-सुरेश पचौरी
भारतीय राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जिनका मूल्यांकन केवल उनके पदों से नहीं, बल्कि उनके निर्णयों, संगठन निर्माण की क्षमता से किया जाता है। मेरे सार्वजनिक जीवन के छह दशकों में मुझे अनेक प्रधानमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और विभिन्न दलों के शीर्ष नेताओं के साथ निकटता से काम करने का अवसर मिला है।
जब मैंने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की, तदोपरांत पहली बार दिल्ली स्थित अमित शाह जी के निवास पर मुझे मिलने का अवसर मिला। यह मेरे लिए अत्यंत सुखद और आश्चर्यजनक अनुभव था। हमारी पहली औपचारिक मुलाकात से पहले ही उन्हें मेरे सार्वजनिक जीवन, कांग्रेस संगठन में मेरी भूमिका, संसदीय अनुभव और राजनीतिक यात्रा की विस्तृत जानकारी ले रखी थी। मुझे स्पष्ट हो गया कि वे किसी व्यक्ति से मिलने से पहले उसकी पूरी जानकारी करते हैं। यह उनकी कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है—तैयारी, तथ्य, अध्ययन और सूक्ष्म विश्लेषण।
मेरे लंबे राजनीतिक जीवन में मैंने अनेक कुशल प्रशासकों और रणनीतिकारों को देखा है, लेकिन अमित शाह जैसा लौहपुरुष गृह मंत्री और राजनीतिक रणनीतिकार बिरले ही होते हैं । वे केवल घटनाओं पर प्रतिक्रिया नहीं देते, बल्कि उनकी दिशा और संभावनाओं आँकलन कर संगठन और सरकार—दोनों को उसी अनुरूप तैयार करते हैं।
सन 2014 का लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति का निर्णायक मोड़ था। उस समय वर्तमान यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सामने परिवर्तन, विकास और नए विश्वास का चेहरा थे, लेकिन उस जनसमर्थन को बूथ स्तर तक संगठित कर ऐतिहासिक जनादेश में परिवर्तित करने वाले प्रमुख रणनीतिकार अमित शाह थे। उत्तर प्रदेश में उनके मार्गदर्शन में भाजपा ने अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की और उसी विजय ने केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार का मार्ग प्रशस्त किया। इसके बाद 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मिली ऐतिहासिक सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि यह केवल चुनावी लहर नहीं थी, बल्कि सुदृढ़ संगठन, सूक्ष्म प्रबंधन और देवतुल्य कार्यकर्ता-आधारित राजनीति का परिणाम था।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में श्री अमित शाह ने भारतीय जनता पार्टी को केवल एक राजनीतिक दल नहीं रहने दिया, बल्कि उसे विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक राजनीतिक संगठन बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई। बूथ सशक्तिकरण, सदस्यता अभियान, पन्ना प्रमुख जैसी अवधारणाओं को प्रभावी ढंग से लागू कर उन्होंने संगठन को गांव-गांव तक पहुँचाया। आज भाजपा का देश के लगभग प्रत्येक राज्य में संगठनात्मक आधार दिखाई देता है और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन निरंतर विस्तार की दिशा में आगे बढ़ा है।
अमित शाह की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे केवल चुनाव जीतने की रणनीति नहीं बनाते, बल्कि भारत के राजनीतिक भूगोल को बदलने की दीर्घकालिक योजना पर काम करते हैं। महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा, उत्तर-पूर्व, ओडिशा और अन्य राज्यों में भाजपा तथा एनडीए का विस्तार इसी सोच का परिणाम माना जा सकता है। राज्यसभा में भाजपा और एनडीए की लगातार मजबूत होती स्थिति भी श्री शाह की दूरगामी सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का परिणाम है।
