Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार आठों आरोपियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. सोमवार को इन 8 गिरफ्तार आरोपियों की तीन दिन की न्यायिक हिरासत खत्म हो रही है और उन्हें स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा. इसी बीच फैजाबाद बार एसोसिएशन के वकीलों ने संकेत दिए हैं कि वे आरोपियों की पैरवी नहीं करेंगे.
Ram Mandir Donation Theft Case:आज बार एसोसिएशन की आमसभा में होगा अंतिम फैसला
फैजाबाद बार एसोसिएशन सोमवार सुबह 11 बजे आमसभा आयोजित करेगी, जिसमें प्रस्ताव रखा जाएगा कि कोई भी सदस्य इस मामले में आरोपियों की ओर से अदालत में पेश न हो. बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने बताया कि इस विषय पर अंतिम निर्णय आमसभा में लिया जाएगा.
वहीं, बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल का कहना है कि राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी की घटना से अधिवक्ताओं की भावनाएं आहत हुई हैं और अधिकांश वकील आरोपियों की पैरवी नहीं करना चाहते.
कुछ वकीलों ने की सख्त कार्रवाई की मांग
इस मामले को लेकर कई अधिवक्ताओं ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठाई है. अधिवक्ता विवेक कुमार सिंह ने कहा कि पुलिस को आरोपियों को जनता के सामने भी लाना चाहिए था, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र चौधरी ने आरोपियों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इस घटना से अयोध्या की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है.
इन आठ आरोपियों की हुई है गिरफ्तारी
पुलिस ने इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे, रामशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव शामिल हैं.
ये सभी राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए नकद, आभूषण और अन्य कीमती सामान की गिनती से जुड़े कार्य में लगे हुए थे.
अब तक करीब 79.85 लाख रुपये बरामद
जांच के दौरान पुलिस अब तक करीब 79.85 लाख रुपये बरामद कर चुकी है. आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की चोरी, आपराधिक विश्वासघात, चोरी की संपत्ति रखने, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.
यह एफआईआर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई थी.
आरोपियों के घरों पर हुई छापेमारी
रविवार को पुलिस ने सभी आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की. स्थानीय मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई तलाशी के दौरान कुछ घरों से नकदी और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए.
अब पुलिस इन दस्तावेजों और नकदी का सत्यापन कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका संबंध मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी से है या नहीं.
कोर्ट में पुलिस मांग सकती है कस्टडी रिमांड
सूत्रों के अनुसार, सोमवार को अदालत में पेशी के दौरान पुलिस आरोपियों की कस्टडी रिमांड भी मांग सकती है. जांच एजेंसियों का मानना है कि रिमांड मिलने पर मामले से जुड़े अन्य पहलुओं और संभावित वित्तीय लेन-देन का खुलासा हो सकता है.
क्या ट्रस्ट को पहले से थी गड़बड़ी की जानकारी?
सूत्रों के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को इस कथित गड़बड़ी की जानकारी मामला सार्वजनिक होने से पहले ही मिल गई थी. बताया जा रहा है कि ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के निर्देश पर 5 जून को ट्रस्ट के प्रतिनिधि पुलिस के साथ आरोपी अविनाश शुक्ला के घर पहुंचे थे.
दावा किया जा रहा है कि तलाशी के दौरान वहां से नकदी भी बरामद हुई थी. हालांकि, उस समय ट्रस्ट की ओर से कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी. इस दावे की स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
CCTV फुटेज भी आया सामने
मामले से जुड़ा 24 सेकेंड का एक कथित CCTV फुटेज भी सामने आया है. वीडियो में पुलिसकर्मी आरोपी अविनाश शुक्ला को हिरासत में लेकर एक सफेद वाहन की ओर ले जाते दिखाई दे रहे हैं. उसके हाथ में एक काला बैग भी नजर आता है.
सूत्रों का दावा है कि इसी बैग में तलाशी के दौरान बरामद नकदी रखी गई थी. हालांकि, पुलिस या जांच एजेंसियों ने इस फुटेज की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
अयोध्या राम मंदिर मामले में एक नया सीसीटीवी फुटेज सामने आया
अयोध्या राम मंदिर मामले में कई तरह की जानकारी आ रही है. अब एक नया सीसीटीवी फुटेज आया है. ये सीसीटीवी फुटेज 5 जून का है. इसमें दिख रहा है कि अविनाश शुक्ला के साथ कुछ पुलिस के जवान मौजूद हैं. साथ में एक काले रंग की बैग भी… pic.twitter.com/zWb5XWkl75
— NDTV India (@ndtvindia) June 28, 2026
जांच जारी, कोर्ट की कार्यवाही पर रहेगी नजर
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में अब सभी की नजर सोमवार को होने वाली अदालत की कार्यवाही और फैजाबाद बार एसोसिएशन की आमसभा के फैसले पर है. यदि वकील आरोपियों की पैरवी से इनकार करते हैं, तो अदालत को कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपियों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी पड़ सकती है. वहीं पुलिस की संभावित रिमांड याचिका से जांच को नई दिशा मिलने की संभावना भी जताई जा रही है.




