हिंदू धर्म में जब कोई व्यक्ति अपने घर या तीर्थ स्थान पर पूजा पाठ, हवन, यज्ञ आदि या कोई अन्य मांगलिक कार्य करता है तो पंडित जी उसके हाथों में रक्षा सूत्र या कलावा बांधते हैं. इसे कुछ स्थानों पर मौली भी कहा जाता है. पंडित जी वह रक्षासूत्र हाथ में 3 बार या 5 बार लपेटते हैं. कुछ लोगों को देखेंगे कि वे अपनी कलाई में एक ही बार कलावा लपेटकर बांधे होते हैं तो कुछ 7 या उससे अधिक बार रक्षा सूत्र को लपेटते हैं. ऐसे में सवाल यह है कि हाथ में रक्षा सूत्र कितनी बार लपेटना चाहिए, 3, 5 या 7 बार?
हाथ में रक्षा सूत्र कितनी बार लपेटना चाहिए?
मुख्य रूप से हाथ में जब रक्षा सूत्र बांधा जाता है तो उसे कम से कम 3 बार लपेटा जाता है. यह अधिकतर पंडित और पुरोहित करते हैं. कुछ लोग 5 बार कलावे को हाथ से लपेटकर बांध देते हैं. हाथ में रक्षा सूत्र या कलावे को 3 या 5 बार लपेटना चाहिए.
रक्षा सूत्र को जब 3 बार लपेटा जाता है तो उसका संंबंध त्रिदेवों और त्रिशक्तियों से हो जाता है. हिंदू धर्म में त्रिदेवों ब्रह्मा, विष्णु और महेश शामिल हैं, वहीं त्रिशक्तियों में माता महालक्ष्मी, महासरस्वती और महाकाली हैं. जब आप 3 बार रक्षा सूत्र लपेटकर बांधते हैं तो आपको त्रिदेव और त्रिशक्तियों ये सुरक्षा प्राप्त होती है. वे आपकी रक्षा करते हैं.
कलावा 5 बार लपेटने का महत्व
जब आप हाथ में कलावा या रक्षा सूत्र को 5 बार लपेटकर बांधते हैं तो इसका संबंध इस सृष्टि के पंच तत्वों से होता है. उन पंच तत्वों में पृथ्वी, आकाश, जल, अग्नि और वायु शामिल हैं. इससे मिलकर मनुष्य का शरीर बना है. रक्षा सूत्र को 5 बार लपेटना इन पंच तत्वों को संतुलित और सुरक्षित रखने का प्रतीक माना जाता है.
रक्षा सूत्र किस हाथ में बांधना चाहिए?
पुरुषों को रक्षा सूत्र उनके दाहिने हाथ में बांधना चाहिए, वहीं विवाहित महिलाओं के बाएं हाथ में रक्षा सूत्र बांधने का नियम है. लड़कियों और अविवाहित युवतियों के दाएं हाथ में रक्षा सूत्र बांध सकते हैं.
रक्षा सूत्र बांधते समय आपका हाथ खुला न रहे, मुट्ठी बांध लेनी चाहिए. मंत्रोच्चार के साथ ही रक्षा सूत्र बंधवाना चाहिए. रक्षा सूत्र बांधने के बाद पंडित और पुरोहित को दक्षिणा देते हैं.

