नई दिल्ली। पूर्वी भारत का प्रसिद्ध और आस्था का बड़ा केंद्र 'अंबुवाची मेला' सोमवार से असम के कामाख्या मंदिर में शुरू होने जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाले इस पावन मेले में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं, तीर्थयात्रियों, साधु-संतों और पर्यटकों के पहुंचने की उम्मीद है। नारी शक्ति और प्रजनन क्षमता के प्रतीक के रूप में मनाया जाने वाला यह मेला देवी कामाख्या के वार्षिक मासिक धर्म चक्र का उत्सव है, जिन्हें दैवीय स्त्री रचनात्मक ऊर्जा का साक्षात् स्वरूप माना जाता है। भारत में शक्ति उपासना और तांत्रिक परंपराओं से जुड़े लोगों के लिए इस आयोजन का विशेष महत्व है।
तीन दिनों तक बंद रहेंगे गर्भगृह के कपाट
धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत सोमवार रात 'प्रवृत्ति समारोह' के साथ होगी, जो इस पावन और विशेष काल की शुरुआत का प्रतीक है। अनुष्ठान शुरू होने के बाद कामाख्या मंदिर के कपाट तीन दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे। इस अवधि के दौरान मंदिर के भीतर सभी सामान्य धार्मिक अनुष्ठान रोक दिए जाते हैं, जो देवी के मासिक धर्म के दौरान पालन किए जाने वाले एकांतवास को दर्शाता है। इस दौरान किसी भी भक्त को गर्भगृह में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होती है।
मंदिर खुलने की तिथि और विशेष महाप्रसाद का महत्व
नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित कामाख्या मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। तीन दिनों के एकांतवास के बाद, 26 जून की सुबह 'निवृत्ति अनुष्ठान' और पारंपरिक नित्य पूजा पूरी होने के साथ ही मंदिर के कपाट दोबारा आम भक्तों के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके बाद श्रद्धालु माता के दर्शन कर आशीर्वाद ले सकेंगे। मंदिर के कपाट खुलने पर भक्तों को बेहद पवित्र माने जाने वाले 'अंगोदक' (पवित्र जल) और 'अंगवस्त्र' (रक्तवर्ण वस्त्र) का प्रसाद वितरित किया जाता है, जिसे पाने के लिए हजारों की संख्या में भीड़ उमड़ती है।
प्रशासन की व्यापक तैयारियां और सुरक्षा इंतजाम
इस बड़े आध्यात्मिक समागम को देखते हुए असम सरकार और कामाख्या मंदिर प्रबंधन ने व्यापक और पुख्ता तैयारियां पूरी कर ली हैं। गुवाहाटी आने वाले तीर्थयात्रियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा, स्वच्छता, ठहरने (आवास) और भोजन वितरण के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि मेले का संचालन सुचारू रूप से हो सके। हर साल आयोजित होने वाला यह अंबुवाची मेला पूरे गुवाहाटी शहर को एक जीवंत आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र में बदल देता है।

