अमरनाथ यात्रा 2026 पर जा रहे हैं? निकलने से पहले कर लें ये 5 जरूरी तैयारियां

जम्मू: वर्ष 2026 की पवित्र अमरनाथ यात्रा की शुरुआत आगामी 3 जुलाई से होने जा रही है। इस पावन यात्रा के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पहले ही 15 अप्रैल 2026 से शुरू की जा चुकी है। समुद्र तल से लगभग 13,000 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित बाबा बर्फानी की यह गुफा जितनी आध्यात्मिक है, उतनी ही भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण भी मानी जाती है। यह यात्रा 28 अगस्त 2026 (रक्षाबंधन) तक चलेगी। यदि आप भी इस साल बाबा के दर्शनों का मन बना रहे हैं, तो सुरक्षा और सेहत के लिहाज से कुछ बेहद महत्वपूर्ण बातों को जानना आपके लिए बेहद जरूरी है।

सही मार्ग का चुनाव और रास्ते की चुनौतियाँ

अमरनाथ गुफा तक पहुँचने के लिए मुख्य रूप से दो रास्ते हैं। पहला पारंपरिक मार्ग पहलगाम से होकर जाता है, जो करीब 46 किलोमीटर लंबा है। इस रास्ते से यात्रा पूरी करने में 3 से 5 दिन का समय लगता है, लेकिन इसकी चढ़ाई बालटाल के मुकाबले थोड़ी आसान है। दूसरा मार्ग बालटाल से शुरू होता है, जो महज 14 किलोमीटर का है। यह रास्ता छोटा जरूर है, लेकिन इसकी खड़ी चढ़ाई और संकरे रास्ते बेहद चुनौतीपूर्ण हैं, जिसे 1 से 2 दिन में पूरा किया जा सकता है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को कड़ाके की ठंड, अचानक होने वाली तेज बारिश, भूस्खलन (लैंडस्लाइड) और ऊंचाई पर होने वाली ऑक्सीजन की कमी जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

अनिवार्य कागजी कार्रवाई और नियम

यात्रा पर निकलने से पहले श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) द्वारा जारी गाइडलाइंस के अनुसार कुछ दस्तावेज़ बेहद जरूरी हैं। सबसे पहले सरकार द्वारा अधिकृत डॉक्टरों से अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (CHC) लेना होगा, जो 9 अप्रैल 2026 के बाद का ही मान्य है। इसके आधार पर अधिकृत बैंकों या वेबसाइट से यात्रा परमिट प्राप्त किया जा सकता है। इसके अलावा, जम्मू या श्रीनगर पहुंचने पर प्रशासन द्वारा एक RFID ट्रैकिंग कार्ड दिया जाएगा, जिसे पूरी यात्रा में गले में पहनना अनिवार्य है। सरकारी नियमों के मुताबिक, 13 साल से कम, 70 साल से अधिक के बुजुर्गों और 6 सप्ताह से अधिक की गर्भवती महिलाओं को इस यात्रा की अनुमति नहीं दी जाती है।

शारीरिक फिटनेस और पैकिंग की खास तैयारी

दुर्गम रास्तों पर सुरक्षित चलने के लिए यात्रा से कम से कम एक महीना पहले से ही प्रतिदिन 4-5 किलोमीटर पैदल चलने और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए 'अनुलोम-विलोम' जैसे प्राणायाम का अभ्यास शुरू कर देना चाहिए। सामान पैक करते समय मौसम के मिजाज को देखते हुए भारी जैकेट के बजाय लेयरिंग तकनीक (एक के ऊपर एक कपड़े) का इस्तेमाल करें। बैग में थर्मल इनर, वॉटरप्रूफ ट्रैक सूट, मजबूत ग्रिप वाले ट्रैकिंग शूज और रेनकोट जरूर रखें। चढ़ाई के दौरान हाथों को खाली रखने के लिए छाते की जगह विंडचीटर या रेनकोट का ही इस्तेमाल सबसे सुरक्षित माना जाता है।

खान-पान, दवाएं और मेडिकल सहायता

अत्यधिक ऊंचाई पर शरीर का ऑक्सीजन लेवल और एनर्जी बनाए रखने के लिए खाली पेट चढ़ाई करने से बचें। रास्ते में मिलने वाले भंडारों (लंगरों) में पौष्टिक भोजन करते रहें। अपने साथ ग्लूकोज, सूखे मेवे (काजू, बादाम), डार्क चॉकलेट और डॉक्टर की सलाह पर ऊंचाई की बीमारी (Altitude Sickness) की दवाइयां जैसे डायामॉक्स (Diamox), पेनकिलर और बैंडेज हमेशा साथ रखें। शरीर में पानी की कमी न होने दें और लगातार गुनगुना पानी पीते रहें। यात्रा के दौरान शराब या धूम्रपान का सेवन पूरी तरह वर्जित है। यदि रास्ते में थोड़ा भी सिरदर्द, चक्कर या सांस लेने में तकलीफ हो, तो जिद न करें और हर 2 किलोमीटर पर मौजूद सेना या प्रशासन के मेडिकल कैंप में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

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