भोपाल: आज 26 जून को देश और दुनिया भर में 'अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस' मनाया जा रहा है। इस विशेष अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी प्रदेशवासियों से नशे के खिलाफ चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों में सक्रिय रूप से जुड़ने की भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि यह दिन हमें नशे के घातक दुष्प्रभावों के प्रति हमेशा सजग रहने की प्रेरणा देता है। सीएम ने आह्वान किया कि हर नागरिक नशामुक्त समाज के निर्माण में अपना बहुमूल्य योगदान दे, ताकि एक स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त भारत के संकल्प को साकार किया जा सके।
संयुक्त राष्ट्र ने 1987 में की थी शुरुआत
इस दिन का इतिहास काफी महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा वर्ष 1987 में पारित किए गए एक विशेष प्रस्ताव के बाद हुई थी। तब से लेकर आज तक हर साल 26 जून को यह दिवस वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मादक पदार्थों के सेवन और उनकी अवैध तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाना है, ताकि सरकारों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को एक मंच पर लाकर नशे से प्रभावित लोगों के इलाज और उनके पुनर्वास को बढ़ावा दिया जा सके।
नशे के दुष्प्रभाव और समाज पर इसका असर
स्वास्थ्य और सामाजिक विशेषज्ञों के अनुसार, नशा केवल एक व्यक्ति के शरीर को ही नष्ट नहीं करता, बल्कि उसके पूरे परिवार, समाज और देश की तरक्की को भी पूरी तरह बर्बाद कर देता है। मादक पदार्थों का लगातार सेवन करने से दिल, लिवर, फेफड़ों और दिमाग पर बेहद गंभीर और जानलेवा असर पड़ता है। इसके कारण मानसिक तनाव, अवसाद (Depression), चिंता और हिंसक प्रवृत्तियां तेजी से बढ़ती हैं। इतना ही नहीं, इससे युवाओं की शिक्षा, करियर और आर्थिक स्थिति खराब होती है, जिससे समाज में अपराध और सड़क दुर्घटनाएं भी बढ़ती हैं।
जागरूकता और एकजुटता ही है एकमात्र समाधान
इस वैश्विक अभियान का मूल संदेश यही है कि केवल कड़े कानून, सही शिक्षा, परिवार के अटूट सहयोग और समय पर उचित इलाज के जरिए ही नशे की इस भयानक चुनौती का सामना किया जा सकता है। यह दिन महज एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को नशे के खिलाफ एकजुट करने का एक बड़ा आंदोलन है। सभी की सक्रिय भागीदारी से ही एक नशामुक्त, सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य का निर्माण संभव है।





