मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत रविवार को एक बहुत बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला। उद्धव ठाकरे गुट के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में उनकी पार्टी का दामन थाम लिया। इस मौके पर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सभी बागी सांसदों का स्वागत करते हुए उन्हें 'छह टाइगर' कहा और उनके कामों की जमकर तारीफ की। इस बड़े घटनाक्रम के बाद से महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, पार्टी बदलने के बाद ज्यादातर सांसद मीडिया से बात किए बिना ही निकल गए, लेकिन मुंबई उत्तर-पूर्व से सांसद संजय दीना पाटिल ने खुलकर अपनी बात रखी और उद्धव ठाकरे के करीबी नेताओं पर जमकर निशाना साधा।
अपमान के कारण छोड़ी पार्टी
सांसद संजय दीना पाटिल ने पार्टी छोड़ने की वजह बताते हुए कहा कि शिवसेना (यूबीटी) में उनके समर्थकों का लगातार अपमान हो रहा था। उन्होंने कहा कि वे पिछले सात वर्षों से पार्टी में थे, लेकिन सांसद होने के बावजूद उन्हें वह मान-सम्मान नहीं मिल रहा था जिसके वे हकदार थे। पाटिल ने स्पष्ट किया कि उन्हें उद्धव ठाकरे या आदित्य ठाकरे से कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर मौजूद 'एक खास शख्स' के बर्ताव और तानाशाही की वजह से उन्होंने पार्टी छोड़ने का यह बड़ा फैसला लिया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उद्धव ठाकरे ने उनकी बात पहले सुनी होती, तो आज यह नौबत ही नहीं आती।
उद्धव ठाकरे ने खुद बुलाया था
संजय दीना पाटिल ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि वह कभी खुद उद्धव ठाकरे के पास टिकट या पद मांगने नहीं गए थे, बल्कि ठाकरे ने खुद उन्हें फोन करके बुलाया था। उन्होंने बताया कि उस समय उद्धव ठाकरे मुंबई उत्तर-पूर्व की सीट राज ठाकरे की पार्टी मनसे को नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने मुझे उम्मीदवार बनाया था। पाटिल ने कहा कि उन्हें न तो सांसद बनने की लालसा थी और न ही वे कोई मांग लेकर गए थे। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि पार्टी छोड़ने के फैसले के बाद उन्हें गालियां दी गईं। वे चाहते थे कि पार्टी नेतृत्व उनसे बात करे और माफी मांगकर वापस बुलाए, लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
विरोधियों को दी सीधी चेतावनी
रविवार को उद्धव ठाकरे और उनके करीबी नेता संजय राउत ने पाटिल के संसदीय क्षेत्र में एक सभा की थी, जिसमें संजय राउत ने बागी सांसदों को 'गद्दार' कहते हुए उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने और सबक सिखाने की धमकी दी थी। राउत ने यहाँ तक कहा था कि बागी सांसदों को शिवसैनिकों के गुस्से से बचने के लिए वायुसेना की सुरक्षा भी कम पड़ेगी। इस पर पलटवार करते हुए संजय दीना पाटिल ने ठाकरे गुट के कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी कि वे किसी के भड़कावे में न आएं। पाटिल ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि अगर किसी ने उनके या उनके परिवार पर हमला करने की कोशिश की, तो उसे अस्पताल या श्मशान जाना पड़ सकता है, इसलिए ऐसा कदम उठाने से पहले लोग अपना इंश्योरेंस करवा लें।
सुरक्षा लेने से किया इनकार
इस सियासी तनाव के बीच महाराष्ट्र पुलिस ने बागी सांसदों को 'वाई-प्लस' (Y-Plus) सुरक्षा दी है, लेकिन संजय दीना पाटिल ने इस सुरक्षा को लेने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा है कि उन्हें किसी भी तरह की सरकारी सुरक्षा की जरूरत नहीं है। पाटिल का मानना है कि अगर उनके साथ पुलिस होगी और किसी ने उन पर या उनके करीबियों पर हमला किया, तो वे कानून के कारण सामने वाले को मुंहतोड़ जवाब नहीं दे पाएंगे। उन्होंने कहा कि वे अपनी सुरक्षा खुद करने में पूरी तरह सक्षम हैं, इसलिए पुलिस को यह सुरक्षा उन लोगों को देनी चाहिए जो डर रहे हैं।

