वाशिंगटन। जीवाश्म विज्ञानियों (Palaeontologists) ने अमेरिका के न्यू मैक्सिको में एक ऐसे प्राचीन और विचित्र जीव के अवशेषों की पहचान की है, जिसे आधुनिक मगरमच्छों का सुदूर पूर्वज माना जा रहा है। 'लैब्रूजास्यूकस एक्सपेक्टेटस' (Labrujasuchus expectatus) नाम का यह अद्भुत जीव आज से करीब 212 मिलियन (21.2 करोड़) साल पहले लेट ट्रायसिक काल में पृथ्वी पर मौजूद था। हालांकि, यह जीव दिखने और चलने-फिरने के मामले में आज के रेंगने वाले खूंखार मगरमच्छों से बिल्कुल जुदा था। स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी के मुख्य शोधकर्ता एलन टर्नर के मुताबिक, यह आज के घड़ियालों का सीधा पूर्वज नहीं, बल्कि मगरमच्छों के खानदान की एक अलग शाखा का 'दूर का चचेरा भाई' था।
दो पैरों पर दौड़ने वाला बिना दांतों का 'मगरमच्छ'
जीवाश्म विज्ञानियों के अनुसार, विकासक्रम की इस अलग शाखा ने 'शुवोसॉर' (Shuvosaur) नाम के जीवों को जन्म दिया था। इस प्रजाति की सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि इनका शरीर मगरमच्छों के बजाय क्रेटेशियस काल के डायनासोरों से काफी मिलता-जुलता था।
बनावट: ये जीव बेहद छरहरे थे और आज के मगरमच्छों की तरह चार पैरों के बजाय दो पैरों पर सीधे खड़े होकर दौड़ते थे।
चोंच: इनके मुंह में नुकीले दांतों की जगह एक तीखी चोंच होती थी, जिसमें दांत बिल्कुल नहीं पाए जाते थे।
वैज्ञानिक इसे अभिसारी विकास (Convergent Evolution) का एक बेहतरीन उदाहरण मान रहे हैं, जहां दो बिल्कुल अलग प्रजातियों (डायनासोर/पक्षी और मगरमच्छ के रिश्तेदार) ने जीवित रहने के लिए एक जैसी शारीरिक बनावट और दो पैरों पर चलने का तरीका अपनाया।
'चुड़ैलों के रेंच' से मिला अनोखा नाम
इस विचित्र जीव के नामकरण के पीछे भी एक बेहद दिलचस्प कहानी है। इसके जीवाश्म उत्तरी न्यू मैक्सिको के 'घोस्ट रेंच' (Ghost Ranch) नामक इलाके से मिले हैं, जो दशकों से प्राचीन जीवाश्मों का गढ़ रहा है। इस रेंच का पुराना स्पैनिश नाम 'रैंचोस डी लॉस ब्रुजोस' था, जिसका हिंदी अनुवाद 'चुड़ैलों का रेंच' होता है। इसी आधार पर स्पैनिश शब्द 'लैब्रूजा' (चुड़ैल) और ग्रीक शब्द 'स्यूकस' (मगरमच्छ) को मिलाकर इसका नाम 'लैब्रूजास्यूकस' रखा गया। वहीं, इसकी प्रजाति का नाम 'एक्सपेक्टेटस' इसलिए पड़ा क्योंकि वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र में मिले दो अन्य शुवोसॉर जीवों के बीच की कमान (कड़ी) मिलने की पहले से 'उम्मीद' (Expectation) थी।
इवोल्यूशन की गुत्थी सुलझाएंगी हड्डियां
लॉस एंजिल्स काउंटी के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम से जुड़े नाथन स्मिथ ने बताया कि इस खोज में जीव के हाथ-पैर की हड्डियां, रीढ़ के हिस्से और कई महत्वपूर्ण टुकड़े बरामद हुए हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, लैब्रूजास्यूकस पश्चिमी उत्तरी अमेरिका के इलाके में कम से कम 10 मिलियन (1 करोड़) सालों तक बिना किसी बड़े बदलाव के जीवित रहा। इस खोज से उस कालखंड के जीवों के शरीर में होने वाले क्रमिक बदलावों को समझने में बड़ी मदद मिलेगी। यह दुनिया भर में खोजा गया अपनी तरह का चौथा और उत्तरी अमेरिका का तीसरा 'शुवोसॉर' जीव है, जिसके अन्य अवशेष इससे पहले टेक्सास और अर्जेंटीना में भी मिल चुके हैं।

