भारत 'ए' और श्रीलंका 'ए' के बीच मैदान पर खेले गए हालिया मुकाबले के दौरान युवा भारतीय बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी और श्रीलंकाई खिलाड़ी के बीच हुई तीखी नोकझोंक लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। इस ऑन-फील्ड विवाद को लेकर इंटरनेट और सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, यहाँ तक कि कुछ जगहों पर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) द्वारा युवा खिलाड़ी पर दंडात्मक कार्रवाई किए जाने का दावा भी किया जा रहा है। अब इन तमाम चर्चाओं और अफवाहों पर पूर्ण विराम लगाते हुए क्रिकेट बोर्ड के सचिव देवजीत सैकिया ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
मैच रेफरी के अधिकार क्षेत्र में नहीं पड़ेगा बोर्ड का प्रभाव
क्रिकेट बोर्ड के मुख्यालय मुंबई से जारी बयान में सचिव देवजीत सैकिया ने साफ लफ्जों में कहा कि खेल के मैदान के भीतर होने वाली किसी भी अनुशासनहीनता या विवाद पर फैसला लेने का सर्वाधिकार केवल और केवल मैच रेफरी और ऑन-फील्ड अंपायरों के पास सुरक्षित होता है। ऐसे प्रशासनिक और मैदानी मामलों में क्रिकेट बोर्ड की सीधे तौर पर कोई भूमिका नहीं होती। सैकिया ने कहा, "इंटरनेट पर कई तरह की मनगढ़ंत बातें फैलाई जा रही हैं, जिनमें यह दावा भी शामिल है कि बोर्ड खिलाड़ी के खिलाफ किसी बड़े एक्शन की तैयारी में है। लेकिन क्या कोई यह चाहेगा कि बोर्ड मैच संचालन करने वाले रेफरी के वैधानिक अधिकारों में हस्तक्षेप करे?"
'नियमों के तहत रेफरी ही सर्वोच्च संस्था'
बोर्ड सचिव ने आगे स्पष्ट किया कि अगर मैनेजमेंट ऐसे जमीनी मामलों में दखल देना शुरू कर देगा, तो इससे खेल की साख को नुकसान पहुंचेगा और एक गलत परंपरा की शुरुआत हो जाएगी। उन्होंने कहा, "मैदान की हरकतों पर न्याय करने वाली अथॉरिटी बोर्ड नहीं है। हमें उस दायरे से दूर रहना चाहिए, जहाँ मैच रेफरी और अंपायर हर घटना पर स्वतंत्र निर्णय लेने के लिए अधिकृत किए गए हैं।" सैकिया के अनुसार, क्रिकेट की गरिमा को बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि खेल से जुड़ा कोई भी विवाद तय नियमों के तहत मैदान पर मौजूद अधिकारियों द्वारा ही सुलझाया जाए।
आईसीसी (ICC) और बोर्ड के नियम भी नहीं देते अनुमति
देवजीत सैकिया ने वैधानिक पहलुओं का हवाला देते हुए बताया कि बोर्ड के अपने संविधान और अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) के कड़े नियमों के तहत भी मैनेजमेंट को ऐसे ऑन-फील्ड विवादों में सीधे कूदने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, "खेल के लाइव संचालन और उसके अनुशासन से जुड़े फैसलों को बदलने या उनमें उंगली करने की शक्ति हमारे पास नहीं है। मैदान पर जो कुछ भी हुआ, वह खेल की तात्कालिक उत्तेजना का एक हिस्सा था और आईसीसी के नियमों के मुताबिक इसमें बोर्ड का कोई रोल नहीं बनता।"
कार्रवाई की सभी अफवाहें पूरी तरह बेबुनियाद
सचिव ने वैभव सूर्यवंशी को लेकर चल रही सभी सोशल मीडिया रिपोर्ट्स को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने खेल प्रेमियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि बोर्ड द्वारा कार्रवाई की बातें पूरी तरह मनगढ़ंत और आधारहीन हैं। उन्होंने साफ किया, "अटकलें बहुत हैं, लेकिन उनमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है। मैं यह साफ कर देना चाहता हूँ कि मैनेजमेंट मैच रेफरी के काम में अड़ंगा नहीं लगाएगा। अगर खेल भावना के विपरीत कुछ भी घटित हुआ है, तो उस पर अंतिम फैसला लेने के लिए सक्षम अधिकारी मौजूद हैं।"
क्रिकेट बोर्ड का मानना है कि नियमों से ऊपर कोई नहीं है और अगर इस समय कोई सीधी दखलंदाजी की गई, तो यह भविष्य के लिए एक गलत मिसाल बनेगी। ऐसे में अब इस पूरे विवाद का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह पूरी तरह से मैच रेफरी की अंतिम रिपोर्ट और उनके द्वारा सुनाए जाने वाले फैसले पर ही निर्भर करेगा।

