कमान सौंपी गई है। वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा को 'कोर कमेटी' का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अमर सिंह को आगामी चुनाव के लिए 'घोषणापत्र समिति' का नेतृत्व सौंपा गया है।
राजा वारिंग और बाजवा की कुर्सी बरकरार, तीन नए कार्यकारी अध्यक्ष
पार्टी आलाकमान ने यह भी साफ कर दिया है कि अमरिंदर सिंह राजा वारिंग पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PPCC) के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे। वहीं, विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में प्रताप सिंह बाजवा ही कांग्रेस विधायक दल की कमान संभालेंगे। इस मुख्य संतुलन को बनाए रखने के साथ ही, कांग्रेस ने पंजाब में सांगठनिक ढांचे को मजबूती देने के लिए तीन नए कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति की है, जिनमें सुखविंदर सिंह डैनी, राज कुमार वेरका और संगत सिंह गिलजियान के नाम शामिल हैं। इस नए बदलाव के साथ ही अब पंजाब कांग्रेस के भीतर गुटबाजी और असंतोष की नई चिंगारी सुलगने की आशंका गहरा गई है।





