पानी की किल्लत से बढ़ी परेशानी, दूषित जल सप्लाई ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली। देश की राजधानी में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बीच पानी की किल्लत लगातार गंभीर रूप ले रही है। उत्तम नगर, नजफगढ़ और द्वारका जैसे तमाम रिहायशी इलाकों में रहने वाले नागरिकों को न तो तय वक्त पर पानी मिल पा रहा है और न ही उसकी गुणवत्ता सही है। नलों से आने वाला पानी इतना प्रदूषित और बदबूदार है कि लोग इसे घरेलू कामकाज के इस्तेमाल में लाने से भी कतरा रहे हैं।

दिल्ली के कई हिस्सों में दशकों पुरानी हो चुकीं जल वितरण प्रणालियों की वजह से यह संकट और गहरा गया है। समय के साथ खराब हो चुकीं इन पाइपलाइनों में कई जगहों पर रिसाव हो रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि अनेक क्षेत्रों में सीवेज और पेयजल की लाइनें बिल्कुल पास-पास होने के कारण लीकेज के वक्त गंदा पानी सीधे सप्लाई वाले पानी में मिल जाता है, जिससे घरों तक दूषित पानी पहुंच रहा है।

जलजनित बीमारियों का बढ़ा खतरा

प्रदूषित पानी की इस समस्या ने अब लोगों की सेहत को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसा गंदा पानी पीने से लोग बीमार पड़ सकते हैं, इसलिए प्रशासन को बिना किसी देरी के स्वच्छ जल की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। यह परेशानी पुरानी होने के बावजूद अब तक इसका कोई पक्का और असरदार इलाज नहीं ढूंढा जा सका है।

यमुनापार के इलाकों में हाहाकार

पूर्वी दिल्ली के भी कई रिहायशी इलाकों में पिछले दो महीनों से पानी के लिए मारामारी मची हुई है। भजनपुरा, खजूरी खास, सोनिया विहार, यमुना विहार, वेस्ट ज्योति नगर, ईस्ट विनोद नगर और घोंडा जैसे क्षेत्रों में रहने वाले लोग जलापूर्ति के बदहाल रवैये से खासे नाराज हैं। इन इलाकों में पानी का प्रेशर इतना धीमा रहता है कि वह बहुमंजिला मकानों की ऊपरी मंजिलों तक चढ़ ही नहीं पाता, जिससे दैनिक दिनचर्या पूरी तरह ठप हो गई है।

सप्लाई ठप होने से बढ़ा आर्थिक बोझ

गंदे और बदबूदार पानी की वजह से परेशान लोगों को अब अपनी जेबें ढीली करनी पड़ रही हैं। नागरिकों के मुताबिक, सुबह के वक्त कुछ ही मिनटों के लिए पानी आता है, जिसका रंग और महक थोड़ी देर में ही बदल जाती है। ऐसे में खाना पकाने और पीने के लिए बाहर से पानी के कैन या बोतलें खरीदनी पड़ रही हैं, जिससे आम परिवारों पर हर महीने अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।

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