दक्षिण भारत, जिसे कभी भाजपा के लिए सबसे कठिन क्षेत्र माना जाता था, आज वहाँ भी पार्टी लगातार अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही है।
यदि उनके सार्वजनिक जीवन की ऐतिहासिक उपलब्धियों का उल्लेख किया जाए, तो अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने का निर्णय स्वतंत्र भारत के सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक निर्णयों में गिना जाएगा। दशकों से लंबित विषय पर जिस दृढ़ता और स्पष्टता के साथ श्री शाह के द्वारा जो निर्णय लिया गया, उसने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी। राष्ट्रीय एकीकरण के प्रश्न पर यह निर्णय लंबे समय तक चर्चा और अध्ययन का विषय रहेगा।
इसी प्रकार तीन तलाक के विरुद्ध कानून, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में उठाए गए कदम, नक्सलवाद और आतंकवाद के विरुद्ध कठोर नीति तथा पूर्वोत्तर भारत में अनेक शांति समझौतों ने केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में उनकी कार्यशैली को अलग पहचान दी।
कोविड-19 जैसी अभूतपूर्व वैश्विक महामारी के दौरान भी गृह मंत्रालय के स्तर पर राज्यों के साथ समन्वय, कानून-व्यवस्था बनाए रखना, आवश्यक सेवाओं की निर्बाध व्यवस्था और संकट प्रबंधन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। ऐसे समय में त्वरित निर्णय क्षमता और प्रशासनिक समन्वय किसी भी सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा होती है।
राजनीति के चाणक्य हैं- अमित शाह
देश की सबसे बड़ी चुनौती नक्सलवाद को अमित शाह ने खत्म कर दिया। लोकसभा या राज्यसभा की व्यूहरचना हो, अमित शाह हमेशा फ्लोर मैनेजमेंट में मास्टर साबित हुए और दोनों सदन में उनकी तर्कपूर्ण आक्रामकता रही। आने वाले सदन के सत्र में अमित शाह की रणनीति सफल साबित होगी।
यदि श्री अमित शाह की राजनीतिक यात्रा का सबसे प्रेरक अध्याय चुनना हो, तो मैं पश्चिम बंगाल का उल्लेख अवश्य करूँगा। एक समय ऐसा था जब वहाँ भाजपा का जनाधार अत्यंत सीमित था। 2017 के आसपास जिस संगठनात्मक बीजारोपण की शुरुआत हुई, 2021 में भाजपा राज्य की प्रमुख विपक्षी शक्ति बनकर उभरी और अंततः 2026 में ऐतिहासिक जनादेश के साथ सरकार बनाने में सफल हुई। भारतीय राजनीति में ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलते हैं जहाँ किसी दल ने इतने कम समय में इतनी बड़ी संगठनात्मक छलांग लगाई हो।
आज अनेक राजनीतिक विश्लेषक अमित शाह को समकालीन राजनीति का 'राजनीतिक चाणक्य' कहते हैं। लेकिन इतना अवश्य कहा जा सकता है कि जटिल राजनीतिक परिस्थितियों को अवसर में बदलने, संगठन को निरंतर गतिशील बनाए रखने और चुनौतीपूर्ण राज्यों में पार्टी का विस्तार करने की उनकी क्षमता उन्हें विशिष्ट बनाती है। भाजपा और एनडीए के भीतर श्री शाह को प्रधानमंत्री जी का सबसे विश्वसनीय संकटमोचक के रूप में देखा जाता है।
मेरे व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर मैं यह कह सकता हूँ कि अमित शाह की सबसे बड़ी शक्ति उनकी स्मरण क्षमता, अध्ययनशीलता, कार्यकर्ताओं के प्रति आत्मीयता और निर्णय लेने की क्षमता है।
मेरे अनुभव में अमित शाह उन बिरले नेताओं में से एक हैं जिन्होंने संगठन, चुनावी रणनीति, शासन, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक विस्तार—इन सभी क्षेत्रों में अपनी गहरी छाप छोड़ी है। यही किसी भी सफल राजनीतिक रणनीतिकार की सबसे बड़ी उपलब्धि होती है।
(लेखक भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय रक्षा उत्पादन, कार्मिक व संसदीय कार्य राज्य मंत्री हैं )





